कर रहे हैं, वहीं बच्चे गुड्डा-गुड़िया का सांकेतिक विवाह (पुतरी-पुतरा) रचा रहे हैं। यह पर्व, जिसे महामुहूर्त माना जाता है, ग्रामीण क्षेत्रों में सुख-समृद्धि का प्रतीक है।
तिथि: 2026 में अक्ति पर्व 20 अप्रैल को मनाया गया
1.कृषि की शुरुआत: किसान मिट्टी, बीज और खेती के औजारों की पूजा करते हैं, जो बीज बोने की परंपरा की शुरुआत का संकेत है।
2.पुतरी-पुतरा विवाह: परंपरा के अनुसार, बच्चे और ग्रामीण गुड्डा-गुड़िया का विवाह रचाते हैं।
बाजार में रौनक: छत्तीसगढ़ के
3.बाजारों में गुड्डा-गुड़िया और पारंपरिक सजावटी सामान की जोरदार बिक्री की जाती है
4.सामाजिक महत्व: यह पर्व समरसता, प्रकृति प्रेम और मांगलिक कार्यों के लिए बहुत शुभ माना जाता है।
5.शुभ मुहूर्त: इस दिन विवाह और नए कार्यों की शुरुआत के लिए विशेष मुहूर्त माना जाता है।
6.अपने बड़े बुजुर्ग की मृत आत्मा की शांति प्रदान करने के लिए आज का शुभ मुहूर्त के दिन परंपरागत नियमों के अनुसार घर पर खीर पुडी मालपुआ पूडी बड़ा इत्यादिक मिष्ठान बनाकर भोग लगाकर समर्पित कर प्रसाद के रूप में घर के एवं परिवार एवं रिश्तेदारों को बुलाकर भोजन कराया जाता है
