संविधान दिवस की पूर्व संध्या – सिधौली, सीतापुर
सिधौली, सीतापुर।
152 विधानसभा सिधौली, जनपद सीतापुर में संविधान दिवस की पूर्व संध्या पर आयोजित एक विशेष जनसभा में प्रदेश उपाध्यक्ष किसान कांग्रेस एवं प्रदेश अध्यक्ष (किसान प्रकोष्ठ) श्री राजेश कुमार सिद्धार्थ ने जनता को संबोधित किया। कार्यक्रम में क्षेत्र के विभिन्न गांवों, कस्बों और सामाजिक तबकों से बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। मंच पर उपस्थित वक्ताओं ने भारतीय संविधान के महत्व, उसके मूल्यों और वर्तमान परिस्थितियों में उसे सुरक्षित रखने की आवश्यकता पर विस्तार से बात रखी।
अपने विस्तृत संबोधन में राजेश कुमार सिद्धार्थ ने कहा कि बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर ने जिस दूरदृष्टि, निष्ठा और संवेदनशीलता के साथ संविधान की रचना की थी, वह विश्वभर में लोकतांत्रिक मूल्यों का अनूठा उदाहरण है। उन्होंने कहा कि भारत का संविधान केवल एक दस्तावेज नहीं, बल्कि करोड़ों भारतीयों के अधिकारों, सपनों और समानता के प्रति विश्वास का आधार है।
उन्होंने आरोप लगाया कि आज देश में संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकारों को धीरे-धीरे समाप्त किया जा रहा है। राजेश कुमार सिद्धार्थ ने कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, शिक्षा का अधिकार, समानता का अधिकार और सामाजिक न्याय के सिद्धांतों को कमजोर करने की कोशिशें लगातार बढ़ रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान सरकार की नीतियाँ किसानों, मजदूरों, युवाओं, छात्रों, दलितों, पिछड़ों, अल्पसंख्यकों और आदिवासी समाज के मौलिक अधिकारों को कुचलने का प्रयास कर रही हैं, जिससे समाज में असंतोष और असुरक्षा बढ़ रही है।
उन्होंने कहा कि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य नहीं मिल रहा, महंगाई लगातार बढ़ रही है तथा बेरोजगारी ने युवाओं को हताश कर दिया है। मजदूरों के लिए सुरक्षा तथा सम्मानजनक मजदूरी की नीतियाँ कमजोर हुई हैं। शिक्षा प्रणाली पर व्यावसायीकरण का दबाव बढ़ा है, जिससे गरीब और ग्रामीण परिवारों के बच्चों के सामने समान अवसरों का संकट पैदा हो गया है।
राजेश कुमार सिद्धार्थ ने कहा कि संविधान दिवस केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि आत्मचिंतन का अवसर है। यह हमें याद दिलाता है कि देश के हर नागरिक को समान अधिकार और समान अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे संविधान के मूलभूत सिद्धांतों—न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व—की रक्षा के लिए एकजुट हों।
सभा में मौजूद जनता ने उनके वक्तव्य का समर्थन करते हुए तालियों से स्वागत किया। इस अवसर पर स्थानीय नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और किसान प्रतिनिधियों ने भी विभिन्न मुद्दों पर अपनी बात रखी और समाज के कमजोर वर्गों के अधिकारों की रक्षा के लिए सामूहिक प्रयास पर जोर दिया।
जनसभा के दौरान वक्ताओं ने कहा कि संविधान दिवस केवल एक समारोह नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक चेतना को पुनर्जीवित करने का एक माध्यम है। उन्होंने कहा कि जब भी कोई सत्ता, किसी भी स्तर पर, नागरिक अधिकारों को सीमित करने का प्रयास करती है, तब जनता का सतर्क और संगठित रहना लोकतंत्र की मजबूती के लिए आवश्यक है।
कार्यक्रम का उद्देश्य केवल संविधान दिवस मनाना नहीं, बल्कि समाज में यह जागरूकता फैलाना था कि संविधान हमें न केवल अधिकार देता है, बल्कि कर्तव्यों की भी याद दिलाता है। सभा के अंत में यह संकल्प लिया गया कि समाज के हर कमजोर वर्ग की आवाज को बुलंद किया जाएगा और संवैधानिक मूल्यों को सुरक्षित रखने के लिए व्यापक जनजागरूकता चलाई जाएगी।

