संविधान निर्माता को नमन और परिनिर्वाण दिवस का महत्व
आज का यह ऐतिहासिक और भावनात्मक दिन, 6 दिसंबर, हम सभी के लिए अत्यंत मार्मिक है। यह वह तिथि है जब महान चिंतक, क्रांतिकारी सुधारक, आधुनिक भारत के शिल्पकार और हमारे संविधान के निर्माता बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर का परिनिर्वाण हुआ था।
इस अवसर पर मैं, राजेश कुमार सिद्धार्थ, भारत के उन करोड़ों लोगों की ओर से विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ जिनके जीवन को बाबा साहेब की विचारधारा, संघर्ष और नेतृत्व ने दिशा दी, सम्मान दिया और आत्मविश्वास प्रदान किया।
हम सभी आज केवल स्मरण करने नहीं आए हैं, बल्कि बाबा साहेब के आदर्शों को पुनः जीवन में उतारने का संकल्प लेकर एकत्रित हुए हैं।
बाबा साहेब का सपना — एक समतामूलक और आधुनिक भारत
बाबा साहेब का जीवन किसी एक वर्ग, जाति या समुदाय का इतिहास नहीं है; यह भारत की आत्मा का इतिहास है। उन्होंने हर उस व्यक्ति की लड़ाई लड़ी जिसे समाज ने हाशिये पर धकेल दिया था।
इस अवसर पर अपने विचार प्रकट करते हुए मैं, राजेश कुमार सिद्धार्थ, यह कहना चाहता हूँ कि बाबा साहेब का सपना था —
एक ऐसा भारत जहाँ अवसर सबको मिले, अधिकार सबके हों और सम्मान किसी के भी जन्म पर निर्भर न हो।
उन्होंने कहा था कि समाज तभी उन्नत होता है जब वह अपनी कमजोरियों को पहचानकर उन्हें दूर करने का साहस करे।
आज भी जाति आधारित भेदभाव — एक कठोर सच्चाई
आज जब मैं समाज को देखता हूँ तो पाता हूँ कि हमें उनके सपनों की ओर अभी लंबी यात्रा करनी है।
आज भी जाति देखकर
– आपका सम्मान तय होता है,
– आपकी योग्यता मूल्यांकित होती है,
– नौकरी और पदोन्नति तय होती है,
– और कई बार आपकी सुरक्षा व भविष्य भी निर्धारित हो जाता है।
भारत जैसे विशाल और प्रगतिशील राष्ट्र में यह स्थिति चिंताजनक ही नहीं, बल्कि संविधान की भावना के प्रतिकूल है।
मैं, राजेश कुमार सिद्धार्थ, इस मंच से पूर्ण स्पष्टता के साथ कहना चाहता हूँ कि जाति आधारित भेदभाव भारत की प्रगति में सबसे बड़ी बाधा है और इसे समाप्त करना ही बाबा साहेब को सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
भारतीय संविधान — समानता का महान संकल्प
बाबा साहेब ने जिस संविधान का निर्माण किया, वह केवल शासन की व्यवस्था नहीं, बल्कि सामाजिक क्रांति का आधार है।
उन्होंने सुनिश्चित किया कि—
– न्याय सबका अधिकार हो,
– समान अवसर प्रत्येक नागरिक को मिले,
– शिक्षा सबके लिए उपलब्ध हो,
– और कोई भी व्यक्ति किसी भी आधार पर भेदभाव का शिकार न बने।
संविधान का मूल संदेश है—
“राजा और रंक, दोनों एक समान।”
मैं, राजेश कुमार सिद्धार्थ, यह अपील करता हूँ कि संविधान को केवल पुस्तक की तरह न देखा जाए, बल्कि यह हमारे आचरण और निर्णयों का मूल आधार बने।
जाति तोड़ो, समाज जोड़ो — बाबा साहेब का वास्तविक संदेश
बाबा साहेब ने जीवनभर जाति व्यवस्था को सामाजिक विभाजन की जड़ बताया।
उनका स्पष्ट संदेश था—
“जाति तोड़ो, समाज जोड़ो। सबको शिक्षा दो, सबको सम्मान दो, सबको बराबरी का हक दो।”
हमारी जिम्मेदारी है कि हम अपने परिवार, समाज, कार्यस्थल और राजनीतिक व्यवस्था में ऐसे व्यवहार को बढ़ावा दें जो जाति को नहीं, मानवता को प्राथमिकता दे।
मैं, राजेश कुमार सिद्धार्थ, यह मानता हूँ कि जब तक समाज जाति से मुक्त नहीं होगा, तब तक भारत सशक्त राष्ट्र नहीं बन सकता।
युवा पीढ़ी को बाबा साहेब की विचारधारा से जोड़ना आवश्यक
आज का युवा परिवर्तन चाहता है, अवसर चाहता है और अपने सपनों को उड़ान देने वाला वातावरण चाहता है।
हमें युवा पीढ़ी को यह समझाना होगा कि डॉ. अंबेडकर का आंदोलन केवल दलितों का आंदोलन नहीं था, बल्कि यह संपूर्ण मानवता की मुक्ति का आंदोलन था।
मैं युवाओं से यह कहना चाहता हूँ कि—
समाज में बदलाव आपके हाथों से ही आएगा।
बाबा साहेब का अध्ययन करें, संविधान को समझें और अन्याय के विरुद्ध खड़े हों।
हमारा संकल्प — बाबा साहेब के सपनों को साकार करना
आज के इस पावन अवसर पर, मैं राजेश कुमार सिद्धार्थ, यहाँ उपस्थित सभी साथी नागरिकों के साथ यह संकल्प लेता हूँ कि—
– हम संविधान की रक्षा करेंगे,
– हम सामाजिक समरसता को बढ़ावा देंगे,
– हम जाति आधारित भेदभाव के खिलाफ संघर्ष करेंगे,
– हम शिक्षा और समान अवसरों को समाज का आधार बनाएंगे,
– और उन मूल्यों को हर स्तर पर लागू करेंगे जिनका सपना बाबा साहेब ने देखा था।
यही हमारे राष्ट्र की उन्नति का मार्ग है।
समापन
बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर का जीवन संघर्ष, संकल्प, अध्ययन, त्याग और क्रांति का अद्वितीय उदाहरण है।
आज हम उन्हें केवल याद नहीं कर रहे, बल्कि उनके विचारों को अपने जीवन का आधार बनाने का संकल्प दोहरा रहे हैं।
मैं, राजेश कुमार सिद्धार्थ, आप सभी के साथ मिलकर यह प्रतिज्ञा करता हूँ कि—
हम समानता, न्याय, स्वतंत्रता और बंधुत्व को अपने आचरण में उतारकर भारत को वह स्वरूप देंगे जिसकी कल्पना हमारे संविधान निर्माता ने की थी।
इसी के साथ बाबा साहेब को कोटि-कोटि नमन।

