स्व गणना के माध्यम से जनभागीदारी का संदेश दे गए मंत्री रामकेश निषाद
बांदा जल शक्ति राज्य मंत्री रामकेश निषाद द्वारा “स्व गणना अभियान” के अंतर्गत स्वयं अपनी गणना कराना केवल एक औपचारिक सरकारी प्रक्रिया नहीं, बल्कि लोकतंत्र की उस मूल भावना को सशक्त करने का प्रयास है जिसमें नागरिक केवल दर्शक नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण का सक्रिय सहभागी होता है। उनका यह कदम इस सत्य को रेखांकित करता है कि किसी भी देश का विकास आंकड़ों की सच्चाई पर खड़ा होता है, न कि केवल घोषणाओं और योजनाओं पर।जनगणना को अक्सर लोग एक साधारण प्रशासनिक कार्य मान लेते हैं, जबकि वास्तविकता यह है कि यही वह आधार है जिस पर सरकार शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, बिजली, पानी, आवास और सामाजिक कल्याण जैसी योजनाओं की रूपरेखा तय करती है। यदि आंकड़े अधूरे या त्रुटिपूर्ण होंगे तो विकास की दिशा भी भ्रमित हो जाएगी। ऐसे में “स्व गणना” अभियान नागरिकों को यह एहसास कराता है कि सही जानकारी देना केवल व्यक्तिगत कर्तव्य नहीं, बल्कि सामाजिक और राष्ट्रीय उत्तरदायित्व भी है।
मंत्री जी ने जिस प्रकार लोगों से स्वयं आगे बढ़कर अपनी सही एवं पूर्ण जानकारी दर्ज करने की अपील की, वह लोकतांत्रिक भागीदारी की एक सकारात्मक मिसाल है। यह पहल डिजिटल भारत की उस परिकल्पना को भी मजबूत करती है जिसमें नागरिक तकनीक के माध्यम से शासन व्यवस्था का सहभागी बनता है। वास्तव में, जब जनता स्वयं अपनी गणना करेगी, तभी योजनाओं का लाभ वास्तविक जरूरतमंदों तक पारदर्शी और प्रभावी ढंग से पहुंच सकेगा।
जनगणना केवल संख्या गिनने का कार्य नहीं, बल्कि समाज की वास्तविक स्थिति को समझने का माध्यम है। यह सरकार और जनता के बीच विश्वास का वह सेतु है, जिसके आधार पर भविष्य की नीतियां तय होती हैं। इसलिए आवश्यक है कि प्रत्येक नागरिक इस अभियान को केवल सरकारी दायित्व न समझे, बल्कि राष्ट्र के भविष्य को सशक्त बनाने वाली सहभागिता के रूप में देखे।
क्योंकि सटीक आंकड़े ही विकास का सही मार्ग प्रशस्त करते हैं, और जनभागीदारी से ही सशक्त भारत का सपना साकार हो सकता है।
