जवारा लोकनृत्य कार्यशाला में पहुंचे संस्कृति संस्थान के निदेशक, प्रतिभागियों का बढ़ाया उत्साह
बांदा। बुंदेलखंड की समृद्ध लोक संस्कृति को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के उद्देश्य से नृत्य कला गृह एवं बुंदेलखंड कला, साहित्य एवं संस्कृति विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित जवारा लोकनृत्य कार्यशाला में रविवार को उत्तर प्रदेश लोक एवं जनजाति संस्कृति संस्थान, लखनऊ के निदेशक अतुल द्विवेदी ने प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन किया।शहर की स्वराज कॉलोनी स्थित नृत्य कला गृह में संचालित इस कार्यशाला में बच्चों और युवाओं को बुंदेलखंड की पारंपरिक लोक संस्कृति एवं जवारा लोकनृत्य की बारीकियों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। नृत्य गुरु श्रद्धा निगम के निर्देशन में आयोजित कार्यशाला एक जून से 10 जून तक चलेगी।
कार्यशाला का निरीक्षण करने पहुंचे निदेशक अतुल द्विवेदी ने प्रतिभागियों से संवाद करते हुए कहा कि लोक कला और संस्कृति किसी भी समाज की अमूल्य धरोहर होती है। इसके संरक्षण और संवर्धन में युवाओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि आधुनिकता के दौर में लोक परंपराओं को जीवित रखने के लिए इस प्रकार की कार्यशालाएं अत्यंत आवश्यक हैं।उन्होंने नृत्य कला गृह द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि संस्था पूर्ण समर्पण के साथ लोक कलाओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का कार्य कर रही है। समाज के अन्य लोगों को भी इस दिशा में आगे आकर योगदान देना चाहिए। उन्होंने लोक कला और संस्कृति के संरक्षण के लिए हर संभव सहयोग का आश्वासन दिया।नृत्य कला गृह की संस्थापिका एवं नृत्य गुरु श्रद्धा निगम ने बताया कि कार्यशाला में 30 प्रतिभागी प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। उन्हें जवारा लोकनृत्य के इतिहास, महत्व और प्रस्तुति की तकनीकों से अवगत कराया जा रहा है। उन्होंने बताया कि 10 जून को कार्यशाला का समापन होगा।कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों ने लोकनृत्य की प्रस्तुतियों का अभ्यास कर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन भी किया।
