सहजनवां तहसील समाधान दिवस: 79 फरियादें दर्ज, मौके पर 6 मामलों का निस्तारण — शेष पर शीघ्र कार्रवाई के निर्देश
गोरखपुर जिले की सहजनवां तहसील में आयोजित समाधान दिवस में इस बार समस्याओं का अंबार दिखाई दिया। तहसील सभागार में आयोजित इस मासिक जनसमस्या निवारण कार्यक्रम की अध्यक्षता अपर जिला अधिकारी (वित्त एवं राजस्व) विनीत सिंह ने की। कार्यक्रम सुबह निर्धारित समय पर आरंभ हुआ और दोपहर तक फरियादियों की लंबी कतारें समस्याओं और आवेदन-पत्रों के साथ सभागार के बाहर लगी रहीं।
यह समाधान दिवस न केवल प्रशासन की जवाबदेही की परीक्षा था, बल्कि ग्रामीण अंचल से आए आमजन के लिए आशा का भी मंच साबित हुआ। तहसील के पाली, सहजनवां, गोबरहिया, महदेवा, पदुमनगर, सरहरी, मिश्रौलिया सहित विभिन्न दूर-दराज़ के गांवों से बड़ी संख्या में लोग पहुँचे।
समस्याओं का भार: 79 मामले दर्ज
प्रशासनिक रिकॉर्ड के अनुसार, इस समाधान दिवस में कुल 79 प्रकरण दर्ज किए गए। इनमें विभागवार विवरण इस प्रकार रहा—
राजस्व विभाग: 64 मामले
पुलिस विभाग: 8 मामले
विकास सम्बंधी: 5 मामले
सप्लाई विभाग: 1 मामला
अन्य विभाग: 1 मामला
इन मामलों में जमीन विवाद, सीमांकन, नामांतरण, बंटवारा, भूमि पैमाइश के साथ-साथ शिकायतों में पुलिस से संबंधित धमकी, विवाद, मारपीट तथा शांति भंग की आशंकाओं पर आधारित प्रार्थना-पत्र शामिल थे।
मौके पर हुआ 6 मामलों का निस्तारण
प्रशासनिक टीम द्वारा गंभीरता से सुनवाई के बाद 6 मामलों का तत्काल निस्तारण किया गया। यह निस्तारण उस श्रेणी में आता है जहाँ मौके पर समाधान संभव था — जैसे सीमांकन की तारीख तय करना, राजस्व अभिलेखों की त्रुटि सुधारना, सरकारी सेवाओं में अनावश्यक विलंब रोकना या संबंधित अधिकारियों को तत्काल निर्देश जारी करना।
अपर जिला अधिकारी विनीत सिंह ने हर फरियादी से व्यक्तिगत रूप से चर्चा की और शिकायतों की प्रकृति को ध्यानपूर्वक समझते हुए संबंधित विभागीय अधिकारियों को आवश्यक मार्गदर्शन दिया।
उन्होंने कहा—
“समाधान दिवस केवल सुनवाई का कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह शासन की संवेदनशीलता और त्वरित कार्रवाई का प्रत्यक्ष मंच है। सभी विभाग यह सुनिश्चित करें कि शेष मामलों का निस्तारण नियत समय सीमा में किया जाए।”
शेष मामलों पर कड़े निर्देश
समाधान दिवस में प्राप्त सभी शेष मामलों को संबंधित विभागों को सौंप दिया गया। एडीएम ने स्पष्ट निर्देश दिए कि—
प्रत्येक शिकायत की समयबद्ध जांच हो।
अन्याय अथवा देरी की कोई शिकायत पुनः न आए।
मौके पर जांच आवश्यक होने पर तत्काल टीम भेजी जाए।
साप्ताहिक प्रगति रिपोर्ट तहसील प्रशासन को उपलब्ध कराई जाए।
उन्होंने चेतावनी भी दी कि अगर किसी अधिकारी द्वारा लापरवाही बरती गई तो उसके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई से प्रशासन पीछे नहीं हटेगा।
अधिकारियों की उपस्थिति और सक्रियता
समाधान दिवस में तहसील स्तर पर लगभग सभी प्रमुख अधिकारी मौजूद रहे। इनमें विशेष रूप से—
तहसीलदार: राकेश कनौजिया
नायब तहसीलदार: दुर्गेश चौरसिया
नायब तहसीलदार: राम सूरज
वीडीओ पाली: बृजेश यादव
वीडीओ सहजनवा: सत्यकाम तोमर
विभिन्न विभागों के कर्मचारी एवं राजस्व कर्मी
सभी अधिकारियों ने अपनी-अपनी तालिकाओं पर बैठकर फरियादियों की समस्याओं को सुनने और उनकी फाइलों की छानबीन करने में सक्रिय भूमिका निभाई।
राजस्व मामलों में बढ़ती जटिलता
