आमोद कुमार
बांदा। कृषि उपज के सुरक्षित भंडारण और किसानों को बेहतर आर्थिक लाभ दिलाने की दिशा में बांदा कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में भांडागारण विकास एवं विनियामक प्राधिकरण (WDRA) पर एक दिवसीय जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में किसानों, किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ), व्यापारियों एवं दाल मिल संचालकों को आधुनिक भंडारण तकनीकों, वेयरहाउसिंग सुविधाओं और इलेक्ट्रॉनिक वेयरहाउस रसीद प्रणाली की विस्तृत जानकारी दी गई।कार्यक्रम का आयोजन विश्वविद्यालय के प्रशिक्षण एवं प्लेसमेंट निदेशालय द्वारा कृषि प्रसार विभाग के सेमिनार हॉल में किया गया। उद्घाटन अवसर पर Bhanu Prakash Mishra ने कहा कि कृषि उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ उसकी सुरक्षित भंडारण व्यवस्था भी उतनी ही आवश्यक है। यदि किसानों को उचित भंडारण सुविधा उपलब्ध हो जाए तो वे अपनी उपज को लंबे समय तक सुरक्षित रख सकते हैं और बाजार में बेहतर मूल्य मिलने पर बेचकर अधिक लाभ कमा सकते हैं।मुख्य अतिथि Mukul Kumar ने कहा कि फसल उत्पादन बढ़ाने के साथ कटाई के बाद होने वाली क्षति को कम करना भी जरूरी है। उन्होंने बताया कि भंडारण सुविधाओं के अभाव में हर वर्ष बड़ी मात्रा में कृषि उपज नष्ट हो जाती है, जबकि वैज्ञानिक भंडारण तकनीकों और प्रमाणित गोदामों के उपयोग से इस नुकसान को काफी हद तक रोका जा सकता है।कार्यक्रम में नेशनल ई-रिपॉजिटरी लिमिटेड (NERL) के प्रतिनिधि Anant Kumar Pandey ने ग्रामीण क्षेत्रों में आधुनिक वेयरहाउस स्थापित करने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि इससे किसानों को लाभ मिलने के साथ-साथ रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे।विशेष अतिथि Rudra Pratap Mishra ने किसानों को बताया कि डब्ल्यूडीआरए पंजीकृत गोदामों में रखी गई कृषि उपज के आधार पर बैंक गिरवी ऋण (Pledge Loan) उपलब्ध कराते हैं। इससे किसानों को तत्काल आर्थिक सहायता मिलती है और उन्हें कम कीमत पर फसल बेचने की मजबूरी नहीं रहती।कार्यक्रम में आयोजित तकनीकी सत्रों के दौरान विशेषज्ञों ने वैज्ञानिक भंडारण, कटाई उपरांत हानि को कम करने के उपाय, किसान स्तर पर भंडारण तकनीक, सार्वजनिक वेयरहाउसिंग के लाभ तथा इलेक्ट्रॉनिक नेगोशिएबल वेयरहाउस रसीद (e-NWR) प्रणाली की उपयोगिता पर विस्तार से जानकारी दी।
कार्यक्रम के समन्वयक Arjun Prasad Verma ने बताया कि डब्ल्यूडीआरए पंजीकृत गोदामों में भंडारित उपज के आधार पर किसान बिना फसल बेचे ऋण प्राप्त कर सकते हैं, जिससे उन्हें बेहतर मूल्य मिलने तक अपनी उपज सुरक्षित रखने का अवसर मिलता है।कार्यक्रम में 32 किसानों, एफपीओ प्रतिनिधियों और दाल मिल संचालकों ने भाग लिया। समापन के बाद प्रतिभागियों को निकटवर्ती डब्ल्यूडीआरए पंजीकृत वेयरहाउस का भ्रमण भी कराया गया, जहां उन्हें आधुनिक भंडारण प्रणाली की व्यवहारिक जानकारी दी गई।
यह कार्यक्रम किसानों को केवल भंडारण तकनीकों से परिचित कराने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्हें बाजार आधारित कृषि व्यवस्था से जोड़ने और कृषि को अधिक लाभकारी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ।
