इसकी भनक मीडिया को लगने के बाद मीडिया टीम के लोग मौके पर पहुंचे तो वहां बीजू आम के हरे पेड़ ज्यादा लगे थे और यहां तक कि तस्वीरों के साथ जानकारी मिली कि पिछले साल इसमें आम के फल भरपूर आ रहे थे।
अब सवाल यह उठ रहा है कि आखिरकार बिना सही जांच के परमिट जारी हो गई या फिर वास्तव में इसकी जांच हुई थी।
और जो पेड़ काटे गए थे जिनकी बोटा लिस्ट व लोडिंग परमिट की बात हो रही थी उस माल का भी नहीं है पता।
और क्षेत्रीय रेंजर के द्वारा बताया गया था की लकड़ी भट्टे पर इकट्ठा हो रही है और वन विभाग के बड़े बाबू रमेश बाबू के द्वारा बताया गया था अगर बिना लोडिंग परमिट के माल बाहर जाता है तो गलत है उसके बाद भी माल विभाग के बताए हुए जगह पर न मिलना यह भी एक बड़ा सवाल है।
और अगर पेड़ों की परमिट सही बनाई गई थी तो पेड़ों की कटान क्यों रुका यह भी एक लोगों में विभाग के प्रति बड़ा सवाल है
और इतना ही नहीं हाल ही में कुछ दिन पहले विकासखंड चित्तौरा के ग्राम पंचायत कुरवारी में क्षेत्रीय रेंजर द्वारा कुछ पेड़ कटवाकर जड़ों को उखड़वा कर तत्वों को छुपाया गया था। यह भी चिंता जनक है ।
बताते चलें कि बीते हुए दिनों में ही अभी जल्द एक मामला प्रकाश में आया था।जो विकासखंड रिसिया में विभाग द्वारा आम के दो पेड़ों की बनाई गई परमिट को ठेकेदार महबूब निवासी सोहरवा द्वारा कटवा कर माल को इकट्ठा कर रहा था। कि विकासखंड चित्तौरा के क्षेत्रीय रेंजर शाकिब अंसारी की नजर पड़ गई फिर रेंजर द्वारा गाड़ी को रोक कर₹20000 ले लिया गया ठेकेदार चिल्लाता रहा लेकिन उसकी सुनने वाला कोई नहीं जिसकी तमाम कॉल रिकॉर्डिंग के जरिए और जहां से पैसा आया था और जिसने दिया था सभी की कॉल रिकॉर्डिंग होते हुए जब अब तक टीवी न्यूज़ चैनल के पत्रकार ने जब क्षेत्रीय रेंजर शाकिब अंसारी से जानकारी लिया तो उनके द्वारा बताया गया ठेकेदार से कह दो ज्यादा बवाल ना करें नहीं तो कार्यवाही कर दूंगा इसकी भी कॉल रिकॉर्डिंग है।
आखिरकार अगर ठेकेदार द्वारा गलत तरीके से ट्रॉली पर लकड़ी लादकर ले जा रहा था तो उसको क्षेत्रीय रेंजर द्वारा छोड़ क्यों दिया गया।
क्या अगर गलत था तो क्षेत्रीय रेंजर चित्तौरा शाकिब अन्सारी द्वारा कार्यवाही क्यों नहीं की गई और ठेकेदार से ₹20000 क्यों ले लिया गया यह भी एक क्षेत्रीय लोगों में बड़ा सवाल बना हुआ है
यह सारी बातें अब तक टीवी न्यूज चैनल या अब तक टीवी न्यूज चैनल के पत्रकार इसकी पुष्टि नहीं कर रहें हैं लेकिन जो कॉल रिकॉर्डिंग में बातें हो रही हैं इससे क्षेत्रीय लोगों में सवाल बना हुआ है जो अब जांच का विषय जरूर है।
अब देखना यह है कि खबर प्रकाशित होने के बाद शासन प्रशासन द्वारा इस मामले की जांच होती है या इसको भी खाना पूर्ति करके छोड़ दिया जाता है
