लखनऊ, गोमती नगर। भारतीय संविधान के निर्माता, महान समाज सुधारक एवं भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती के पावन अवसर पर राजधानी लखनऊ स्थित सामाजिक परिवर्तन स्थल (अंबेडकर पार्क) में इस वर्ष एक भव्य और ऐतिहासिक “प्रकाश महोत्सव” का आयोजन किया गया। इस आयोजन में 27 लाख मोमबत्तियां एवं दीप प्रज्ज्वलित कर बाबा साहेब को श्रद्धा-सुमन अर्पित किए गए, जिससे पूरा परिसर अलौकिक रोशनी से जगमगा उठा।
यह भव्य आयोजन डॉ. आंबेडकर संवैधानिक महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं किसान कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष राजेश कुमार सिद्धार्थ के नेतृत्व एवं आवाहन पर संपन्न हुआ। इस अवसर पर हजारों की संख्या में उपस्थित लोगों ने एक-एक दीप जलाकर बाबा साहेब के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की और उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ दोपहर 1:00 बजे दीप प्रज्वलन के साथ हुआ, जिसका उद्घाटन लखनऊ के प्रथम लोकपाल डॉ. आर. आर. जायसवाल द्वारा किया गया। उन्होंने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए कहा कि बाबा साहेब का जीवन संघर्ष, शिक्षा और समानता का प्रतीक है तथा उनके विचार आज भी समाज को दिशा देने का कार्य कर रहे हैं।
इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ. आर. सी. कमल तथा संतोष कुमार उपस्थित रहे, जिन्होंने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम की गरिमा को बढ़ाया। कार्यक्रम का सफल संचालन युवा अध्यक्ष अभय प्रताप सिंह त्यागी द्वारा किया गया।
अपने ओजस्वी संबोधन में राजेश कुमार सिद्धार्थ ने कहा कि बाबा साहेब केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि एक विचारधारा और सामाजिक क्रांति के प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि 27 लाख दीप जलाकर पूरे देश में यह संदेश दिया गया है कि हम सभी उनके विचारों को जीवित रखने और समाज में समता, स्वतंत्रता और बंधुता स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
उन्होंने आगे कहा कि यह आयोजन केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि एक जन-जागरूकता अभियान है, जिसका उद्देश्य समाज के हर वर्ग तक बाबा साहेब के विचारों को पहुंचाना है। शिक्षा, संगठन और संघर्ष के माध्यम से ही समाज में वास्तविक परिवर्तन संभव है, और इन सिद्धांतों को अपनाकर ही एक समतामूलक समाज का निर्माण किया जा सकता है।
कार्यक्रम में उपस्थित वक्ताओं ने बाबा साहेब के योगदानों को याद करते हुए उन्हें आधुनिक भारत का महान निर्माता बताया। पंडित प्रदीप पासी ने समाज के वंचित वर्गों के उत्थान में उनके योगदान को रेखांकित किया, जबकि सोनम गौतम एवं सीमा गौतम ने महिलाओं के अधिकारों पर प्रकाश डालते हुए उनके ऐतिहासिक प्रयासों की सराहना की।
इस आयोजन में डॉ. उमेश कुमार गौतम, डॉ. सत्य दोहरे, पंडित पूनम पासी, अनुज कुमार गौतम, डॉ. जगजीवन सिद्धार्थ, विकास गौतम, सोनम सिंह, अब्दुल रहमान, ओम विश्व प्रताप, लक्ष्मी सिद्धार्थ, विश्व गौरव सहित सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने सक्रिय भूमिका निभाई और कार्यक्रम को सफल बनाया।
दोपहर 1:00 बजे से रात्रि 9:00 बजे तक कुल 21 चरणों में 27 लाख दीप प्रज्ज्वलित किए गए। जैसे-जैसे दीप जलते गए, पूरा सामाजिक परिवर्तन स्थल एक अद्भुत प्रकाश से भर गया। “जय भीम”, “जय संविधान” और “बाबा साहेब अमर रहें” जैसे नारों से वातावरण गूंजता रहा, जिसने कार्यक्रम को और अधिक ऊर्जावान बना दिया।
इस दौरान बड़ी संख्या में युवाओं, महिलाओं और बुजुर्गों की भागीदारी देखने को मिली, जो यह दर्शाती है कि बाबा साहेब के विचार आज भी समाज के हर वर्ग में जीवित हैं। उपस्थित लोगों ने एक स्वर में यह संकल्प लिया कि वे समाज में व्याप्त भेदभाव, अन्याय और असमानता को समाप्त करने के लिए निरंतर प्रयास करते रहेंगे और बाबा साहेब के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाएंगे।
अंत में राजेश कुमार सिद्धार्थ ने सभी अतिथियों, कार्यकर्ताओं एवं जनसमूह का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह आयोजन तभी सार्थक होगा, जब हम सभी बाबा साहेब के बताए मार्ग पर चलकर एक समतामूलक समाज के निर्माण में योगदान देंगे। उन्होंने भविष्य में इस प्रकार के आयोजनों को और भी व्यापक स्तर पर करने का संकल्प भी व्यक्त किया।
इस प्रकार 27 लाख दीपों से जगमगाया लखनऊ का सामाजिक परिवर्तन स्थल एक ऐतिहासिक क्षण का साक्षी बना, जिसने न केवल परिसर को रोशन किया, बल्कि समाज में समानता, न्याय और मानवता का संदेश भी पूरे देश में प्रसारित किया।

