बांदा कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय में आयोजित ‘विकसित भारत यूथ पार्लियामेंट 2026’ ने युवाओं की ऊर्जा, वैचारिक परिपक्वता और लोकतांत्रिक समझ का प्रभावशाली प्रदर्शन किया। लगभग 150 से अधिक छात्रों की सक्रिय सहभागिता से यह आयोजन एक जीवंत, प्रेरणादायक और बौद्धिक मंच के रूप में उभरा, जहां गंभीर विषयों पर तार्किक, संतुलित और जिम्मेदार विमर्श देखने को मिला।कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। इस वर्ष का केंद्रीय विषय था—
“भारतीय लोकतंत्र के लिए आपातकाल के 50 वर्ष: सबक और सीख”जनपद के विभिन्न महाविद्यालयों से आए छात्रों ने इस विषय पर उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए एक स्वस्थ, शैक्षणिक और विचारशील चर्चा प्रस्तुत की।कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण रहा मॉक पार्लियामेंट, जिसमें छात्रों ने सत्तापक्ष और विपक्ष की भूमिका निभाते हुए संसद जैसी वास्तविक परिस्थितियों का सृजन किया। उनके तर्कों की संतुलित प्रस्तुति और संवाद शैली ने लोकतांत्रिक प्रक्रिया को समझने का एक उत्कृष्ट शैक्षणिक अनुभव प्रदान किया।
नोडल अधिकारी एवं अधिष्ठाता छात्र कल्याण डॉ. अजीत सिंह ने स्वागत भाषण में यूथ पार्लियामेंट के उद्देश्यों को रेखांकित करते हुए युवाओं को राष्ट्र निर्माण की प्रमुख शक्ति बताया।मुख्य अतिथि, पूर्व सांसद भैरों प्रसाद मिश्रा ने भारत की विकास यात्रा का उल्लेख करते हुए युवाओं को रोजगार सृजनकर्ता बनने और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक रहने का संदेश दिया।विशिष्ट अतिथि, आईपीएस अधिकारी मैविस टक ने लोकतंत्र की यात्रा पर प्रकाश डालते हुए स्वतंत्र चिंतन और जिम्मेदार नागरिकता की आवश्यकता पर बल दिया।
जिला युवा अधिकारी विशाल सिंह ने ‘विकसित भारत’ पहल और MyBharat प्लेटफॉर्म की जानकारी देते हुए युवाओं को देश के लोकतांत्रिक इतिहास को समझने के लिए प्रेरित किया। वहीं, नगर पंचायत बबेरू के अध्यक्ष विवेकानंद गुप्ता ने सकारात्मक सोच के साथ राष्ट्र निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया।कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलपति प्रो. एस.वी.एस. राजू ने की। अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में उन्होंने कहा कि “संसद केवल एक भवन नहीं, बल्कि एक विचार है, जहां हर आवाज को महत्व मिलता है।” उन्होंने युवाओं से एक ऐसे भारत के निर्माण का संकल्प लेने का आह्वान किया जो आर्थिक रूप से समृद्ध, सामाजिक रूप से संवेदनशील, पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार और नैतिक मूल्यों से परिपूर्ण हो।इस अवसर पर कुलसचिव डॉ. एस.के. सिंह, विभिन्न महाविद्यालयों के अधिष्ठाता, विश्वविद्यालय के अधिकारी एवं कर्मचारी भी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।कार्यक्रम का समापन डॉ. अनीकेत कोलापुरे के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ, जिसके पश्चात एक रोचक प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित किया गया। उद्घाटन सत्र का संचालन डॉ. विज्ञा मिश्रा द्वारा किया गया।यह आयोजन केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक समग्र शैक्षणिक अनुभव बनकर सामने आया, जिसने यह सिद्ध किया कि आज का युवा न केवल जागरूक और विचारशील है, बल्कि विकसित भारत के निर्माण के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध भी है।
