महात्मा ज्योतिबा फुले की पुष्प तिथि पर
सभी देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं
महात्मा ज्योतिबा फुले भारतीय समाज में समानता, न्याय और शिक्षा के सर्वांगीण प्रतीक रहे हैं।
उनका पूरा जीवन अन्याय और भेदभाव के विरुद्ध संघर्ष में बीता। समाज के वंचित, शोषित और उपेक्षित वर्गों के उत्थान के लिए उन्होंने जो कार्य किए, वे आज भी हमारे देश की सामाजिक चेतना के मूल स्तंभ बने हुए हैं। फुले दंपत्ति ने शिक्षा का दीप उन घरों तक पहुँचाया जहाँ सदियों से अज्ञान का अंधकार था। बालिकाओं की शिक्षा, विधवाओं का पुनर्विवाह, जातीय भेदभाव के विरुद्ध आवाज़—इन सभी कार्यों ने भारतीय समाज की दिशा ही बदल दी।
उन्होंने अपने कर्म, संघर्ष और निस्वार्थ सेवा से यह सिद्ध किया कि मनुष्य की महानता उसके पद, प्रतिष्ठा या धन से नहीं, बल्कि उसके विचारों और कर्मों की ऊँचाई से मापी जाती है। महात्मा फुले ने उस समय सत्य और समानता की मशाल जलाई, जब सामाजिक कुप्रथाएँ अपने चरम पर थीं।
उनकी दूरदर्शिता, समर्पण और मानवीय चेतना ने आने वाली पीढ़ियों को भी यह संदेश दिया कि समाज तभी प्रगतिशील हो सकता है जब हर व्यक्ति को बराबरी का अधिकार मिले और हर वर्ग को न्याय का अवसर प्राप्त हो।
आज उनकी पुष्प तिथि पर हम सभी उनके व्यक्तित्व और कृतित्व को स्मरण करते हुए समाज सुधार के उन सिद्धांतों को दोहराते हैं, जिन्हें उन्होंने जीवनभर जिया—
समानता, शिक्षा, स्वतंत्र सोच, और हर मानव के सम्मान की रक्षा।
यह दिन हमें पुनः जागरूक करता है कि समाज तभी आगे बढ़ेगा, जब हम फुले जी के आदर्शों को अपने चरित्र और व्यवहार में उतारेंगे।
इस पावन अवसर पर—
राजेश कुमार सिद्धार्थ
अध्यक्ष – डॉ. आंबेडकर संवैधानिक महासंघ
एवं
किसान कांग्रेस प्रदेश उपाध्यक्ष
की ओर से सभी देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएँ और बधाई।
152 विधानसभा सिधौली में सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा—
“जब तक सूरज-चाँद रहेगा, जब तक पृथ्वी पर मानव रहेगा, तब तक महात्मा ज्योतिबा फुले का नाम अमर रहेगा।
फुले केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि एक विचारधारा हैं—समानता, मानवता और न्याय की विचारधारा।”
उन्होंने आगे कहा कि महात्मा फुले का जीवन हमें यह प्रेरणा देता है कि परिवर्तन तभी संभव है जब हम अन्याय के विरुद्ध साहस के साथ खड़े हों। चाहे परस्थितियाँ कितनी भी कठिन क्यों न हों, सच्चाई और मानवीय मूल्यों का मार्ग अंततः विजय का मार्ग होता है।
फुले द्वारा स्थापित सत्यशोधक समाज ने समाज में फैली कुरीतियों को चुनौती दी और साबित किया कि जागरूकता और शिक्षा किसी भी समाज की सबसे बड़ी ताकत होती है। आज उनकी सोच न केवल भारत में, बल्कि पूरी मानवजाति के लिए प्रेरणा-स्रोत है।
इस अवसर पर हम सभी यह संकल्प लें कि—
हम फुले जी के बताए मार्ग पर चलकर समाज में भाईचारा, न्याय, समानता और शिक्षा का उजाला फैलाएँगे।
हम किसी भी प्रकार के भेदभाव—जातीय, सामाजिक, लैंगिक या आर्थिक—का विरोध करेंगे और हर व्यक्ति को सम्मान देने की भारतीय परंपरा को आगे बढ़ाएँगे।
महात्मा ज्योतिबा फुले को शत-शत नमन, शत-शत प्रणाम।
उनकी विरासत आज भी हमारे देश के सामाजिक परिवर्तन का आधार स्तंभ है, और आगे भी पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी।

