संत शिरोमणि गुरु रविदास की वाणी से ही बहुजन समाज जाति-पांति से मुक्त होकर एकजुट होगा : राजेश कुमार सिद्धार्थ
सीतापुर।
152 विधानसभा क्षेत्र सिधौली अंतर्गत ग्राम सहजनपुर में डॉ. आंबेडकर संवैधानिक महासंघ के तत्वावधान में संत शिरोमणि गुरु रविदास जयंती प्रति वर्ष की भांति इस वर्ष भी भव्य एवं धूमधाम से मनाई गई। इस अवसर पर बहुजन महापुरुषों की झांकियों के साथ एक विशाल शोभायात्रा निकाली गई, जो ग्राम सहजनपुर से गोधन पुलिस चौकी, मानव होते हुए जुजौर मऊ से डॉ. भीमराव अंबेडकर पार्क पहुँची, जहाँ विशाल जनसभा का आयोजन किया गया।
जनसभा को संबोधित करते हुए डॉ. आंबेडकर संवैधानिक महासंघ के अध्यक्ष राजेश कुमार सिद्धार्थ ने कहा कि संत शिरोमणि गुरु रविदास सामाजिक समानता और मानवता के महान प्रतीक हैं। उन्होंने गुरु रविदास की वाणी— “जाति-जाति में जाती है, जस केलन के पात”—का उल्लेख करते हुए कहा कि यह संदेश आज भी प्रासंगिक है कि जाति-पांति मानव निर्मित व्यवस्था है, जबकि मानवता सर्वोपरि है। बहुजन समाज को गुरु रविदास के बताए मार्ग पर चलकर जातिगत भेदभाव से मुक्त होकर एकजुट होना होगा।
डॉ. जगजीवन सिद्धार्थ ने कहा कि संत रविदास ने उस दौर में सामाजिक क्रांति का सूत्रपात किया, जब समाज में भेदभाव अपने चरम पर था। उन्होंने कहा कि गुरु रविदास की वाणी और बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर द्वारा प्रदत्त संविधान बहुजन समाज के लिए मार्गदर्शक हैं। शिक्षा, संगठन और संवैधानिक अधिकारों के प्रति जागरूकता ही सामाजिक परिवर्तन का आधार है।
इंद्रसेन गौतम ने कहा कि संत रविदास ने श्रम की गरिमा और आत्मसम्मान के साथ जीवन जीने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि जब तक बहुजन समाज संगठित होकर अन्याय और भेदभाव के विरुद्ध आवाज नहीं उठाएगा, तब तक समानता का सपना साकार नहीं होगा।
सुरेश चंद ने कहा कि गुरु रविदास ने कर्म को ही मनुष्य की वास्तविक पहचान बताया और ऐसे समाज की कल्पना की जहाँ सभी को समान अधिकार और सम्मान मिले।
हेमनाथ गौतम ने संत रविदास द्वारा सामाजिक कुरीतियों पर किए गए प्रहार को रेखांकित किया।
मास्टर गुरुदीन गौतम ने शिक्षा को सामाजिक परिवर्तन का सबसे सशक्त माध्यम बताया।
नाथू लाल आजाद ने अन्याय के विरुद्ध निर्भीक संघर्ष की प्रेरणा पर प्रकाश डाला।
मीना गौतम ने नारी सम्मान और समानता पर संत रविदास के विचारों को सामने रखा।
सोनम गौतम ने कहा कि गुरु रविदास की वाणी बहुजन एकता की मजबूत कड़ी है।
पंडित प्रदीप पासी ने कहा कि समता, भाईचारा और मानवता ही सच्चा धर्म है।
लालचंद गौतम ने कहा कि गुरु रविदास और बाबा साहेब डॉ. अंबेडकर का उद्देश्य समान समाज की स्थापना था।
कार्यक्रम में डॉ. जगजीवन सिद्धार्थ, इंद्रसेन गौतम, सुरेश चंद सहित सैकड़ों लोगों की उपस्थिति रही। संत शिरोमणि गुरु रविदास जयंती सामाजिक समरसता, बहुजन एकता और संविधान के प्रति संकल्प के साथ संपन्न हुई।

