धूमधाम से संपूर्ण प्रदेश में मनाया गया संविधान दिवस
डॉ. आंबेडकर संवैधानिक महासंघ एवं किसान कांग्रेस ने व्यापक जागरूकता अभियान चलाया
अध्यक्ष राजेश कुमार सिद्धार्थ का प्रदेशव्यापी संदेश: “संविधान हमारी अस्मिता, सुरक्षा और समानता की रीढ़ है”
1. प्रस्तावना
भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में 26 नवम्बर का दिन अत्यंत गौरवपूर्ण है। यही वह दिन है जब देश ने अपने सर्वोच्च ग्रंथ भारतीय संविधान को अंगीकार किया—जो न केवल शासन व्यवस्था का आधार है, बल्कि हर नागरिक की रक्षा, अधिकार और समान अवसरों की गारंटी भी देता है।
इसी संदर्भ में डॉ. आंबेडकर संवैधानिक महासंघ तथा किसान कांग्रेस प्रदेश इकाई द्वारा संपूर्ण उत्तर प्रदेश में संविधान दिवस अत्यंत उत्साह, गरिमा और व्यापक जनभागीदारी के साथ मनाया गया।
राज्यभर में आयोजित कार्यक्रमों के प्रमुख मार्गदर्शक एवं मुख्य प्रेरणा स्रोत रहे
श्री राजेश कुमार सिद्धार्थ
(अध्यक्ष – डॉ. आंबेडकर संवैधानिक महासंघ,
प्रदेश उपाध्यक्ष – किसान कांग्रेस)
जिन्होंने संविधान दिवस के अवसर पर प्रदेश की जनता के नाम एक विस्तृत, दृढ़ और प्रेरणादायक संदेश दिया।
2. प्रदेश स्तरीय आयोजन—एक व्यापक अभियान
संविधान दिवस केवल एक वार्षिक कार्यक्रम नहीं बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति जन-जागरण का राष्ट्रीय पर्व है। इस उद्देश्य से महासंघ व किसान कांग्रेस द्वारा प्रदेश के सभी मंडलों—लखनऊ, कानपुर, वाराणसी, मेरठ, आगरा, प्रयागराज, गोरखपुर, बरेली, मुरादाबाद आदि क्षेत्रों में 300 से अधिक सभाएँ, गोष्ठियाँ, संविधान-पाठ, पोथी-यात्राएँ, और जागरूकता रैली आयोजित की गईं।
प्रत्येक स्थल पर लोगों को संविधान की उद्देशिका, मौलिक अधिकार, मौलिक कर्तव्य, सामाजिक न्याय, लैंगिक समानता और लोकतांत्रिक शुचिता के विषय में विस्तृत जानकारी प्रदान की गई।
3. अध्यक्ष राजेश कुमार सिद्धार्थ का प्रदेशव्यापी मुख्य संबोधन
श्री राजेश कुमार सिद्धार्थ ने संविधान दिवस पर जनता, कार्यकर्ताओं, युवाओं, किसान संगठनों, सामाजिक वर्गों और प्रबुद्ध समाज से संवाद करते हुए कहा—
“संविधान केवल कानूनों का संग्रह नहीं, यह भारत की आत्मा है—जो हर नागरिक को बराबरी का दर्जा देने वाली दुनिया की सर्वश्रेष्ठ व्यवस्था है।”
उन्होंने कहा कि संविधान बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर की अद्वितीय देन है, जिसका उद्देश्य जाति, धर्म, वर्ग, भाषा, क्षेत्र या किसी भी प्रकार के भेदभाव से ऊपर उठकर देश को एक समान अवसर वाला राष्ट्र बनाना है।
श्री सिद्धार्थ ने अपने संदेश में प्रमुख रूप से निम्न बिंदुओं को रखा:
4. मौलिक अधिकारों पर बढ़ते खतरे
उन्होंने कहा कि आज देश में भय, असमानता, अन्याय और मनमानी नीतियों का दौर बढ़ रहा है।
मौलिक अधिकार—
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता,
समानता का अधिकार,
शिक्षा और रोजगार का अधिकार,
सामाजिक न्याय की गारंटी
—कई रूपों में कमजोर किए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि
“जो अधिकार संविधान ने जनता को दिए हैं, उन पर धीरे-धीरे अतिक्रमण हो रहा है। लोकतंत्र केवल चुनाव नहीं, बल्कि सतत सहभागिता और जनसरोकारों का संरक्षण है।”
5. कमजोर वर्गों का संकट—“सबसे अधिक पीड़ा समाज के अंतिम व्यक्ति को”
अपने संबोधन में उन्होंने कहा—
“संविधान ने समाज के सबसे कमजोर व्यक्ति को केंद्र में रखा था। आज वही किसान, मजदूर, दलित, पिछड़े, आदिवासी, अल्पसंख्यक और छात्र सबसे अधिक संकट में हैं।”
उन्होंने विस्तार से बताया कि
किसानों की आय दोगुनी करने का वादा केवल भाषणों तक सीमित है,
महंगाई और लागत मूल्य बढ़ता जा रहा है,
