दिनदहाड़े किसान नेता पर जानलेवा हमला: पुलिस की लापरवाही से बढ़े दबंगों के हौसले
(विशेष रिपोर्ट – शाहाबाद, हरदोई)
हरदोई जिले के शाहाबाद क्षेत्र के ग्राम तड़ेर में शनिवार को उस समय सनसनी फैल गई जब दिनदहाड़े कुछ दबंगों ने किसान नेता राहुल पुत्र रामदेव पर जानलेवा हमला कर गोली चला दी। गंभीर रूप से घायल राहुल को ग्रामीणों की मदद से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) शाहाबाद पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने उनकी हालत नाजुक देखते हुए जिला अस्पताल हरदोई रेफर कर दिया। इस घटना ने पूरे इलाके में दहशत का माहौल पैदा कर दिया है।
घटना का सिलसिला और तनाव का माहौल
सूत्रों के अनुसार, शनिवार की दोपहर लगभग 12 बजे राहुल अपने खेत से लौट रहे थे, तभी रास्ते में पहले से घात लगाए बैठे चार-पांच दबंगों ने उन पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी। एक गोली राहुल के सीने में और दूसरी बांह में लगी, जिससे वे मौके पर ही गिर पड़े। ग्रामीणों ने हिम्मत दिखाते हुए हमलावरों को खदेड़ने की कोशिश की, लेकिन हमलावर तमंचा लहराते हुए फरार हो गए।
घटना के तुरंत बाद क्षेत्र में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। थाना शाहाबाद के प्रभारी निरीक्षक ने बताया कि पुलिस टीम आरोपियों की तलाश में लगातार दबिश दे रही है। वहीं, तनाव को देखते हुए आसपास के गांवों में भी सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है।
पिछले हमले की भी अनदेखी
गौरतलब है कि यह हमला अचानक नहीं हुआ। पीड़ित किसान नेता राहुल और उनके परिवार ने पुलिस प्रशासन को पहले ही संभावित खतरे की जानकारी दी थी।
राहुल के चाचा विनोद कुमार ने बताया, “बीते शुक्रवार को भी इन्हीं दबंगों ने राहुल और मुझ पर धारदार हथियार से हमला किया था। हमने तत्काल कोतवाली में लिखित शिकायत दी, लेकिन पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। अगर उस दिन पुलिस सख्त कदम उठाती, तो आज यह गोलीकांड न होता।”
गांव वालों का भी कहना है कि दबंगों के खिलाफ कई बार शिकायतें दर्ज हुईं, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। इससे उनका मनोबल इतना बढ़ गया कि उन्होंने खुलेआम फायरिंग करने से भी परहेज नहीं किया।
किसान नेता राहुल की भूमिका और लोकप्रियता
राहुल तड़ेर गांव के रहने वाले एक युवा किसान नेता हैं। वे पिछले कुछ वर्षों से किसानों की समस्याओं को लेकर सक्रिय रूप से आंदोलन कर रहे हैं। खासकर गेहूं और धान खरीद केंद्रों में किसानों के उत्पीड़न, खाद और बीज की किल्लत, और मुआवजा वितरण की अनियमितताओं के खिलाफ उन्होंने कई बार प्रशासनिक दफ्तरों का घेराव किया था।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, राहुल की लोकप्रियता तेजी से बढ़ रही थी और वे गांव में गरीब, मजदूर और किसानों के लिए एक सशक्त आवाज बन चुके थे। इसी वजह से कई प्रभावशाली लोग उनसे रंजिश रखते थे।
पुलिस प्रशासन पर उठे सवाल
घटना के बाद ग्रामीणों में पुलिस प्रशासन के खिलाफ गहरा आक्रोश है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर पुलिस पहले की शिकायतों पर संज्ञान लेती, तो यह स्थिति नहीं बनती।
एक स्थानीय बुजुर्ग किसान रामअवध ने कहा, “हमने बार-बार पुलिस को बताया था कि राहुल को जान से मारने की धमकी दी जा रही है। लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन मिला। आज देखिए, हमारे बेटे की जान खतरे में है।”
वहीं, क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ता अरविंद मिश्रा ने कहा, “यह सिर्फ एक व्यक्ति पर हमला नहीं है, बल्कि किसानों की आवाज पर हमला है। जब कोई किसान नेता प्रशासनिक भ्रष्टाचार के खिलाफ बोलता है, तो उसे इस तरह से चुप कराने की कोशिश की जाती है।”
प्रशासन की प्रतिक्रिया और जांच का दावा
घटना के बाद हरदोई पुलिस अधीक्षक ने मामले का संज्ञान लेते हुए तत्काल जांच के आदेश दिए हैं। पुलिस अधीक्षक ने कहा, “घटना अत्यंत गंभीर है। आरोपियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। जो भी दोषी होगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।”
उन्होंने साथ ही यह भी स्वीकार किया कि “पिछले विवाद की शिकायत को यदि गंभीरता से लिया गया होता, तो संभव है कि यह घटना टल जाती।”
इस बीच, शाहाबाद क्षेत्राधिकारी (सीओ) ने मौके पर पहुंचकर जांच की और ग्रामीणों से जानकारी ली। उन्होंने बताया कि प्राथमिक जांच में पुरानी रंजिश को कारण माना जा रहा है, हालांकि अन्य पहलुओं की भी जांच की जा रही है।
गांव में तनाव, प्रशासन सतर्क
घटना के बाद पूरे गांव में भारी पुलिस बल की तैनाती की गई है। क्षेत्र के सभी संवेदनशील बिंदुओं पर पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं। महिलाओं और बुजुर्गों में भय का माहौल है। गांव के स्कूल भी एहतियातन बंद कर दिए गए हैं।
पुलिस सूत्रों ने बताया कि फरार आरोपियों के संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दी जा रही है। जल्द ही सभी की गिरफ्तारी की संभावना जताई जा रही है।
राजनीतिक और सामाजिक संगठनों की प्रतिक्रिया
घटना की खबर फैलते ही विभिन्न किसान संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने राहुल के समर्थन में आवाज बुलंद की है।
भारतीय किसान यूनियन (भानु) के जिला संयोजक धर्मवीर सिंह ने कहा, “राहुल जैसे किसान नेता पर हमला पूरे किसान समाज के खिलाफ है। अगर दोषियों को 24 घंटे के अंदर गिरफ्तार नहीं किया गया तो हम जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन करेंगे।”
वहीं, आल इंडिया किसान संघर्ष समिति ने भी प्रशासन से निष्पक्ष जांच और पीड़ित परिवार को सुरक्षा देने की मांग की है।
निष्कर्ष: प्रशासनिक जवाबदेही की मांग
शाहाबाद की यह घटना न केवल एक व्यक्ति पर हमला है, बल्कि यह कानून-व्यवस्था पर गहरे प्रश्नचिह्न लगाती है। किसान नेता राहुल पर हमला उस ढिलाई का परिणाम है जो शिकायतों को “सामान्य विवाद” कहकर टाल दी जाती है।
यदि प्रशासन समय रहते संवेदनशील होता, तो आज एक जागरूक किसान कार्यकर्ता की जिंदगी खतरे में न होती।
ग्रामीणों और किसान संगठनों की एकजुट मांग है कि इस घटना की एसआईटी जांच कराई जाए, आरोपियों को सख्त सजा दी जाए और पीड़ित परिवार को आर्थिक मदद व सुरक्षा मुहैया कराई जाए।
