जाति-उन्मूलन और मानवता के संकल्प के साथ सिधौली के ग्राम रमनगरा में भव्य रूप से मनी संत शिरोमणि गुरु रविदास जयंती
बुद्ध–रविदास–आंबेडकर के विचारों पर चलकर ही बनेगा समतामूलक समाज : राजेश कुमार सिद्धार्थ
सिधौली (सीतापुर)।
जनपद सीतापुर के सिधौली क्षेत्र अंतर्गत ग्राम रमनगरा में संत शिरोमणि गुरु रविदास की जयंती इस वर्ष भी परंपरागत श्रद्धा, सामाजिक चेतना और व्यापक जनभागीदारी के साथ अत्यंत गरिमामय वातावरण में मनाई गई। यह आयोजन केवल धार्मिक या सांस्कृतिक कार्यक्रम तक सीमित न रहकर सामाजिक समरसता, समानता, मानवाधिकार और संवैधानिक मूल्यों के पक्ष में एक सशक्त सामाजिक संदेश के रूप में उभरा।
कार्यक्रम की शुरुआत प्रातःकाल बहुजन समाज में जन्मे महापुरुषों की भव्य झांकियों के साथ हुई। तथागत गौतम बुद्ध, संत शिरोमणि गुरु रविदास और संविधान निर्माता बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के जीवन, संघर्ष और विचारों को दर्शाती झांकियों ने ग्राम रमनगरा सहित आसपास के क्षेत्रों में भ्रमण किया। झांकी यात्रा के दौरान ग्रामीणजन, युवा, महिलाएं और बुजुर्ग बड़ी संख्या में शामिल हुए। जगह-जगह लोगों ने पुष्पवर्षा कर स्वागत किया और सामाजिक समानता व भाईचारे के संदेश को आगे बढ़ाया।
झांकी भ्रमण के उपरांत सायं लगभग पांच बजे कार्यक्रम विशाल जनसभा में परिवर्तित हो गया। कार्यक्रम स्थल पर सर्वप्रथम तथागत गौतम बुद्ध, संत रविदास और बाबा साहेब डॉ. अंबेडकर की प्रतिमाओं पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए गए। इसके पश्चात विधिवत जनसभा प्रारंभ हुई, जिसमें जनपद के विभिन्न क्षेत्रों से आए सामाजिक कार्यकर्ता, जनप्रतिनिधि, बुद्धिजीवी वर्ग, युवा संगठन, महिला संगठन और बहुजन समाज के लोग बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
जनसभा के मुख्य अतिथि डॉ. आंबेडकर संवैधानिक महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेश कुमार सिद्धार्थ रहे। उनके साथ किसान यूनियन के जिला अध्यक्ष मयंक सिंह, डॉ. आंबेडकर संवैधानिक महासंघ महिला प्रकोष्ठ की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनम गौतम, युवा प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय अध्यक्ष अभय प्रताप सिंह त्यागी, सामाजिक कार्यकर्ता संदीप राठौर, युवा प्रकोष्ठ के जिला अध्यक्ष अनुज कुमार गौतम मंचासीन रहे। कार्यक्रम का संचालन विधानसभा प्रभारी सिधौली एवं बसपा नेता मनीराम गौतम द्वारा किया गया।
मुख्य अतिथि राजेश कुमार सिद्धार्थ ने अपने विस्तृत संबोधन में कहा कि संत शिरोमणि गुरु रविदास केवल एक संत नहीं थे, बल्कि वे सामाजिक क्रांति के महान चिंतक और मार्गदर्शक थे। उन्होंने सदियों पहले जिस सामाजिक अन्याय, जातिगत भेदभाव और ऊँच-नीच की व्यवस्था को चुनौती दी, वह आज भी हमारे समाज की सबसे बड़ी समस्या बनी हुई है। उन्होंने कहा कि संत रविदास का दर्शन आज के दौर में और भी अधिक प्रासंगिक हो गया है।
राजेश कुमार सिद्धार्थ ने संत रविदास के प्रसिद्ध दोहे का उल्लेख करते हुए कहा कि जब तक समाज से जाति-प्रथा समाप्त नहीं होती, तब तक मनुष्य-मनुष्य के बीच सच्चा भाईचारा स्थापित नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि जाति केवल एक सामाजिक बुराई नहीं, बल्कि यह मानवता के विकास में सबसे बड़ी बाधा है। समाज को बांटकर रखने वाली यह व्यवस्था कुछ स्वार्थी और पाखंडी तत्वों द्वारा आज भी जीवित रखी जा रही है।
उन्होंने कहा कि आज कुछ लोग धर्म और परंपरा के नाम पर समाज में ऊँच-नीच और भेदभाव को बढ़ावा दे रहे हैं। ऐसे तत्व समाज को जोड़ने की बजाय तोड़ने का काम कर रहे हैं, जो अत्यंत खतरनाक प्रवृत्ति है। यह न केवल सामाजिक शांति के लिए खतरा है, बल्कि देश के संविधान और लोकतांत्रिक व्यवस्था के भी खिलाफ है।
राजेश कुमार सिद्धार्थ ने कहा कि बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर ने संविधान के माध्यम से हर नागरिक को समानता, स्वतंत्रता और सम्मान का अधिकार दिया है। संविधान यह स्पष्ट करता है कि कोई भी व्यक्ति जन्म के आधार पर ऊँचा या नीचा नहीं हो सकता। इसके बावजूद आज भी समाज में जाति के नाम पर भेदभाव किया जा रहा है, जो संविधान की आत्मा के खिलाफ है।
उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में सरकार द्वारा ऐसे कानून बनाए गए हैं, जिनका उद्देश्य बच्चों और नागरिकों को जाति-सूचक अपमान, भेदभाव और उत्पीड़न से बचाना है। दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति यह है कि कुछ लोग ऐसे कानूनों का भी विरोध कर रहे हैं। यह विरोध सामाजिक न्याय और मानवता के खिलाफ है।
राजेश कुमार सिद्धार्थ ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जो लोग कानून और संविधान का पालन नहीं करना चाहते, जो लोग समाज में नफरत और भेदभाव फैलाना चाहते हैं, उन्हें संवैधानिक और लोकतांत्रिक तरीके से जवाब दिया जाएगा। बहुजन समाज अब चुप बैठने वाला नहीं है।
उन्होंने आगामी कार्यक्रम की घोषणा करते हुए कहा कि आगामी 10 तारीख को डॉ. आंबेडकर पार्क, बिसवां चौराहा, सिधौली में प्रातः 11 बजे एक विशाल सांकेतिक धरना-प्रदर्शन आयोजित किया जाएगा। इस धरने के माध्यम से जातिगत भेदभाव के खिलाफ एकजुट होकर आवाज उठाई जाएगी और समाज को यह संदेश दिया जाएगा कि मानवता से बड़ा कोई धर्म नहीं है।
राजेश कुमार सिद्धार्थ ने यह भी कहा कि आने वाले पंचायत चुनावों में बहुजन और मानवतावादी सोच रखने वाले लोग ऐसे व्यक्तियों और ताकतों का खुलकर विरोध करेंगे, जो समाज में ऊँच-नीच और भेदभाव को बढ़ावा देते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों को न तो समर्थन दिया जाएगा और न ही वोट।
किसान यूनियन के जिला अध्यक्ष मयंक सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि किसान, मजदूर और मेहनतकश वर्ग की सबसे बड़ी ताकत उसकी एकता है। जाति और भेदभाव ने हमेशा मेहनतकश समाज को कमजोर किया है। जब समाज जाति के नाम पर बंटता है, तो उसका सीधा लाभ शोषण करने वाली ताकतों को मिलता है। उन्होंने कहा कि संत रविदास का संदेश हमें यह सिखाता है कि बिना समानता और भाईचारे के कोई भी समाज आगे नहीं बढ़ सकता। किसान यूनियन सामाजिक न्याय, समानता और संविधान के मूल्यों के साथ खड़ी है और हर उस आंदोलन का समर्थन करेगी, जो भेदभाव और अन्याय के खिलाफ हो।
डॉ. आंबेडकर संवैधानिक महासंघ महिला प्रकोष्ठ की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनम गौतम ने कहा कि जातिगत भेदभाव का सबसे अधिक असर महिलाओं और बच्चों पर पड़ता है। समाज में महिलाएं पहले से ही कई प्रकार की असमानताओं का सामना कर रही हैं और जब जाति का भेदभाव जुड़ जाता है तो स्थिति और भी गंभीर हो जाती है। उन्होंने कहा कि संत रविदास और बाबा साहेब डॉ. अंबेडकर ने महिलाओं को सम्मान, शिक्षा और समान अधिकार का मार्ग दिखाया। आज आवश्यकता है कि महिलाएं आगे आकर इस सामाजिक बदलाव का नेतृत्व करें और अपने बच्चों को समानता और मानवता के संस्कार दें।
युवा प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय अध्यक्ष अभय प्रताप सिंह त्यागी ने कहा कि युवा किसी भी सामाजिक परिवर्तन की सबसे बड़ी शक्ति होता है। यदि युवा संत रविदास, बुद्ध और बाबा साहेब के विचारों को समझ ले और अपने जीवन में उतार ले, तो समाज से जाति और नफरत स्वतः समाप्त हो जाएगी। उन्होंने कहा कि आज का युवा जागरूक है और अन्याय के खिलाफ खड़े होने की क्षमता रखता है। युवा प्रकोष्ठ इस सामाजिक आंदोलन को गांव-गांव और घर-घर तक पहुंचाने का कार्य करेगा।
सामाजिक कार्यकर्ता संदीप राठौर ने कहा कि महापुरुषों की जयंती केवल मंचीय कार्यक्रम तक सीमित नहीं होनी चाहिए। असली श्रद्धांजलि तब होगी, जब हम उनके विचारों को अपने व्यवहार और जीवन में अपनाएं। उन्होंने कहा कि भेदभाव के खिलाफ सामूहिक संघर्ष के बिना समाज में वास्तविक बदलाव संभव नहीं है।
युवा प्रकोष्ठ के जिला अध्यक्ष अनुज कुमार गौतम ने कहा कि सिधौली की धरती से उठी यह आवाज पूरे जनपद में सामाजिक समरसता का संदेश देगी। युवा वर्ग पूरी मजबूती के साथ जाति-भेद और अन्याय के खिलाफ खड़ा है और आने वाले समय में इसका व्यापक प्रभाव देखने को मिलेगा।
कार्यक्रम का संचालन कर रहे विधानसभा प्रभारी सिधौली एवं बसपा नेता मनीराम गौतम ने कहा कि संत शिरोमणि गुरु रविदास की जयंती केवल उत्सव नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का संकल्प है। यह आयोजन समाज को जोड़ने और संविधान के मूल्यों को मजबूत करने का प्रयास है, जिसे हर नागरिक को समर्थन देना चाहिए।
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित जनसमूह ने “जात-पात की करो विदाई, मानव-मानव भाई-भाई” के नारे के साथ सामाजिक समरसता, समानता और संविधान के पालन का संकल्प लिया। पूरे वातावरण में सामाजिक न्याय और मानवता के पक्ष में दृढ़ संकल्प की भावना दिखाई दी।