समाधान दिवस में आए 64 राजस्व मामले यह स्पष्ट संकेत देते हैं कि अब भी ग्रामीण क्षेत्रों में भूमि विवाद और अभिलेख संबंधी समस्याएँ सबसे प्रमुख हैं।
इनमें अधिकतर मामले निम्न प्रकार के रहे—
सीमांकन विवाद
रास्ता अवरुद्ध करने से संबंधित शिकायतें
दबंगई के आधार पर भूमि कब्जे की शिकायत
खतौनी में गलत प्रविष्टियाँ
नामांतरण लंबित होने की समस्या
बटाईदार और भूमिहीनों की शिकायतें
राजस्व टीम ने हर मामले का संज्ञान लिया और शीघ्र निस्तारण के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए।
पुलिस विभाग से जुड़े 8 मामले
पुलिस विभाग में आए 8 मामलों में प्रमुख शामिल थे—
परिवारिक विवाद
धमकी या लड़ाई-झगड़े की शिकायत
शांति व्यवस्था बनाए रखने हेतु प्रार्थनापत्र
लापरवाही से संबंधित आरोप
सीओ और थाना स्तर के अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि किसी भी प्रकरण में ढिलाई न बरती जाए और रिपोर्ट समय पर प्रस्तुत की जाए।
विकास और सप्लाई विभाग के मामले
5 मामले विकास विभाग से संबंधित थे, जिनमें—
आवास योजना में अनियमितता
शौचालय निर्माण
पंचायत भवन की समस्या
सड़क और नाली निर्माण
मनरेगा से जुड़ी शिकायतें
सप्लाई विभाग में आया एक मामला राशन कार्ड और खाद्यान्न वितरण से जुड़ा था, जिसका निस्तारण कुछ ही समय में करने का निर्देश दिया गया।
जनता से संवाद और प्रशासन की प्रतिबद्धता
अपर जिलाधिकारी और तहसील प्रशासन ने सभी फरियादियों को आश्वासन दिया कि समस्या समाधान प्रशासन के सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।
कई बुजुर्गों, महिलाओं और दिव्यांगजनों को उनके आवेदन लिखवाने और समझाने में कर्मचारियों ने विशेष सहयोग किया।
ऐसे मामलों में तत्काल प्रभाव से प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई।
स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया
ग्रामीणों और फरियादियों ने समाधान दिवस को एक प्रभावी मंच बताया। कई लोगों ने कहा कि—
उन्हें पहली बार अधिकारियों से सीधे बात करने का अवसर मिला
कुछ मामलों में तुरंत तारीख और जांच आदेश जारी हुए
प्रशासनिक टीम का व्यवहार सकारात्मक रहा
फरियादी रामप्रकाश ने बताया—
“हमारी सीमांकन की समस्या कई महीनों से लंबित थी। आज अधिकारी ने तुरंत आदेश जारी कर दिया। अब उम्मीद है कि जल्द समाधान मिलेगा।”
प्रशासन के लिए भविष्य की बड़ी चुनौती
इस बार आए 79 मामलों का आंकड़ा यह दर्शाता है कि तहसील प्रशासन को अब ग्रामीण समस्याओं पर और तेज गति से कार्य करने की आवश्यकता है।
वास्तविक चुनौती यह है कि—
शेष मामलों की फील्ड रिपोर्ट जल्द आए
विभाग संचार और समन्वय बनाए रखें
योजनाओं का लाभ पात्र व्यक्तियों तक पहुँचे
शिकायतों की पुनरावृत्ति न हो
अपर जिला अधिकारी ने संकेत दिए कि भविष्य में समाधान दिवस की समीक्षा खुद जिला स्तरीय टीम भी करेगी।
निष्कर्ष
सहजनवां तहसील समाधान दिवस एक बार फिर यह साबित करता है कि प्रशासन और जनता के बीच संवाद ही समस्याओं के समाधान का सबसे प्रभावी माध्यम है।
79 मामलों का आना यह दर्शाता है कि अभी बहुत काम किया जाना शेष है, लेकिन 6 मामलों का मौके पर निस्तारण और शेष मामलों पर त्वरित निर्देश यह बताते हैं कि प्रशासन जवाबदेही निभाने के प्रति गंभीर है।
आने वाले सप्ताहों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि शेष मामलों का समाधान किस गति से होता है और क्या प्रशासन अपनी प्रतिबद्धता पर खरा उतर पाता है।

