चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर जारी आंकड़ों के मुताबिक अब तक हुई प्रक्रिया में 18 लाख मृतक मतदाता के नाम पाए गए हैं. निर्वाचन आयोग ने बिहार में मतदाता सूची के जारी विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को उचित ठहराते हुए कहा है कि यह सूची से अयोग्य व्यक्तियों को हटाकर चुनाव की शुचिता को बढ़ाता है.
बिहार से शुरू कर पूरे भारत में मतदाता सूची के एसआईआर का निर्देश 24 जून को दिया गया. बिहार में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बीच, भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने मंगलवार को कहा कि राज्य में अब तक 18 लाख से ज्यादा मृत मतदाताओं की सूचना मिली है. आयोग ने कोर्ट को बताया कि 18 जुलाई तक बिहार में 7,89,69,844 मौजूदा मतदाताओं में से 7,11,72,660 मतदाताओं (90.12 प्रतिशत) से गणना प्रपत्र पहले ही एकत्र किए जा चुके हैं.
चुनाव वाले बिहार में SIR पर चुनाव आयोग द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के मुताबिक, अब तक कुल 18,66,869 मृत मतदाताओं की सूचना मिली है, जबकि स्थायी रूप से स्थानांतरित मतदाताओं की संख्या 26,01,031 है. अब तक विभिन्न स्थानों पर नामांकित मतदाताओं की संख्या 7,50,742 और 11,484 ऐसे मतदाता हैं जिनका पता नहीं चल पाया है.
ये सभी मतदाता अपने निवास स्थान पर पाए गए मतदाताओं के अंतर्गत आते हैं. ऐसे मतदाताओं की कुल संख्या 52,30,126 है, जो कि भारत निर्वाचन आयोग के अनुसार कुल मतदाताओं (7,89,69,844) का 6.62 प्रतिशत है.
अब तक कुल मतदाताओं की संख्या 7,68,34,228 (कुल मतदाताओं का 97.30 प्रतिशत) हो गई है. एसआईआर के अनुसार, प्रकाशित होने वाली मसौदा मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज कराने के लिए, मतदाता के लिए सख्त शर्त यह है कि वह 25 जुलाई से पहले पूर्व-मुद्रित गणना प्रपत्र पर हस्ताक्षर करके उसे जमा करे.
चुनाव आयोग ने कहा कि जारी एसआईआर में यह सुनिश्चित करने के प्रयास तेज कर दिए गए हैं कि सभी पात्र मतदाता 1 अगस्त को प्रकाशित होने वाली मसौदा मतदाता सूची में शामिल हों.
इसमें कहा गया है, बिहार के सभी 12 प्रमुख राजनीतिक दलों के जिला अध्यक्षों द्वारा नियुक्त लगभग 1 लाख बूथ स्तरीय अधिकारी (बीएलओ), 4 लाख स्वयंसेवक और 1.5 लाख बूथ स्तरीय एजेंट (बीएलए) सहित पूरी चुनाव मशीनरी उन मतदाताओं की तलाश में एक साथ काम कर रही है जिन्होंने अभी तक अपने गणना प्रपत्र जमा नहीं किए हैं या अपने पते पर नहीं मिले हैं.
चुनाव आयोग ने कहा कि सीईओ, डीईओ, ईआरओ, बीएलओ ने सभी राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ बैठकें की हैं और उन 21.36 लाख मतदाताओं की विस्तृत सूची साझा की है जिनके फॉर्म अभी तक प्राप्त नहीं हुए हैं. साथ ही, लगभग 52.30 लाख मतदाताओं की भी सूची साझा की है जो कथित तौर पर मृत हैं या स्थायी रूप से स्थानांतरित हो गए हैं या कई स्थानों पर पंजीकृत हैं.
24 जून के एसआईआर आदेश के मुताबिक, 1 अगस्त से 1 सितंबर तक, किसी भी आम आदमी को मसौदा मतदाता सूची में किसी भी नाम को जोड़ने, हटाने और सुधार के लिए आपत्ति दर्ज कराने के लिए पूरा एक महीना उपलब्ध होगा.
सुप्रीम कोर्च ने 10 जुलाई को निर्वाचन आयोग से कहा कि वह बिहार में मतदाता सूची के चल रही एसआईआर के दौरान आधार, मतदाता पहचान पत्र और राशन कार्ड को वैध दस्तावेज माने.बिहार में 243 सीटों के लिए विधानसभा चुनाव इस साल के अंत में होने हैं. सुप्रीम कोर्ट इस मामले की सुनवाई 28 जुलाई को करेगा.