मजदूरों को सुरक्षा की गारंटी कम होती जा रही है,
छात्र बेरोजगारी और आर्थिक कठिनाइयों से जूझ रहे हैं,
सामाजिक न्याय के कार्यक्रम कमजोर किए जा रहे हैं।
6. किसान समस्याओं पर विस्तृत टिप्पणी
किसान कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष के रूप में उन्होंने कहा—
किसान अपनी फसल का दाम न मिलने से निराश है।
MSP को कानूनी दर्जा देने की बात पिछली सरकारों में भी उठी, पर आज फिर ठंडे बस्ते में है।
बिजली, डीजल, खाद, बीज के दाम बढ़ रहे हैं, जिससे खेती घाटे का सौदा बनती जा रही है।
सरकारी खरीद कम होने से बिचौलियों की मनमानी बढ़ी है।
उन्होंने कहा कि
“जब तक किसान खुशहाल नहीं होगा, तब तक देश समृद्ध नहीं हो सकता।”
7. लोकतंत्र की मजबूती का आह्वान
अपने संबोधन में श्री सिद्धार्थ ने दृढ़ता से कहा—
“लोकतंत्र किसी भी एक दल, वर्ग या विचारधारा की जागीर नहीं। यह जनता की आवाज से चलता है, जनता की इच्छा से संचालित होता है।”
उन्होंने कहा कि संविधान दिवस हमें याद दिलाता है कि हमें—
न्याय की रक्षा करनी है,
समानता को बनाए रखना है,
कमजोरों की आवाज बनना है,
तानाशाही प्रवृत्तियों का विरोध करना है,
और लोकतंत्र को जीवित रखना है।
8. संविधान-पाठ अभियान—महासंघ की अनूठी पहल
डॉ. आंबेडकर संवैधानिक महासंघ ने प्रदेशभर में “उद्देशिका पाठ संकल्प यात्रा” निकाली जिसमें हजारों लोगों ने संविधान की प्रस्तावना पढ़कर लोकतंत्र की रक्षा का संकल्प लिया।
कार्यक्रमों में युवाओं, छात्र संगठनों, महिलाओं, शिक्षकों, किसान प्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
9. सामाजिक सद्भाव और समावेशिता पर जोर
उन्होंने कहा कि भारत की ताकत उसकी विविधता में है।
“हमारा संविधान सबको साथ लेकर चलता है—किसी को पीछे नहीं छोड़ता।”
आज आवश्यकता है कि समाज में नफरत, विभाजन और गलत सूचनाओं के स्थान पर शिक्षा, संवाद, संवेदनशीलता और एकजुटता को बढ़ावा दिया जाए।
10. राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका
श्री सिद्धार्थ ने कहा—
“युवा ऊर्जा वह शक्ति है जो संविधान को जीवित रखती है।”
उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे—
संविधान को पढ़ें,
उसके मूल्यों को समझें,
गलत सूचना और अफवाहों से बचें,
सामाजिक न्याय, शिक्षा और रोजगार के मुद्दों पर जागरूक रहें।
उन्होंने कहा कि
“युवाओं के पास ही वह दृष्टि है जो भारत को समावेशी और न्यायपूर्ण राष्ट्र बना सकती है।”
11. संगठनात्मक विस्तार और कार्यकर्ता सम्मेलन
संविधान दिवस के अवसर पर कई जिलों में कार्यकर्ता सम्मेलन आयोजित हुए, जिनमें संगठन विस्तार, जागरूकता अभियान और सामाजिक कार्यक्रमों पर विस्तृत चर्चा की गयी।
नए पदाधिकारियों को नियुक्त किया गया तथा उन्हें संविधान अध्ययन पुस्तिकाएँ प्रदान की गयीं।
12. राजेश कुमार सिद्धार्थ का अंतिम संदेश
अपने समापन संदेश में उन्होंने दृढ़तापूर्वक कहा—
“संविधान हमारे अधिकारों का प्रहरी है। जब अधिकारों पर संकट आता है, तो नागरिकों का जागरूक और संगठित होना आवश्यक हो जाता है।”
उन्होंने जनता से अपील की—
संविधान की प्रस्तावना घर-घर पढ़ी जाए,
बच्चों को संविधान की शिक्षा दी जाए,
कमजोर वर्गों के लिए आवाज़ उठाई जाए,
और लोकतंत्र की रक्षा को सर्वोपरि रखा जाए।
13. निष्कर्ष
संविधान दिवस के आयोजन ने पूरे प्रदेश में सकारात्मक माहौल बनाया।
हजारों लोगों ने भाग लेकर यह साबित किया कि जनता आज भी संविधान के मूल्यों—
न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व
—के प्रति समर्पित है।
डॉ. आंबेडकर संवैधानिक महासंघ और किसान कांग्रेस द्वारा आयोजित यह जागरूकता अभियान आने वाले समय में भी निरंतर जारी रहेगा।

