भारत के चुनाव आयोग (ECI) का सिंगल-पॉइंट ऐप ECINET, जो वोटर टर्नआउट ऐप और CVIGIL जैसे 40 मौजूदा ऐप को अपने में समाहित कर लेगा, आगामी बिहार विधानसभा चुनावों से पहले पूरी तरह काम करने लगेगा. बिहार में विधानसभा चुनाव इस साल के अंत में होने हैं.
यह ऐप जो डेवलपमेंट के के एडवांस स्टेज में है उससे लगभग 100 करोड़ मतदाताओं को लाभ मिलने की उम्मीद है, क्योंकि यह यूजर्स को अपने डेस्कटॉप या स्मार्टफोन पर प्रासंगिक चुनावी डेटा तक पहुंचने में सक्षम बनाएगा. नागरिकों के लिए चुनावी सेवाओं की सुविधा के अलावा यह चुनाव अधिकारियों के लिए सहज और सुविधाजनक डेटा हैंडलिंग में मदद करेगा.
हालांकि, यह ऐप बिहार चुनावों से पहले पूरी तरह कार्यात्मक हो जाएगा, लेकिन गुजरात और पंजाब सहित विभिन्न राज्यों में आगामी विधानसभा उपचुनावों में कुछ मॉड्यूल उपलब्ध कराए जाएंगे. गुजरात, पश्चिम बंगाल, केरल और पंजाब की पांच विधानसभा सीटों पर उपचुनाव 19 जून को होंगे. ECINET, चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सुविधा को मजबूत करने के लिए भारत के चुनाव आयोग द्वारा की गई कई नई पहलों में से एक है.
क्या है इसका फायदा ?
भारत के चुनाव आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने शुक्रवार को ईटीवी भारत से बात करते हुए कहा, "यह एक इंटिग्रेटेड ऐप होगा, जहां कोई भी भारतीय चुनाव आयोग के सभी मौजूदा 40 ऐप पर उपलब्ध सभी सुविधाओं का लाभ उठा सकता है. इससे लगभग 100 करोड़ वोटर्स और पूरी चुनाव मशीनरी को लाभ मिलने की संभावना है."
पोल पैनल के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि इस ऐप के माध्यम से कोई भी भारतीय चुनाव आयोग के सभी लेटेस्ट अपडेट पा सकता है. साथ ही यह मतदाताओं, राजनीतिक दलों, हितधारकों और मीडिया सहित सभी के लिए यूजर फ्रेंडली होगा.
क्यो बनाया गया है ऐप?
भारत के चुनाव आयोग का यह कदम यूजर पर कई ऐप डाउनलोड करने और नेविगेट करने और अलग-अलग लॉगिन याद रखने के बोझ को कम करने के लिए भी बनाया गया है.ईसीआई के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि ऐप पहले ही डेवलपमेंट के एडवांस स्टेज में पहुंच चुका है और सुचारू कार्यक्षमता सुनिश्चित करने के लिए कठोर परीक्षण किए जा रहे हैं.
वरिष्ठ चुनाव आयोग अधिकारी ने कहा, "ECINET की कुछ विशेषताएं विभिन्न राज्यों में होने वाले आगामी उपचुनावों में शुरू की जाएंगी. बिहार चुनाव से पहले यह पूरी तरह कार्यात्मक हो जाएगा। यह सभी के लिए उपलब्ध होगा."
ECINET पर डेटा केवल इसके अधिकृत अधिकारी द्वारा दर्ज किया जाएगा. संबंधित अधिकारी द्वारा दर्ज किया जाना सुनिश्चित करेगा कि हितधारकों को उपलब्ध कराया गया डेटा यथासंभव सटीक है. हालांकि, किसी भी विवाद की स्थिति में भारत के चुनाव आयोग के अनुसार, वैधानिक प्रपत्रों में विधिवत भरा गया प्राथमिक डेटा मान्य होगा.
इसमें कहा गया है कि प्रदान किया गया डेटा जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1950, 1951, निर्वाचन पंजीकरण नियम, 1960 निर्वाचन संचालन नियम, 1961 और समय-समय पर जारी निर्देशों द्वारा स्थापित कानूनी ढांचे के भीतर सख्ती से संरेखित किया जाएगा.
