राजेश कुमार सिद्धार्थ
अध्यक्ष – डॉ. आंबेडकर संवैधानिक महासंघ
एवं
किसान कांग्रेस प्रदेश उपाध्यक्ष
की ओर से सभी देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएँ और बधाई।
152 विधानसभा सिधौली में आयोजित सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा—
“जब तक सूरज-चाँद रहेगा, जब तक पृथ्वी पर मानव रहेगा, तब तक महात्मा ज्योतिबा फुले का नाम अमर रहेगा।
फुले केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि एक व्यापक और प्रगतिशील विचारधारा हैं—समानता, मानवता और न्याय की विचारधारा।”
उन्होंने आगे कहा कि महात्मा फुले का जीवन भारतीय समाज में उस प्रकाशस्तंभ की तरह है, जिसने सदियों के अंधकार को चीरकर सामाजिक जागरण का मार्ग प्रशस्त किया। फुले ने यह सिद्ध किया कि समाज में परिवर्तन किसी आदेश से नहीं, बल्कि जागरूकता, शिक्षा और निरंतर संघर्ष से आता है।
उनकी जीवन यात्रा कठिनाइयों से भरी थी, परंतु उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। समाज में फैली कुरीतियों, अन्याय, जातीय भेदभाव और रूढ़ियों को चुनौती देने का जो साहस उन्होंने दिखाया, वह किसी महापुरुष में ही संभव था। विशेषकर महिलाओं, दलितों, पिछड़ों और वंचितों के उत्थान के लिए उनका संघर्ष भारतीय इतिहास का स्वर्ण अध्याय है।
फुले द्वारा स्थापित ‘सत्यशोधक समाज’ ने सामूहिक चेतना की आँधी पैदा की। यह संस्था केवल एक आंदोलन नहीं थी, बल्कि मानवता, समानता और शिक्षा का मिशन थी—एक ऐसा मिशन जिसने यह संदेश दिया कि समाज तभी प्रगतिशील होगा, जब हर मनुष्य को सम्मान और न्याय मिलेगा।
उन्होंने साबित किया कि शिक्षा ही वह चाबी है, जो समानता का द्वार खोलती है, और यही कारण है कि आज भारत के सामाजिक सुधार के हर पथ पर फुले का योगदान अविस्मरणीय है।
राजेश कुमार सिद्धार्थ ने सभा में कहा कि महात्मा फुले के विचार आज पहले से अधिक प्रासंगिक हैं। आधुनिक समय में भी समाज अनेक चुनौतियों से जूझ रहा है—असमानता, भेदभाव, अन्याय और अवसरों की कमी। ऐसे समय में फुले के विचारों पर अमल करना देश और समाज को नई दिशा दे सकता है।
उन्होंने कहा कि महात्मा फुले ने जो मार्ग हमें दिखाया है, वह केवल ऐतिहासिक धरोहर नहीं, बल्कि भविष्य की आधारशिला है।
इस अवसर पर उन्होंने यह भी कहा कि—
“मात्र श्रद्धांजलि देने से समाज नहीं बदलता। समाज तभी बदलता है जब हम महापुरुषों के जीवन से सीख लेकर उसे अपने कर्म में ढालें। फुले जी का संदेश केवल पढ़ने के लिए नहीं, बल्कि जीने के लिए है।”
इस अवसर पर हम सभी यह संकल्प लें कि—
हम फुले जी के दिखाए मार्ग पर चलकर समाज में भाईचारा, न्याय, समानता और शिक्षा का उजाला फैलाएँगे।
महिलाओँ, वंचितों और कमजोर वर्गों के अधिकारों की लड़ाई को मजबूती देंगे।
किसी भी प्रकार के भेदभाव—जातीय, सामाजिक, लैंगिक या आर्थिक—का डटकर विरोध करेंगे।
हर व्यक्ति को सम्मान और अवसर देने की भारतीय संस्कृति को और अधिक मजबूत करेंगे।
समाज में जागरूकता, शिक्षा और मानवीय मूल्यों को सर्वोच्च स्थान देंगे।
महात्मा ज्योतिबा फुले को शत-शत नमन, शत-शत प्रणाम।
उनकी विरासत केवल इतिहास का अध्याय नहीं, बल्कि जीवंत प्रेरणा है—
ऐसी प्रेरणा जो आने वाली पीढ़ियों को न्याय, मानवता और समानता के पथ पर अग्रसर होने की शक्ति देती रहेगी।
उनके विचारों की रोशनी हमेशा इस देश को दिशा देती रहेगी और उनके योगदान का स्मरण हमें अपने कर्तव्यों के प्रति सजग करता रहेगा।

