शिवरीनारायण तहसील कार्यालय में अव्यवस्था, सुविधाओं के अभाव से बढ़ी मुश्किलें
शिवरीनारायण। छह वर्ष पूर्व पूर्ण तहसील का दर्जा मिलने के बावजूद शिवरीनारायण तहसील कार्यालय अभी भी बुनियादी सुविधाओं और आवश्यक स्टाफ के अभाव से जूझ रहा है। स्थिति यह है कि विगत एक माह से तहसीलदार न्यायालय में एक भी लिपिक (रीडर) पदस्थ नहीं है, जिसके चलते नामांतरण, बंटवारा, शोध क्षमता प्रमाणपत्र एवं नोटिस-इश्तहार जैसे ऑफलाइन प्रकरणों के निपटारे में लगातार देरी हो रही है। अधिवक्ताओं और पक्षकारों को अनावश्यक पेशियों का सामना करना पड़ रहा है।
नायब तहसीलदार न्यायालय में मात्र एक बाबू है, जबकि कार्यभार अधिक होने से कोटवार के सहयोगी से भी कार्यालयी कार्य लिया जा रहा है। तकनीकी कार्य देखने के लिए ऑपरेटर की नियुक्ति नहीं होने से धान खरीदी एवं विभिन्न शासकीय योजनाओं हेतु अनिवार्य ऑनलाइन पंजीयन में भारी दिक्कतें सामने आ रही हैं। दूर-दराज़ से आने वाले किसानों को पंजीयन एवं संशोधन के लिए लंबी प्रतीक्षा करनी पड़ रही है। स्टाफ की कमी के कारण निर्वाचन ड्यूटी में लगे शिक्षकों से भी काम लिया जा रहा है।
तहसील शिवरीनारायण में 16 पटवारी हल्कों के अंतर्गत 33 गांव शामिल हैं। यहां पिछले तीन वर्षों से दो में से एकमात्र राजस्व निरीक्षक पदस्थ है। इसी तरह, तहसील अस्तित्व में आने के छह वर्ष बाद भी रजिस्ट्री कार्यालय शुरू नहीं हो सका है, जिसके कारण किसानों को खरीदी-बिक्री के लिए नवागढ़ जाना पड़ता है। वर्तमान में तहसील कार्यालय में 01 तहसीलदार, 01 नायब तहसीलदार, 02 बाबू, 01 प्रोसेस सर्वर तथा 02 चपरासी ही कार्यरत हैं।
तहसील अधिवक्ता संघ के पूर्व अध्यक्ष एवं वरिष्ठ अधिवक्ता जितेन्द्र तिवारी ने कहा कि छह साल बीत जाने के बावजूद सेटअप के अनुरूप अधिकारी-कर्मचारियों की नियुक्ति नहीं हुई है। इस संबंध में तहसील अधिवक्ता संघ द्वारा शासन-प्रशासन को लिखित आवेदन भी दिया जा चुका है। उन्होंने मांग की कि बढ़ते कार्यभार और जनसमस्याओं को देखते हुए सरकार को इस दिशा में शीघ्र हस्तक्षेप करना चाहिए।

