जनपद बहराइच में बड़ा भ्रष्टाचार उजागर — सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र रिसिया में अधीक्षक और डॉक्टरों पर गंभीर आरोप, बाहर की दवाइयों के खेल से गरीबों का शोषण
जनपद बहराइच के विकासखंड रिसिया व थाना रिसिया क्षेत्र के अंतर्गत स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र रिसिया आज गंभीर आरोपों और सवालों के घेरे में है। स्वास्थ्य सेवाओं पर सरकार द्वारा सख्त निर्देश और भारी बजट के बावजूद यहां डॉक्टरों व अधीक्षक पर बड़ी स्तर की अनियमितताओं, भ्रष्टाचार और गरीब मरीजों के आर्थिक शोषण के आरोप लगे हैं।
ताजा मामला यह है कि अस्पताल के अधीक्षक के संरक्षण में डॉक्टरों द्वारा मरीजों को लगातार बाहर की महंगी दवाइयां लिखी जा रही हैं। सरकारी पर्चे के साथ निजी दुकान का पर्चा दिया जा रहा है। यह स्थिति सिर्फ एक-दो दिन की नहीं, बल्कि वर्षों से चली आ रही है, जिसका खामियाज़ा गरीब और मजदूर वर्ग झेल रहा है।
1. भ्रष्टाचार का खुला खेल: सरकारी दवाइयां उपलब्ध होने के बावजूद बाहर की दवाइयां लिखना नियमों का सीधा उल्लंघन
उत्तर प्रदेश शासन की ओर से जारी निर्देशों में स्पष्ट उल्लेख है कि सरकारी अस्पतालों में मरीजों को सिर्फ सरकारी दवाइयां दी जाएंगी और बाहरी दवाइयां लिखना पूर्ण रूप से प्रतिबंधित है।
लेकिन सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र रिसिया में ये नियम साफ-साफ तोड़े जा रहे हैं।
यहां डॉक्टर सरकारी पर्चे के साथ-साथ बाहर की दवाइयों का भी पर्चा मरीजों को दे रहे हैं। मरीजों के पास मौजूद पर्चे और तस्वीरें इस बात का ठोस प्रमाण हैं कि अस्पताल में सरकारी दवाइयों की उपलब्धता होने के बावजूद बाहर की दवाइयों को प्राथमिकता दी जा रही है।
2. मरीज का बयान: “अधीक्षक ने कहा कि सरकारी दवाइयां उपलब्ध नहीं, बाहर की खरीद लो”
रिसिया बाजार निवासी लालू उर्फ अनिल मिश्रा ने AB TAK TV के पत्रकार अदहम खान से फोन पर बातचीत में बताया:
“साहब, हमसे अधीक्षक ने खुद कहा कि सरकारी दवाई नहीं रहती, इसलिए बाहर की दवाई खरीद लो। हमने 1886 रुपए की दवाई खरीद ली। हमारे पास क्या विकल्प था? डॉक्टर और अधीक्षक दोनों कह रहे थे कि बाहर से दवा लानी पड़ेगी।”
लालू का यह बयान सिर्फ एक घटना नहीं, बल्कि उस व्यथा की कहानी है जिसे यहां सैकड़ों गरीब मरीज रोज अनुभव करते हैं।
3. स्थानीय लोगों के आरोप: हमेशा से बाहर की दवाइयां लिखी जाती हैं, गरीबों की मजबूरी का फायदा उठाया जाता है
रिसिया क्षेत्र के कई लोगों का कहना है कि यहां का यह भ्रष्टाचार नया नहीं है। लोग दबी जुबान में बताते हैं कि इस स्वास्थ्य केन्द्र में वर्षों से बाहर की दवाइयां लिखने का रैकेट चलता आया है।
स्थानीय निवासी शिवनारायण ने बताया:
“हम गरीब लोग अस्पताल इसलिए जाते हैं कि सरकारी दवाई मिले। लेकिन यहां डॉक्टर लोग हमेशा बाहर की दवाई लिखते हैं। पैसा न होने के कारण कई लोग इलाज अधूरा छोड़ देते हैं। डॉक्टर लोग गरीबों के साथ भेदभाव करते हैं।”
किसी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा:
“कुछ मेडिकल स्टोरों से डॉक्टरों का कमीशन तय है। उसी दुकान का पर्चा मरीज को दिया जाता है। यह पूरा खेल सांठगांठ का है।”
4. शासन के आदेशों की लगातार अनदेखी
सरकार की ओर से कई बार आदेश जारी किए गए कि:
किसी भी सरकारी चिकित्सालय में बाहरी दवा लिखना अपराध है।
अधीक्षक अपने फंड से आवश्यक दवाइयों की खरीद कर मरीजों को मुफ्त दें।
मरीजों को अनावश्यक खर्च में न डाला जाए।
लेकिन सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र रिसिया पर इन निर्देशों का कोई प्रभाव नहीं है। यहां का अधीक्षक जिला स्तर पर बैठे अधिकारियों के निर्देशों को अनदेखा कर रहा है।
5. CMO कार्यालय को दी गई शिकायत, लेकिन कार्रवाई शून्य: क्या मोटी रकम सबकुछ दबा रही है?
AB TAK TV द्वारा यह मामला सामने आने के बाद वरिष्ठ पत्रकार अदहम खान ने स्वयं मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO), बहराइच से इस विषय में बातचीत की थी।
CMO ने तत्काल जांच के आदेश जारी करते हुए कहा था कि:
“मामले की जांच सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र रिसिया के अधीक्षक और टीम द्वारा कराई जाएगी।”
लेकिन सवाल यह है:
जब शिकायत अधीक्षक के खिलाफ ही थी,
और वही पूरा खेल चला रहे हैं,
तो क्या ऐसे में अधीक्षक अपनी ही जांच निष्पक्षता से करेंगे?
