बंथरा (लखनऊ)।
केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा को कमजोर और समाप्त करने के कथित प्रयासों के विरोध में मनरेगा बचाओ संग्राम के तहत बंथरा में एकदिवसीय उपवास का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम वार्ड संख्या–4 स्थित आंबेडकर पार्क में हुआ, जिसमें कांग्रेस नेताओं और मनरेगा मजदूरों ने भाग लेकर सरकार की नीतियों के खिलाफ आवाज बुलंद की।
उपवास में कांग्रेस नेता रुद्रदमन बाबू सिंह, महीप सिंह, कमलेश रावत उर्फ गनेसी, बब्बन पांडेय और हरि चंद्र मौजूद रहे। वक्ताओं ने कहा कि मोदी सरकार द्वारा मनरेगा में प्रस्तावित बदलाव ग्रामीण गरीबों के काम करने के संवैधानिक अधिकार पर सीधा हमला हैं। पहले मनरेगा के तहत हर ग्रामीण परिवार को 15 दिन के भीतर काम देने की कानूनी गारंटी थी, लेकिन अब इसे खत्म कर काम को सरकार की इच्छा पर निर्भर बनाया जा रहा है।
नेताओं ने आरोप लगाया कि मजदूरी की गारंटी भी छीनी जा रही है। पहले न्यूनतम मजदूरी तय होती थी और हर साल बढ़ोतरी होती थी, लेकिन नए बदलावों के बाद न तो न्यूनतम मजदूरी की गारंटी रहेगी और न ही सालाना बढ़ोतरी की। फसल कटाई के मौसम में काम पर रोक से मजदूरों की सौदेबाजी की ताकत खत्म होगी और वे कम मजदूरी पर काम करने को मजबूर होंगे।
कार्यक्रम में कहा गया कि ग्राम पंचायतों की शक्तियां भी छीनी जा रही हैं। पहले विकास कार्यों की योजना ग्राम सभाओं और पंचायतों द्वारा बनाई जाती थी और ठेकेदारों पर रोक थी, लेकिन अब फैसले दिल्ली से होंगे। इससे पंचायतें सिर्फ आदेश मानने वाली एजेंसी बनकर रह जाएंगी और ठेकेदारों की भूमिका बढ़ेगी।
वक्ताओं ने यह भी कहा कि अब राज्य सरकारों पर मजदूरी का आर्थिक बोझ डाला जा रहा है, जिससे काम कम होने की आशंका है। एनएमएमएस ऐप और आधार आधारित भुगतान प्रणाली से करोड़ों मजदूर काम और मजदूरी से वंचित हुए हैं।
उपवास के दौरान मांग की गई कि मनरेगा में किए गए सभी बदलाव तत्काल वापस हों, काम का संवैधानिक अधिकार पूरी तरह बहाल किया जाए और न्यूनतम मजदूरी 400 रुपये प्रतिदिन तय की जाए। नेताओं ने चेतावनी दी कि मांगें न मानी गईं तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
