95 मजदूरों के पेट पर मारी लात, प्रधान डकार गया उनकी खून-पसीने की औकात।
कागजों पर ठोंकी फर्जी हाज़िरी, प्रधान की जेब में गई मजदूरों की तिजोरी।
योगी की जीरो टॉलरेंस का बना तमाशा,राघउपुर में कानून हुआ हताशा।
किस बड़े आका की चूम रहा चौखट, जो सरेआम मचा रहा इतनी बड़ी खटपट।
कुदरहा ब्लॉक बना भ्रष्टाचार का अड्डा, रसूख़दारों ने गाड़ रखा है अपना झंडा।
असली मजदूर दाने-दाने को तरसे, और भ्रष्ट प्रधान के घर नोटों की बारिश बरसे।
नियम-कानून गए तेल लेने, अफसर बैठे हैं यहाँ सिर्फ अपना का हिस्सा लेने।
जांच के नाम पर हो रही नंगी लीपापोती, भ्रष्टाचारियों की यहाँ दिन-रात कटती चांदी।
गरीबों की हाय ले डूबेगी, इस महाघोटाले की गंध अब लखनऊ तक गूँजेगी।
अधिकारियों की चुप्पी चीखकर कह रही, इस मलाई में सबकी हिस्सेदारी बह रही।
अब देखना है कब गिरेगा हंटर, या रसूख़ के आगे घुटने टेक देगा यह पूरा दफ्तर।
कुदरहा विकास खण्ड के राघउपुर पंचायत से जुड़ा है पूरा मामला।
धीरेन्द्र बहादुर सिंह

