सिधौली (सीतापुर) क्षेत्र में 1 अप्रैल को संविधान निर्माता भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर का जन्मोत्सव धूमधाम के साथ मनाया गया। यह कार्यक्रम राजेश कुमार सिद्धार्थ, राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अंबेडकर संवैधानिक महासंघ के नेतृत्व में आयोजित किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में क्षेत्रीय कार्यकर्ताओं एवं आमजन ने भाग लिया।
कार्यक्रम के दौरान बाबा साहेब के चित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई तथा उनके विचारों को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प लिया गया। इस अवसर पर उपजिलाधिकारी सिधौली के माध्यम से उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एवं भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक ज्ञापन सौंपा गया।
ज्ञापन में मांग की गई कि सिधौली विधानसभा क्षेत्र में स्थित अंबेडकर पार्कों एवं बाबा साहेब की प्रतिमाओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। साथ ही सभी स्थानों पर बाउंड्री वॉल एवं छावनी (शेड) का निर्माण कराए जाने की आवश्यकता जताई गई।
इस अवसर पर राजेश कुमार सिद्धार्थ ने कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा पूर्व में प्रदेश के अंबेडकर पार्कों की सुरक्षा हेतु बाउंड्री वॉल एवं छावनी निर्माण का आश्वासन दिया गया था, लेकिन सिधौली क्षेत्र में अब तक इस दिशा में कोई कार्य नहीं हुआ है। उन्होंने सरकार से शीघ्र निर्माण कार्य शुरू कराने की मांग की।
कार्यक्रम में उपस्थित वंश राज भारती, गजोधर प्रसाद, मीना भारती, देवेंद्र प्रताप भारती, डॉ. रामावतार भारती, कैलाश दीन, आर. आजाद, प्रदीप बौद्ध, नंदलाल, विनोद कुमार, ज्ञानेंद्र कुमार, वेद प्रकाश मौर्य, लक्ष्मी देवी, रामपाल, अब्बास अली सहित कई वक्ताओं ने अपने विचार रखते हुए मांग का समर्थन किया और इसे समाज की भावनाओं से जुड़ा विषय बताया।
इस दौरान 1 अप्रैल से 30 अप्रैल तक “अंबेडकर माह” मनाने का निर्णय लिया गया। साथ ही आगामी 29 अप्रैल 2026 को “डॉ. अंबेडकर संविधान स्वाभिमान यात्रा” निकालने एवं मास्टर बाग में 25,000 मोमबत्तियां जलाकर “प्रकाश महोत्सव” मनाने की घोषणा की गई।
वक्ताओं ने यह भी कहा कि 14 अप्रैल को अंबेडकर जयंती निकट है, लेकिन क्षेत्र में अभी तक न तो साफ-सफाई की व्यवस्था की गई है और न ही अंबेडकर पार्कों का रखरखाव किया गया है, जिससे समाज में नाराजगी व्याप्त है।
कार्यक्रम के अंत में सभी ने एक स्वर में सरकार से मांग की कि शीघ्र बाउंड्री वॉल एवं छावनी का निर्माण कराया जाए तथा अंबेडकर पार्कों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए, जिससे समाज की भावनाओं का सम्मान हो सके।

