किसानों के लिए खाद, बीज, कीटनाशक एवं अन्य कृषि-उपयोगी वस्तुओं के निर्माण, इकाई स्थापना एवं आपूर्ति के संबंध में
1. उद्देश्य
राष्ट्रीय किसान यूनियन (सिद्धार्थ) का उद्देश्य किसानों को उच्च गुणवत्ता वाली, प्रमाणित एवं सस्ती दरों पर खाद, बीज, कीटनाशक, जैविक उत्पाद तथा अन्य कृषि-उपयोगी वस्तुएँ उपलब्ध कराकर उनकी उत्पादन लागत कम करना, फसल की गुणवत्ता बढ़ाना एवं किसानों को आत्मनिर्भर बनाना होगा।
2. निर्माण एवं उत्पादन इकाइयों की स्थापना
संगठन को यह अधिकार होगा कि वह किसानों के हित में रासायनिक खाद, जैविक खाद, उन्नत बीज, कीटनाशक, जैव-कीटनाशक, सूक्ष्म पोषक तत्व, कंपोस्ट, वर्मी-कंपोस्ट, जैव उर्वरक तथा अन्य कृषि-उपयोगी सामग्री के निर्माण हेतु फैक्ट्री, संयंत्र, प्रसंस्करण इकाई, सहकारी इकाई अथवा उत्पादन केंद्र स्थापित करे या स्थापित कराने में सहयोग प्रदान करे।
3. दुकान, वितरण केंद्र एवं बिक्री व्यवस्था
संगठन किसानों की सुविधा के लिए कृषि सेवा केंद्र, सहकारी भंडार, खुदरा दुकानें, मोबाइल बिक्री केंद्र एवं वितरण केंद्र स्थापित कर खाद-बीज-कीटनाशक एवं अन्य सामग्री सीधे किसानों को उपलब्ध कराएगा, जिससे बिचौलियों की भूमिका समाप्त हो और किसानों को उचित मूल्य मिल सके।
4. गुणवत्ता नियंत्रण एवं मानक
संगठन यह सुनिश्चित करेगा कि निर्माण एवं विक्रय की जाने वाली सभी कृषि-उपयोगी वस्तुएँ भारत सरकार एवं राज्य सरकार द्वारा निर्धारित मानकों, लाइसेंस, पंजीकरण एवं गुणवत्ता नियंत्रण नियमों का पूर्णतः पालन करती हों तथा नकली, अमानक या हानिकारक उत्पाद किसानों तक न पहुँचें।
5. सस्ती दर एवं किसानों को प्राथमिकता
संगठन का प्रयास रहेगा कि किसानों को खाद, बीज एवं अन्य सामग्री न्यूनतम लाभ या बिना लाभ के उपलब्ध कराई जाए, जिससे उनकी खेती की लागत घटे और उनकी आय में वृद्धि हो।
6. जैविक एवं प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहन
संगठन जैविक एवं प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए जैविक खाद, जैव-कीटनाशक, देसी बीज एवं पर्यावरण-अनुकूल उत्पादों के निर्माण, प्रचार-प्रसार एवं उपलब्धता पर विशेष ध्यान देगा।
7. अनुदान, सहयोग एवं संसाधन
संगठन को इन गतिविधियों के लिए केंद्र सरकार, राज्य सरकार, कृषि विभाग, सहकारिता विभाग, बैंक, वित्तीय संस्थानों, दानदाताओं एवं किसानों से अनुदान, सहयोग राशि, निवेश, भूमि, भवन एवं अन्य संसाधन प्राप्त करने का अधिकार होगा।
8. प्रशिक्षण एवं जागरूकता
संगठन किसानों को खाद, बीज एवं कीटनाशकों के सही उपयोग, मात्रा, समय एवं पर्यावरण-सुरक्षा के संबंध में प्रशिक्षण, कार्यशाला, गोष्ठी एवं जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करेगा।
9. दीर्घकालिक लक्ष्य
