परिनिर्वाण दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में राजेश कुमार सिद्धार्थ ने जाति उन्मूलन और संवैधानिक मूल्यों पर दिया जोर
लखनऊ। बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के परिनिर्वाण दिवस के अवसर पर लखनऊ में एक श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया, जिसमें डॉक्टर अंबेडकर संवैधानिक महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष और किसान कांग्रेस के प्रदेश महासचिव राजेश कुमार सिद्धार्थ ने विस्तृत संबोधन देते हुए बाबा साहेब के विचारों और वर्तमान सामाजिक परिस्थितियों पर गंभीर चिंतन व्यक्त किया।
कार्यक्रम में मौजूद बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि 6 दिसंबर भारतीय समाज के लिए केवल स्मरण का दिन नहीं, बल्कि आत्मावलोकन और संकल्प का दिन भी है। उन्होंने कहा कि बाबा साहेब का जीवन इतिहास की सबसे बड़ी सामाजिक क्रांति का प्रतीक है और आज देश को उनके विचारों की पहले से अधिक आवश्यकता है।
आज भी जाति आधारित भेदभाव एक बड़ी चुनौती: राजेश कुमार सिद्धार्थ
राजेश कुमार सिद्धार्थ ने अपने संबोधन में कहा कि देश आज भी जाति आधारित विभाजन की कड़वी सच्चाई से जूझ रहा है। उन्होंने कहा कि कई स्थानों पर आज भी व्यक्ति की योग्यता, सम्मान, नौकरी, पदोन्नति और सामाजिक पहचान जाति के आधार पर ही तय होती है, जो कि भारतीय संविधान की मूल भावना के विपरीत है।
उनके अनुसार, बाबा साहेब चाहते थे कि भारत एक ऐसा समाज बने जहाँ किसी भी नागरिक के साथ जन्म के आधार पर भेदभाव न किया जाए और सभी को समान अवसर प्राप्त हों।
संविधान केवल कानून नहीं, सामाजिक क्रांति का दस्तावेज
सभा में बोलते हुए राजेश कुमार सिद्धार्थ ने कहा कि बाबा साहेब द्वारा निर्मित भारतीय संविधान केवल शासन व्यवस्था का ढांचा नहीं है, बल्कि सामाजिक न्याय और समानता का महान ग्रंथ है।
उन्होंने कहा कि संविधान का मूल संदेश यह है कि राजा और सामान्य नागरिक दोनों बराबर हैं। इसी सिद्धांत पर आधुनिक भारत का निर्माण हुआ है, और इसी सिद्धांत की रक्षा हर नागरिक का कर्तव्य है।
जाति तोड़ो, समाज जोड़ो—इसी संदेश को आगे बढ़ाने का आह्वान
सिद्धार्थ ने कहा कि बाबा साहेब का स्पष्ट संदेश था—“जाति तोड़ो, समाज जोड़ो।” उन्होंने कहा कि जब तक समाज जाति आधारित सोच से मुक्त नहीं होगा, तब तक समानता और सामाजिक समरसता का लक्ष्य अधूरा रहेगा।
उन्होंने इस अवसर पर उपस्थित लोगों से अपील की कि वे अपने परिवार, समाज और कार्यस्थलों में जाति आधारित भेदभाव को समाप्त करने के लिए प्रयास करें तथा शिक्षा और संवैधानिक मूल्यों को बढ़ावा दें।
युवा पीढ़ी को अंबेडकरवादी विचारधारा से जोड़ने की आवश्यकता
अपने वक्तव्य में राजेश कुमार सिद्धार्थ ने कहा कि देश की युवा पीढ़ी को बाबा साहेब के विचारों से जोड़ना समय की मांग है। उन्होंने कहा कि शिक्षित, जागरूक और संवैधानिक अधिकारों को समझने वाली युवा शक्ति ही सामाजिक परिवर्तन को गति दे सकती है।
कार्यक्रम का समापन संकल्प के साथ
अंत में राजेश कुमार सिद्धार्थ ने कहा कि परिनिर्वाण दिवस पर बाबा साहेब को सच्ची श्रद्धांजलि तभी होगी जब समाज संविधान में वर्णित समानता, न्याय और स्वतंत्रता के सिद्धांतों को जीवन में उतारे।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनका संगठन सामाजिक समरसता, शिक्षा, संवैधानिक अधिकारों और समानता की लड़ाई को निरंतर आगे बढ़ाता रहेगा।

