शासकीय संपदा चोरी से अवैध ईंट भट्ठा संचालित
शासन- प्रशासन द्वारा अवैध ईंट भट्ठा संचालक का सम्मानः शिकायत करने वालों का अपमान
अवैध ईंट भट्ठा अबादः पर्यावरण आबोहवा बबार्द
बालोद/पलारीः- गुरूर विकासखंड क्षेत्र चारां ओर प्राकृतिक वातावरण को दूशित, आमजनों को आर्थिक, मानसिक, शारीरिक परेशानयों को बढ़ाने वाले चोरी क राजस्व संपदा की चोरी से अवैध रूप से ईट बनाने का गोरखधंधा शासन- प्रशासन के ऑखों के सामने आबाद रूप से धड़ल्ले से जारी है, ये बड़े पैमाने पर ईंट का निर्माण कर शासकीय व निजी जमीन का खनन कर राजस्व को होने वाले आय के साथ ईट पकाने प्रतिबंधत अर्जुन पेड़ों को भट्ठा में झोंक रहे है ईट पकाने भट्टे की चिमनी से निकलने वाले धुएं में नाइट्रोजन डाइऑक्साइड की मात्रा होने से लोगों में सांस की बीमारी अधिक हो रहे है पूरा क्षेत्र आग की राख धुल हवा के साथ उड़कर स्वास्थ्य पर प्रभाव, वातावरणीय, वातावरणीय क्षति, मृदा क्षरण, जलवायु परिवर्तन होने से आमजनों को नान प्रकार के संक्रामण के साथ इस प्रदूशण से लोगों का जीना मुहाल हो गया है। इस अवैध ईंट भट्ठा संचालकों द्वारा अवैध तरीके से मिट्टी, चोरी की बिजली और पानी का उपयोग किया जा रहा है. इन अवैध ईट भट्ठा चलाने वालों का हौसला इतना बुलंद है कि पूरे शासन- प्रशासन को अपनी मुट्ठियों में रखकर खेती- किसानी के नाम पर बोर, ट्युबवेल संचालन के लिए बिजली अनुमति लेते है जिसका उपयोग इन ईट भट्ठों में करते है. कई अवैध ईट भट्ठा संचालकों द्वारा आमजन, खेती- किसानी के लिए नहर, नालियों में छोड़ गए पानी को टुल्लु आदि पंपों से चोरी के बिजली से पानी चोरी कर रहे है. अभी प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना चल रहा है जिसमें षासन- प्रशासन द्वारा हितग्राहयों पर दबाव डालकर जल्द से जल्द से प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (पीएमएवाई - जी) निर्माण करने कहते है, देरी करने मिलने वाली राशि नही देंगे, इसके डर से पात्र हितग्राही ग्रामीण समय-सीमा में पक्का मकान निर्माण करना है जिसका फायदा ये अवैध ईट बनाने वाले बेखौबी से फायदा उठाते हुए गुणवत्ताहीन, अधपके ईटां को अधिक दामों में बेच रहे है जिसके लिए ईट लेने वाले आवाज भी नही उठा सकते. मतलब साफ है पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग गुणवत्ताहीन ईट से बने मकान का नही निरीक्षण से कोई मतलब नही इन्हें सिर्फ पीएमएवाई - जी गिनना है. इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि खनिज विभाग से ईंट-भट्ठा संचालित करने के लिए अनुमति प्रदान नहीं की गई है। इस अवैध ईंट भट्ठा संचालक धरती का सीना चीर कर लाखों रुपये का वारा न्यारा करने में लगे हुए हैं विकासखंड के चारों दिशाओं में चल रहे अवैध ईट भट्ठों से हो रही दूषित वातावरण सहित कई कारणों के निदान के लिए क्षेत्र के गणमान्य प्रबुद्ध नागरिकों द्वारा संबंधित विभाग को शिकायत करने पर विभागीय अधिकारी बड़े ही चतुराई से आश्वासन का धारावाहिक दिखाकर उल्टे इन अवैध ईट संचालकों को शिकायत संबंधी सूचना देकर कुछ दिनों के लिए भट्ठों में चहल- पहल कम कर फिर वही खेल शुरू कर देते है. वर्तमान में प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना अंतर्गत पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा ग्रामीण पात्र हितग्राहियों को निर्धारित समय- सीमा अंतर्गत पक्का मकान बनाने, नही बनाने पर मिलने वाली रोकने की दबाव बनाये जाने का फायदा इन अवैध ईट भट्ठा संचालकों द्वारा बैखौफ होकर फायदा उठता उठाते हुए महंगी दरों पर अधपके, गुणवत्ताहीन ईट की बेधड़क बिक्री कर रहे है, जिसका ईट खरीदने वाले आवाज भी नही उठा सकते. क्योंकि जल्द से जल्द मकान बनाकर शासन से मिलने वाली राशि प्राप्त करना है. इस क्षेत्र में अधिकांश ईंट भट्ठा चलाने वालों के पास विभागीय अनुमति का कोई कागजात, पर्यावरण लाइसेंस व पदुषण विभाग से एनओसी जारी होना चाहिए ईट भट्टा चलाने के लिए जिला पंचायत, प्रदूशण विभाग और पर्यावरण विभाग की अनुमति लेना जरूरी है। लेकिन इन सभी नियमों को दरकिनार कर ईंट बनाए जा रहे हैं. कहीं भी ईंट भट्ठा खोलने के लिए खनिज विभाग की अनुमति जरूरी होती है। खेत में भी अगर ईंट बना रहे हैं तो कृशि विभाग की सहमति जरूरी है.
