दशकों से चली आ रही जनपद चित्रकूट के मानिकपुर विकासखण्ड अंतर्गत चमरौहां गांव के समीप से बह रही बरदहा नदी पर रपटा की जगह पुल की मांग आज भी अधूरी है। हर चुनाव में यह मुद्दा जोर-शोर से उठता है, बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन चुनाव खत्म होते ही मामला फिर ठंडे बस्ते में चला जाता है। बरसात शुरू होते ही चमरौहां, मऊ गुरदारी समेत आधा दर्जन से अधिक गांवों के ग्रामीणों की जिंदगी मानो थम जाती है। तेज बारिश के दौरान रपटा पानी में डूब जाता है, जिससे लोगों का संपर्क पूरी तरह कट जाता है।
ग्रामीणों का कहना है कि कई बार राहगीरों को रास्ते में ही रात गुजारनी पड़ती है, मरीज अस्पताल नहीं पहुंच पाते, बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है और रोजमर्रा की जरूरतें भी संकट में पड़ जाती हैं। वर्षों से केवल आश्वासन मिल रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर पुल निर्माण की दिशा में कोई ठोस कदम नजर नहीं आता।
अब ग्रामीणों और राहगीरों का सीधा सवाल है - आखिर चमरौहां रपटा पुल के नाम पर आधारशिला कब रखी जाएगी? क्या नेताओं के वादे केवल चुनावी भाषणों तक ही सीमित रहेंगे, या फिर कभी इस इलाके को स्थायी राहत भी मिलेगी? ` पत्रकार शिवसम्पत करवरिया

