1. गुरु ग्रंथ साहिब जी — सिख धर्म का पवित्र ग्रंथ
गुरु ग्रंथ साहिब जी सिख धर्म का मुख्य और अंतिम गुरु माना जाता है।
इसे “आदि ग्रंथ” भी कहा जाता है। यह केवल एक धार्मिक पुस्तक नहीं, बल्कि सिखों के लिए “जीवित गुरु” का रूप है।
रचना और इतिहास
सबसे पहले गुरु अर्जुन देव जी ने सन् 1604 में आदि ग्रंथ का संकलन किया।
बाद में गुरु गोबिंद सिंह जी ने इसमें गुरु तेग बहादुर जी के भजनों को जोड़कर इसे गुरु ग्रंथ साहिब के रूप में पूर्ण किया।
1708 में गुरु गोबिंद सिंह जी ने घोषणा की:
“अब से सिखों का गुरु कोई व्यक्ति नहीं, बल्कि गुरु ग्रंथ साहिब जी होगा।”
संरचना
इसमें 1430 अंग (पृष्ठ) हैं।
इसमें सिख गुरुओं की वाणी के साथ-साथ अन्य धर्मों और संप्रदायों के संतों की रचनाएँ भी शामिल हैं, जैसे —
संत कबीर, नामदेव, रविदास, फरीद आदि।
इसकी भाषा मुख्यतः गुरुमुखी लिपि में है, जिसमें पंजाबी, ब्रज, फारसी, और संस्कृत का मिश्रण है।
प्रमुख शिक्षाएँ
गुरु ग्रंथ साहिब जी का संदेश है —
ईश्वर एक है (इक ओंकार)
सत्य, नाम और सेवा ही जीवन का मार्ग हैं
मानव समानता और निस्वार्थ सेवा को सर्वोच्च माना गया है
आडंबर, पाखंड और जातिवाद का विरोध किया गया है
2. गुरुद्वारा — सिख उपासना स्थल
गुरुद्वारा शब्द का अर्थ है “गुरु का द्वार” — यानी वह स्थान जहाँ सिख समुदाय ईश्वर की आराधना और सेवा के लिए एकत्र होता है।
प्रमुख तत्व
गुरु ग्रंथ साहिब जी की उपस्थिति:
गुरुद्वारे के मुख्य हॉल में गुरु ग्रंथ साहिब जी को ऊँचे मंच (तख्त) पर स्थापित किया जाता है।
श्रद्धालु प्रवेश करते समय सिर झुकाकर प्रणाम करते हैं और सिर ढकते हैं।
कीर्तन:
गुरु ग्रंथ साहिब की वाणी (शबद) का गायन किया जाता है। इसे “कीर्तन” कहा जाता है।
अरदास:
यह सामूहिक प्रार्थना होती है, जिसमें सब लोग खड़े होकर हाथ जोड़ते हैं।
लंगर:
यह गुरुद्वारे की सबसे विशिष्ट परंपरा है।
यहाँ सभी लोगों को नि:शुल्क भोजन दिया जाता है — चाहे उनका धर्म, जाति या सामाजिक स्थिति कुछ भी हो।
लंगर सेवा समानता और सेवा भावना का प्रतीक है।
सेवा (स्वयंसेवा):
गुरुद्वारे में झाड़ू लगाना, जूते सँभालना, पानी या लंगर परोसना — ये सब सेवा के रूप माने जाते हैं।
संगत और पंगत:
संगत — ईश्वर की आराधना के लिए एकत्र लोगों का समूह।
पंगत — वह परंपरा जिसमें सभी लोग एक पंक्ति में बैठकर समान रूप से लंगर ग्रहण करते हैं।
3. प्रमुख गुरुद्वारे
कुछ प्रसिद्ध गुरुद्वारे हैं:
श्री हरमंदिर साहिब (स्वर्ण मंदिर), अमृतसर — सिख धर्म का सबसे पवित्र स्थल।
श्री हजूर साहिब, नांदेड़ (महाराष्ट्र) — जहाँ गुरु गोबिंद सिंह जी ने देह त्यागी।
श्री केसगढ़ साहिब, आनंदपुर — जहाँ खालसा पंथ की स्थापना हुई।
श्री बंगला साहिब, दिल्ली — गुरु हरकृष्ण जी की स्मृति में बना।
