स्मार्ट मीटर पर बवाल: उपभोक्ताओं का फूटा गुस्सा, मुख्यमंत्री को भेजा ज्ञापन
स्मार्ट मीटर व्यवस्था को लेकर क्षेत्र में असंतोष लगातार बढ़ता जा रहा है। शनिवार को भारतीय किसान यूनियन (चौधरी) के पदाधिकारियों ने उपभोक्ताओं की समस्याओं को उठाते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को संबोधित एक ज्ञापन उपजिलाधिकारी अमरिया को सौंपा।
ज्ञापन में साफ कहा गया है कि स्मार्ट मीटर व्यवस्था आम जनता के लिए राहत नहीं, बल्कि परेशानी का कारण बन गई है। उपभोक्ताओं का आरोप है कि बिना किसी पूर्व सूचना के मीटर बंद कर दिए जाते हैं, जिससे घरों में अंधेरा छा जाता है और दैनिक जीवन पूरी तरह प्रभावित होता है। सबसे गंभीर शिकायत यह है कि मीटर रिचार्ज कराने के बावजूद उपभोक्ताओं को अधिक बिल का सामना करना पड़ रहा है। इससे लोगों में भ्रम और आक्रोश दोनों बढ़ रहे हैं।
किसान यूनियन ने अपने ज्ञापन में यह भी कहा कि उत्तराखंड जैसे राज्यों में स्मार्ट मीटर पर रोक लगाई जा चुकी है, ऐसे में उत्तर प्रदेश में भी इस व्यवस्था की समीक्षा जरूरी है। संगठन का कहना है कि महंगाई से जूझ रहे किसान और मजदूरों के लिए यह नई व्यवस्था आर्थिक बोझ बनती जा रही है, जिसे तत्काल रोका जाना चाहिए। ज्ञापन में मांग उठाई गई है कि पारंपरिक बिजली मीटरों को दोबारा लागू किया जाए, ताकि उपभोक्ताओं को अनावश्यक परेशानियों से राहत मिल सके।
भारतीय किसान यूनियन ने साफ चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ, तो संगठन सड़कों पर उतरकर आंदोलन करने को मजबूर होगा। अब सवाल यह है कि क्या सरकार उपभोक्ताओं की इस बढ़ती नाराजगी को गंभीरता से लेगी या फिर स्मार्ट मीटर विवाद और गहराएगा?
राजकुमार वर्मा
अबतक न्याय पीलीभीत