इस अध्याय का दीर्घकालिक लक्ष्य किसानों को खेती के लिए आवश्यक सभी सामग्री आत्मनिर्भर व्यवस्था के अंतर्गत सुलभ कराना, कृषि को लाभकारी बनाना एवं किसानों के आर्थिक सशक्तिकरण को सुनिश्चित करना होगा।
[9:17 PM, 2/6/2026] Rajesh Siddharth: 24-किसानों के आत्मसम्मान, आर्थिक सशक्तिकरण एवं समूह आधारित विकास योजनाओं के संचालन के संबंध में
1. उद्देश्य
राष्ट्रीय किसान यूनियन (सिद्धार्थ) का उद्देश्य किसानों को आत्मसम्मान, आर्थिक स्थिरता एवं आत्मनिर्भरता प्रदान करना होगा। संगठन यह मानेगा कि सामूहिक प्रयास, बचत की आदत एवं सहयोगात्मक आर्थिक गतिविधियाँ किसानों के सर्वांगीण विकास का सशक्त माध्यम हैं।
2. किसान समूहों का गठन
संगठन किसानों, कृषक परिवारों, महिला किसानों एवं युवाओं के किसान समूह, स्वयं सहायता समूह (SHG), सहकारी समूह, उत्पादक समूह एवं किसान उत्पादक संगठन (FPO) का गठन करेगा अथवा उनके गठन में सहयोग प्रदान करेगा, जिससे किसान सामूहिक रूप से अपनी समस्याओं का समाधान एवं आर्थिक गतिविधियाँ संचालित कर सकें।
3. दैनिक/मासिक बचत योजनाएँ
संगठन किसानों में बचत की आदत विकसित करने के लिए दैनिक, साप्ताहिक अथवा मासिक बचत योजनाएँ संचालित करेगा, जिनके माध्यम से समूह के सदस्य अपनी क्षमता अनुसार नियमित बचत कर आर्थिक सुरक्षा की दिशा में आगे बढ़ सकें।
4. आंतरिक ऋण एवं आपसी सहयोग
बचत समूहों के माध्यम से संगठन किसानों को आवश्यकता पड़ने पर आपसी सहमति से कम ब्याज या बिना ब्याज के आंतरिक ऋण, आकस्मिक सहायता एवं आर्थिक सहयोग उपलब्ध कराने की व्यवस्था करेगा, ताकि किसान साहूकारों एवं अत्यधिक ब्याज से मुक्त रह सकें।
5. आजीविका एवं आयवर्धन गतिविधियाँ
संगठन समूहों के माध्यम से कृषि आधारित, पशुपालन, दुग्ध उत्पादन, मधुमक्खी पालन, जैविक खेती, कुटीर उद्योग, प्रसंस्करण, विपणन एवं अन्य आयवर्धक गतिविधियाँ प्रारंभ कर किसानों की आय बढ़ाने का प्रयास करेगा।
6. प्रशिक्षण एवं क्षमता विकास
संगठन किसानों को वित्तीय साक्षरता, बचत-ऋण प्रबंधन, उद्यमिता विकास, सरकारी योजनाओं की जानकारी एवं बाजार से जुड़ाव हेतु प्रशिक्षण, कार्यशाला, गोष्ठी एवं मार्गदर्शन प्रदान करेगा।
7. सरकारी एवं गैर-सरकारी सहयोग
संगठन समूहों को सशक्त बनाने के लिए केंद्र सरकार, राज्य सरकार, कृषि विभाग, ग्रामीण विकास विभाग, सहकारिता विभाग, बैंक, वित्तीय संस्थान एवं अन्य एजेंसियों से समन्वय कर योजनाओं, अनुदान एवं ऋण सुविधाओं का लाभ दिलाने का प्रयास करेगा।
8. पारदर्शिता एवं अनुशासन
सभी समूह एवं बचत योजनाएँ पारदर्शिता, आपसी विश्वास एवं निर्धारित नियमों के अनुसार संचालित होंगी तथा सदस्यों के आत्मसम्मान एवं हितों की पूर्ण रक्षा की जाएगी।
9. दीर्घकालिक लक्ष्य
इस अध्याय का दीर्घकालिक लक्ष्य किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त, संगठित एवं आत्मनिर्भर बनाकर उनके आत्मसम्मान, सामाजिक सम्मान एवं जीवन स्तर में स्थायी सुधार लाना होगा।