जवाब स्पष्ट है — नहीं।
आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। कोई नोटिस नहीं। न किसी जिम्मेदार को तलब किया गया। न किसी मेडिकल स्टोर पर जांच हुई।
इससे बड़ा सवाल उठता है:
क्या अधीक्षक इस पूरे भ्रष्टाचार के बदले मोटी रकम लेकर झोलाछाप डॉक्टरों और दवा दुकानदारों को संरक्षण दे रहे हैं?
6. झोलाछाप डॉक्टरों का आतंक: भोली-भाली जनता को लूटने का नया केंद्र
रिसिया क्षेत्र में झोलाछाप डॉक्टरों की भरमार है। ये डॉक्टर बिना डिग्री, बिना प्रशिक्षण और बिना अनुमति के गाँवों में इलाज का दावा करते हैं।
कई बार ये मरीजों को सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र भेजते हैं और वहां से मरीजों को बाहर की दवाइयां खरीदने को कहा जाता है।
इसमें कहीं न कहीं सिस्टम की सांठगांठ की बू आती है।
एक स्थानीय शिक्षक ने कहा:
“अगर अधीक्षक ईमानदार होते तो झोलाछाप डॉक्टर इलाके में नहीं पनपते। लेकिन यहां तो लगता है उन्हें संरक्षण मिलता है।”
7. मरीजों की आर्थिक तबाही: 1000–2000 रुपये की दवाइयां खरीदना गरीब परिवार के लिए असंभव
रिसिया क्षेत्र ग्रामीण और आर्थिक रूप से पिछड़ा हुआ इलाका है। यहां ज्यादातर लोग मजदूरी करते हैं।
1886 रुपये की दवाइयां खरीदना उनके लिए एक सप्ताह की कमाई से भी ज्यादा है।
जब डॉक्टर उन्हें बाहर की दवाइयां लिखते हैं तो वे दो ही रास्तों पर खड़े हो जाते हैं:
दवाइयां खरीदकर घर में भूखा रहना।
या बीमारी के साथ जीना और इलाज छोड़ देना।
सरकारी अस्पतालों का उद्देश्य गरीबों को राहत देना था,
लेकिन सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र रिसिया उन्हें और अधिक कष्ट में धकेल रहा है।
8. बड़े सवाल जो जिले के प्रशासन व शासन के सामने खड़े हुए
क्या सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र रिसिया में सरकारी दवाइयां उपलब्ध हैं? यदि हां, तो उनका वितरण क्यों नहीं?
अधीक्षक ने अपने फंड से अब तक कितनी दवाइयां खरीदीं? उनका रिकॉर्ड कहां है?
बाहर की दवाइयां लिखने के पीछे डॉक्टरों की क्या भूमिका है?
क्या यह काम कमीशन पर होता है?
क्या झोलाछाप डॉक्टरों को प्रशासनिक संरक्षण प्राप्त है?
CMO द्वारा दी गई जांच आज तक अधूरी क्यों है?
क्या इसकी वजह अधिकारी-अधीक्षक-डॉक्टर-मेडिकल स्टोर के बीच वित्तीय लेन-देन है?
9. जनता की मांग: कठोर कार्रवाई, निलंबन और उच्चस्तरीय जांच
रिसिया की जनता, सामाजिक संगठनों, मीडिया और कई ग्रामवासियों ने एक स्वर में मांग उठाई है:
सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र रिसिया के अधीक्षक को तत्काल निलंबित किया जाए।
सभी डॉक्टरों के पर्चों की जांच एक स्वतंत्र कमेटी से कराई जाए।
दवा स्टॉक रजिस्टर व खरीद-फरोख्त की जांच की जाए।
कमीशनखोरी में शामिल मेडिकल स्टोरों पर कड़ी कार्रवाई हो।
झोलाछाप डॉक्टरों पर मुकदमा दर्ज हो और लाइसेंस जैसी सुविधाओं पर रोक लगे।
पीड़ित मरीजों को नुकसान की भरपाई दी जाए।
10. निष्कर्ष: स्वास्थ्य व्यवस्था की सड़ांध को उजागर करता यह मामला
रिसिया सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र का यह मामला किसी एक अस्पताल का भ्रष्टाचार नहीं, बल्कि पूरे स्वास्थ्य तंत्र की विफलता का प्रतीक है।
जब सरकारी अस्पताल में ईमानदारी, पारदर्शिता और जवाबदेही ही खत्म हो जाए,
जब गरीब की मजबूरी को पैसा बनाने का साधन बना दिया जाए,
जब दवाइयों जैसी मूलभूत सुविधा पर भ्रष्टाचार हावी हो जाए,
तो यह सिर्फ प्रशासन की विफलता नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए खतरे की घंटी है।
यह मामला तत्काल प्रभाव से कार्रवाई की मांग करता है।
अन्यथा रिसिया जैसे स्वास्थ्य केन्द्र पूरे जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की छवि को पूरी तरह ध्वस्त कर देंगे।
अदहम खान
वरिष्ठ पत्रकार, AB TAK TV
जनपद बहराइच, उत्तर प्रदेश

