113.386 किमी सड़कें होंगी फोरलेन, करीब 796 करोड़ रुपये की परियोजनाओं से बदलेगी कनेक्टिविटी की तस्वीर
रायगढ़, 8/9: दक्षिण ओडिशा की सड़क कनेक्टिविटी व्यवस्था में रायगढ़ जिला अब एक बड़े बदलाव की दहलीज पर है। जिले के चार प्रमुख सड़क कॉरिडोर को दो-लेन से चार-लेन में विकसित एवं सुदृढ़ किए जाने की योजना से रायगढ़ सहित पूरे दक्षिण ओडिशा में आवागमन, व्यापार, उद्योग और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिलने की उम्मीद है।
उपलब्ध परियोजना संबंधी जानकारी के अनुसार, इन चारों सड़क परियोजनाओं की कुल लंबाई 113.386 किलोमीटर है, जबकि इनकी अनुमानित कुल लागत लगभग 795.96 करोड़ रुपये है। बताया गया है कि 7 सितंबर को राज्य मंत्रिमंडल ने रायगढ़ जिले की इन चार सड़क परियोजनाओं के लिए टेंडर को मंजूरी दी है। चारों पैकेजों की स्वीकृत टेंडर राशि मिलाकर लगभग 538.51 करोड़ रुपये बताई गई है। परियोजनाओं को पूरा करने के लिए 24 महीने की समयसीमा निर्धारित की गई है।
रायगढ़–केरेडा सड़क बनेगी फोरलेन
परियोजना के पहले हिस्से में रायगढ़–केरेडा सड़क को किमी 0/00 से 25/166 तक फोरलेन किया जाएगा। इस हिस्से की लंबाई 25.166 किलोमीटर है और अनुमानित लागत 186.19 करोड़ रुपये है।
सड़क के निर्माण एवं चौड़ीकरण का कार्य पूरा होने के बाद रायगढ़ से केरेडा की यात्रा में लगने वाला समय लगभग एक घंटे से घटकर 30 मिनट तक होने की उम्मीद है। इससे रायगढ़ शहर और आसपास के क्षेत्रों के बीच आवागमन अधिक तेज और सुगम हो सकेगा।
SH-05 से मजबूत होगी क्षेत्रीय कनेक्टिविटी
दूसरी परियोजना के तहत कोम्तालपेटा–मुनिगुड़ा–तुमुड़ीबंध सड़क SH-05 के किमी 0/000 से 30/000 तक 30 किलोमीटर सड़क को फोरलेन किया जाएगा। इस परियोजना की अनुमानित लागत 212.11 करोड़ रुपये है।
यह कॉरिडोर रायगढ़, बिसमकटक और मुनिगुड़ा को कंधमाल तथा कालाहांडी क्षेत्रों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। सड़क के फोरलेन होने से इन क्षेत्रों के बीच परिवहन व्यवस्था और अधिक मजबूत होने की उम्मीद है।
इस सड़क के दूसरे चरण में किमी 30/000 से 45/615 तथा 52/770 से 68/055 तक के हिस्से को भी फोरलेन किया जाएगा। बिसमकटक बाईपास को छोड़कर इस हिस्से की लंबाई 32.18 किलोमीटर तथा अनुमानित लागत 201.48 करोड़ रुपये है।
परियोजना के आंकड़ों के अनुसार, इस सड़क से करीब 25 गांवों को लाभ मिलने की संभावना है। इन 25 गांवों में ग्रामसभाएं भी आयोजित की जा चुकी हैं।
भवानीपटना–मुनिगुड़ा मार्ग को भी मिलेगा नया स्वरूप
चौथी परियोजना के तहत भवानीपटना–मुनिगुड़ा सड़क SH-06 के किमी 37/340 से 63/650 तक के हिस्से को फोरलेन किया जाएगा। अंबाडोला बाईपास को छोड़कर इस हिस्से की लंबाई 26.040 किलोमीटर है और अनुमानित लागत 196.18 करोड़ रुपये है।
परियोजना के पूरा होने से इस मार्ग से जुड़े करीब 30 गांवों को लाभ मिलने की संभावना है। ग्रामीण क्षेत्रों से शहरों, बाजारों और प्रमुख व्यापारिक केंद्रों तक पहुंच आसान होने के साथ स्थानीय लोगों के लिए आवागमन की सुविधा में भी बड़ा सुधार होने की उम्मीद है।
उद्योग और व्यापार को मिलेगी नई रफ्तार
चार-लेन सड़क परियोजनाएं केवल यातायात सुविधा तक सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि रायगढ़ जिले की अर्थव्यवस्था को भी नई गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
परियोजना के अनुसार रायगढ़, कालाहांडी, कंधमाल और विशाखापट्टनम के बीच अंतर-जिला एवं अंतर-राज्यीय संपर्क मजबूत होगा। इसके साथ ही रायगढ़, बिसमकटक, मुनिगुड़ा और अंबाडोला रेलवे स्टेशनों से सड़क संपर्क और बेहतर होने की संभावना है।
