नई दिल्ली: सोशल एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक को अनशन के 20वें दिन जंतर-मंतर से हटाकर अस्पताल में भर्ती कराने का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। इस कार्रवाई को लेकर सवाल उठाते हुए वकील नरेंद्र मिश्रा ने भारत के चीफ जस्टिस को पत्र लिखकर मामले को जनहित याचिका (PIL) के रूप में सुनने का आग्रह किया है। याचिका में वांगचुक और अन्य प्रदर्शनकारियों के मौलिक अधिकारों की सुरक्षा की मांग की गई है।
याचिका में पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा गया है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के अधिकारों की रक्षा जरूरी है। इसमें दावा किया गया है कि यह आंदोलन केवल एक व्यक्ति या एक मुद्दे तक सीमित नहीं है, बल्कि छात्रों और युवाओं से जुड़े कई गंभीर सवालों को उठाता है।
याचिका में और क्या-क्या है?
सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में NEET परीक्षा में कथित अनियमितताओं, बार-बार सामने आ रहे पेपर लीक मामलों, सरकारी भर्ती और प्रवेश परीक्षाओं में पारदर्शिता की कमी जैसे मुद्दों का जिक्र किया गया है। याचिका में शैक्षणिक रिकॉर्ड और मार्कशीट की विश्वसनीयता को लेकर भी चिंता जताई गई है।
- याचिका के अनुसार, परीक्षा व्यवस्था में गड़बड़ियों के कारण लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित हो सकता है। इसमें पेपर लीक के अलावा ऐसे मामलों का भी जिक्र किया गया है, जहां कथित तौर पर परीक्षा किसी और व्यक्ति की ओर से दिए जाने या उत्तर पुस्तिका जांच में अनियमितता जैसे आरोप सामने आए हैं।
- सोनम वांगचुक इस आंदोलन का नेतृत्व कर रहे थे और उन्होंने इन्हीं मुद्दों को लेकर भूख हड़ताल शुरू की थी। पुलिस की ओर से उन्हें प्रदर्शन स्थल से हटाए जाने के बाद आंदोलन में बड़ा बदलाव आया। याचिका में यह भी कहा गया है कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पहले भी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों और छात्रों की समस्याओं को लेकर चिंता जाहिर कर चुके हैं।

