लखनऊ। संविधान दिवस के अवसर पर डॉ. आंबेडकर संवैधानिक महासंघ द्वारा राजधानी लखनऊ के तीन प्रमुख स्थलों – डॉ. आंबेडकर सभा भवन, बापू भवन के सामने स्थित महासंघ के केंद्रीय कार्यालय तथा बख्शी तालाब गोमती नगर कार्यालय – में भव्य कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। तीनों स्थानों पर समाज के विभिन्न वर्गों में उत्साह देखा गया और सुबह से ही भीम अनुयायियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, किसानों, महिलाओं, युवाओं और विभिन्न प्रकोष्ठों के पदाधिकारियों का आगमन होता रहा। सभी कार्यक्रमों में संविधान दिवस को अत्यंत गरिमापूर्ण, प्रेरणादायी और ऐतिहासिक रूप में मनाया गया।
डॉ. आंबेडकर सभा भवन में आयोजित मुख्य कार्यक्रम का संचालन मुख्य संयोजक रामचंद्र पटेल ने किया। उन्होंने संविधान निर्माण की ऐतिहासिक प्रक्रिया, डॉ. भीमराव आंबेडकर के योगदान और सामाजिक न्याय की यात्रा पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जब तक संविधान का वास्तविक लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक नहीं पहुँचता, तब तक महासंघ का संघर्ष जारी रहेगा।
सभा की अध्यक्षता सरोज सियाराम मौर्य ने की। उन्होंने कहा कि संविधान दिवस यह याद दिलाता है कि डॉ. आंबेडकर ने केवल संविधान नहीं लिखा, बल्कि भारत के हर नागरिक के लिए समानता, न्याय और सम्मान का रास्ता बनाया। उन्होंने महिलाओं के संवैधानिक अधिकारों और शिक्षा तथा आत्मनिर्भरता की महत्ता पर जोर दिया।
महिला प्रकोष्ठ की अध्यक्ष सोनम गौतम ने कहा कि संविधान ने भारतीय महिलाओं को अभूतपूर्व अधिकार और अवसर प्रदान किए हैं। उन्होंने कहा कि महासंघ का लक्ष्य है कि कोई भी महिला अपने अधिकारों से वंचित न रहे और उसकी सुरक्षा, शिक्षा और सम्मान सुनिश्चित हो।
महिला प्रकोष्ठ की संयोजक डॉक्टर सत्य दोहरे ने संविधान निर्माताओं के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि संविधान दिवस हमें यह संकल्प दोहराने का अवसर देता है कि हम हर प्रकार के भेदभाव और अन्याय का विरोध करते रहेंगे।
अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय अध्यक्ष अब्दुल रहमान ने कहा कि संविधान भारत की विविधता को एक सूत्र में पिरोने वाला दस्तावेज है। उन्होंने कहा कि समाज में नफरत फैलाने वाली ताकतें कभी सफल नहीं हो सकतीं, जब तक नागरिक संविधान के प्रति जागरूक और सजग रहें।
बापू भवन के सामने स्थित महासंघ कार्यालय और बख्शी तालाब गोमती नगर स्थित कार्यालय में भी संविधान दिवस के अवसर पर विशेष सभाओं का आयोजन किया गया। दोनों स्थलों पर बड़ी संख्या में लोग उपस्थित हुए। पदाधिकारियों ने संविधान की प्रस्तावना, मौलिक अधिकारों और सामाजिक न्याय के विषयों पर विचार साझा किए। युवा, महिलाएँ, अल्पसंख्यक और किसान प्रकोष्ठ के पदाधिकारियों ने संविधान के प्रति अपनी निष्ठा व्यक्त की और समाज में समानता व भाईचारे को बढ़ावा देने के संकल्प के साथ विचार प्रस्तुत किए।
मुख्य कार्यक्रम का सबसे प्रमुख आकर्षण डॉ. आंबेडकर संवैधानिक महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष तथा किसान कांग्रेस उत्तर प्रदेश के प्रदेश उपाध्यक्ष राजेश कुमार सिद्धार्थ का विस्तृत व विचारोत्तेजक संबोधन रहा। उनका भाषण तीनों स्थानों पर उपस्थित जनसमूह ने बड़े ध्यान से सुना तथा बार-बार तालियों से स्वागत किया। उन्होंने कहा कि संविधान केवल प्रशासनिक दस्तावेज नहीं, बल्कि भारत का मार्गदर्शक और लोकतांत्रिक आत्मा है। उन्होंने भारतीय संविधान द्वारा दिए गए मौलिक अधिकारों की व्याख्या करते हुए कहा कि ये अधिकार भारत के हर नागरिक को मजबूत बनाते हैं।
उन्होंने सामाजिक न्याय, शिक्षा, समान अवसर, जातिगत भेदभाव के उन्मूलन और आर्थिक असमानताओं के समाधान पर जोर देते हुए कहा कि जब तक समाज का अंतिम व्यक्ति सुरक्षित और सम्मानित नहीं होगा, तब तक भारत विकसित राष्ट्र नहीं बन सकता। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे संविधान की जानकारी को जन-जन तक पहुँचाने में अग्रणी भूमिका निभाएँ और सोशल मीडिया का उपयोग जागरूकता फैलाने के लिए करें।
किसानों की समस्याओं पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि आज भी भारत का किसान संघर्ष कर रहा है। लागत बढ़ रही है, लेकिन उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा। उन्होंने जल प्रबंधन, कृषि सुधार, सिंचाई व्यवस्था और किसानों को सम्मान देने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि किसान कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष के रूप में वे किसानों की आवाज सरकार तक मजबूती से पहुँचाते रहेंगे।
तीनों स्थानों पर आयोजित कार्यक्रमों के अंत में संविधान की प्रस्तावना का सामूहिक वाचन किया गया। उपस्थित लोगों ने यह संकल्प लिया कि वे संविधान की रक्षा करेंगे, किसी भी प्रकार के भेदभाव का विरोध करेंगे और समाज में समानता, शांति व भाईचारा स्थापित करने के लिए निरंतर कार्य करेंगे।
कार्यक्रम का समापन राष्ट्रीय गान के साथ हुआ। लखनऊ के डॉ. आंबेडकर संवैधानिक महासंघ, बापू भवन के सामने कार्यालय पर बख्शी तालाब, गोमती नगर स्थित कार्यालय में संविधान दिवस को इस वर्ष एक ऐतिहासिक, प्रेरणादायी और सामाजिक परिवर्तन के लिए समर्पित दिवस के रूप में उल्लास और सम्मान के साथ मनाया गया।