रायगढ़ क्षेत्र में स्थित जेके पेपर मिल, इम्फा और वेदांता जैसे औद्योगिक प्रतिष्ठानों के लिए बेहतर सड़क नेटवर्क लॉजिस्टिक्स व्यवस्था को मजबूत करने में मददगार साबित हो सकता है। कच्चे माल के परिवहन से लेकर तैयार उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने की प्रक्रिया अधिक सुगम और तेज होने की उम्मीद है।
किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी फायदा
सड़क बुनियादी ढांचे के विकास का सीधा लाभ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मिलने की संभावना है। बेहतर सड़कें बनने से किसान अपने कृषि उत्पादों को कम समय में स्थानीय एवं बड़े बाजारों तक पहुंचा सकेंगे।
इससे फार्म-टू-मार्केट कनेक्टिविटी मजबूत होगी और कृषि उत्पादों के परिवहन में लगने वाला समय एवं लागत कम होने की संभावना है। ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे व्यापार, परिवहन सेवाओं और अन्य आर्थिक गतिविधियों को भी इससे प्रोत्साहन मिल सकता है।
पर्यटन और धार्मिक स्थलों तक पहुंच होगी आसान
रायगढ़ जिले के धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों के लिए भी बेहतर सड़क कनेक्टिविटी एक महत्वपूर्ण बदलाव साबित हो सकती है। चाटिकोंणा शिव मंदिर तथा मां मझिघरियाणी मंदिर जैसे प्रमुख धार्मिक स्थलों तक श्रद्धालुओं और पर्यटकों की आवाजाही अधिक सुविधाजनक होने की उम्मीद है।
सड़कें बेहतर होने से जिले के पर्यटन स्थलों को व्यापक क्षेत्र से जोड़ने और स्थानीय पर्यटन आधारित अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने की संभावनाएं भी बढ़ेंगी।
डिवाइडेड हाईवे और 80 किमी प्रति घंटे की डिजाइन स्पीड
परियोजना योजना के अनुसार नई सड़कों को डिवाइडेड हाईवे, रेज्ड मीडियन तथा प्रत्येक कैरिजवे में 7.5 मीटर चौड़ाई जैसी आधुनिक सुविधाओं के साथ विकसित किया जाएगा। परियोजना के डिजाइन में 80 किलोमीटर प्रति घंटे की डिजाइन स्पीड का प्रावधान बताया गया है।
सड़क विकास पूरा होने के बाद यात्रा के समय में लगभग 30 से 45 मिनट तक की कमी आने की उम्मीद है। इससे यातायात अधिक सुगम होने के साथ सड़क सुरक्षा में भी सुधार की संभावना है।
भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया भी आगे बढ़ी
इन परियोजनाओं से जुड़ी भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया भी विभिन्न चरणों में आगे बढ़ चुकी है। रायगढ़–केरेडा तथा SH-05 के पहले 30 किलोमीटर हिस्से के लिए 4(1) अधिसूचना जारी होने के साथ सभी सार्वजनिक सुनवाई पूरी होने की जानकारी दी गई है।
वहीं, अन्य दो परियोजनाओं में ग्रामसभाएं पूरी हो चुकी हैं और राजस्व विभाग को आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराने की प्रक्रिया चल रही है।
दक्षिण ओडिशा का प्रमुख कनेक्टिविटी हब बन सकता है रायगढ़
सड़क कनेक्टिविटी के इस बड़े विस्तार से रायगढ़ केवल जिला मुख्यालय के रूप में ही नहीं, बल्कि दक्षिण ओडिशा के उद्योग, व्यापार, कृषि और पर्यटन के प्रमुख कनेक्टिविटी हब के रूप में और मजबूत हो सकता है।
विशाखापट्टनम बंदरगाह से संपर्क, रेलवे नेटवर्क, औद्योगिक क्षेत्रों और ग्रामीण बाजारों को जोड़ने में इन सड़क कॉरिडोर की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। बेहतर सड़क नेटवर्क से माल परिवहन, यात्री आवागमन और व्यापारिक गतिविधियों को नई गति मिलने की उम्मीद है।
चार-लेन सड़क परियोजनाओं का निर्माण पूरा होने के बाद रायगढ़ जिले के सड़क मानचित्र में व्यापक बदलाव देखने को मिल सकता है। इससे जिले के विकास, व्यापार, उद्योग, कृषि, पर्यटन और यातायात को नई दिशा मिलने की उम्मीद है। आने वाले समय में ये सड़क कॉरिडोर रायगढ़ को दक्षिण ओडिशा के एक महत्वपूर्ण आर्थिक एवं परिवहन केंद्र के रूप में स्थापित करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
चित्तरंजन नायक
रायगढ़, ओडिशा

