बाँदा, 16 मार्च 2026।
सड़कें केवल आवागमन का माध्यम नहीं, बल्कि जनजीवन की धड़कन होती हैं। जब यही सड़कें लापरवाही, अतिक्रमण और अव्यवस्था के कारण दुर्घटनाओं का कारण बनने लगें, तो प्रशासन का दायित्व और भी बढ़ जाता है। इसी चिंता को केंद्र में रखते हुए जिलाधिकारी जे. रीभा की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार में जिला सड़क सुरक्षा समिति की बैठक आयोजित की गई, जिसमें सड़क दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए ठोस और बहुआयामी निर्णय लिए गए।बैठक में जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि दुर्घटना बाहुल्य स्थलों को केवल चिन्हित कर देना पर्याप्त नहीं, बल्कि वहां ठोस सुरक्षा उपाय करना भी उतना ही आवश्यक है। शासन द्वारा उपलब्ध कराई गई तीन लाख रुपये की धनराशि से चिन्हित खतरनाक स्थानों—महोखर, तिंदवारी, मुंगुस, ग्राम माटा और बेंदाघाट—पर चेतावनी संकेतक (साइनबोर्ड) तथा रम्बल स्ट्रिप लगाए जाने के निर्देश दिए गए, ताकि वाहन चालकों को समय रहते सावधानी का संकेत मिल सके। साथ ही प्रमुख चौराहों पर सीसीटीवी कैमरे लगाने की व्यवस्था भी सुनिश्चित करने को कहा गया।स्कूल वाहनों की सुरक्षा पर विशेष चिंता व्यक्त करते हुए जिलाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिया कि 15 वर्ष से अधिक पुराने वाहनों का उपयोग स्कूल परिवहन में न किया जाए और सभी स्कूली वाहनों की फिटनेस अनिवार्य रूप से कराई जाए। इसके साथ ही निजी स्कूली वाहनों और ई-रिक्शा में क्षमता से अधिक बच्चों को ढोने की प्रवृत्ति पर सख्ती से रोक लगाने को कहा गया।हिट एंड रन के मामलों को संवेदनशीलता से लेते हुए जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई हो और मृतक अथवा घायल के परिजनों को ओरिएंटल इंडिया कॉरपोरेशन के माध्यम से निर्धारित सहायता राशि शीघ्र उपलब्ध कराई जाए।सड़क किनारे खड़े भारी वाहनों को दुर्घटनाओं का बड़ा कारण बताते हुए उन्होंने निर्देश दिया कि ट्रक और बड़े वाहन सड़कों पर खड़े न किए जाएं, बल्कि उन्हें निर्धारित होल्डिंग एरिया या ढाबों में ही पार्क किया जाए। साथ ही राहवीर योजना के व्यापक प्रचार-प्रसार पर भी जोर दिया गया, जिससे दुर्घटना के समय मदद करने वाले लोगों को प्रोत्साहन मिल सके।
परिवहन विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले माह पुलिस विभाग ने बिना हेलमेट के 3730 तथा बिना सीटबेल्ट के 382 चालान किए जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए यह अभियान और सघन होना चाहिए। ओवरलोड वाहनों के विरुद्ध की गई कार्रवाई में 134 वाहनों पर प्रवर्तन करते हुए 71.21 लाख रुपये का प्रसमन शुल्क वसूला गया, जिसे प्रशासन ने सख्ती की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।जनजागरूकता को भी सड़क सुरक्षा का महत्वपूर्ण आधार मानते हुए विद्यालयों में यातायात जागरूकता कार्यक्रम संचालित करने तथा जनता इंटर कॉलेज अतरहट में विशेष सड़क सुरक्षा कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश दिए गए।बैठक में शहर की कुछ जमीनी समस्याओं पर भी चर्चा हुई। महाराणा प्रताप चौराहे और श्रीनाथ बिहार के पास झुके हुए विद्युत तारों को दो माह के भीतर ऊंचा कराने, संकट मोचन रोड से विद्युत पोल हटाने, कालूकुआं चौराहे से अतिक्रमण हटाने तथा एआरटीओ कार्यालय के आसपास दुर्घटनाओं में कमी लाने के लिए ठोस कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए। इसके साथ ही तिंदवारी कस्बे में यातायात व्यवस्था सुधारने के लिए बाईपास रोड पर सब्जी मंडी स्थानांतरित करने का भी प्रस्ताव रखा गया।बैठक में अपर पुलिस अधीक्षक शिवराज, सहायक पुलिस अधीक्षक मेविस टॉक, संभागीय परिवहन अधिकारी, लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।यह बैठक केवल निर्देशों की औपचारिकता नहीं, बल्कि उस चेतावनी का संकेत भी है कि सड़क सुरक्षा अब प्रशासनिक प्राथमिकता बन चुकी है—क्योंकि एक दुर्घटना केवल एक व्यक्ति की नहीं, पूरे परिवार की दुनिया बदल देती है।
