बिहार में इधर CPM प्रत्याशी पर हमला, उधर डिप्टी CM की कार पर पथराव
पहले चरण के मतदान के बीच दो बड़ी घटनाओं से गरमाई राजनीति
पटना/मधेपुरा, नवम्बर 2025।
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के पहले चरण में जहाँ एक ओर मतदान शांतिपूर्ण ढंग से जारी था, वहीं दो अलग-अलग घटनाओं ने पूरे राज्य के राजनीतिक माहौल को झकझोर दिया।
मधेपुरा जिले में CPM प्रत्याशी पर जानलेवा हमला और दूसरी ओर राज्य के उपमुख्यमंत्री के काफिले पर पथराव — इन दोनों घटनाओं ने प्रशासन और चुनाव आयोग को सतर्क कर दिया है।
पहली घटना: मधेपुरा में CPM प्रत्याशी पर हमला
मधेपुरा जिले के बिहारीगंज विधानसभा क्षेत्र में CPI(M) के प्रत्याशी कामरेड संजय यादव पर दोपहर लगभग 12:30 बजे हमला हुआ।
सूत्रों के अनुसार, वे अपने विधानसभा क्षेत्र के वार्ड संख्या 13 स्थित एक मतदान केंद्र का निरीक्षण करने पहुँचे थे।
जैसे ही वे कार्यकर्ताओं से बातचीत कर लौटने लगे, कुछ अज्ञात लोगों ने उन पर डंडों और लाठियों से हमला कर दिया।
हमले में उन्हें सिर और हाथ में चोटें आई हैं। स्थानीय पुलिस ने तुरंत मौके पर पहुँचकर उन्हें अस्पताल भिजवाया। फिलहाल उनकी स्थिति स्थिर बताई जा रही है।
घटना के बाद पुलिस ने इलाके में गश्त बढ़ा दी है और कई संदिग्धों को हिरासत में लिया गया है।
CPM के जिला सचिव अशोक कुमार ने इस हमले की कड़ी निंदा करते हुए कहा —
“यह लोकतंत्र पर हमला है। जब जनता वोट डाल रही है, उस समय विपक्ष के प्रत्याशी पर हमला साफ बताता है कि कुछ शक्तियाँ चुनाव को प्रभावित करना चाहती हैं। प्रशासन को तत्काल सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।”
दूसरी घटना: डिप्टी सीएम के काफिले पर पथराव
इसी बीच, अररिया जिले के फारबिसगंज इलाके से एक और बड़ी खबर आई।
यहाँ चुनाव प्रचार के दौरान राज्य के उपमुख्यमंत्री (एनडीए घटक दल से) के काफिले पर कुछ उपद्रवियों ने पथराव कर दिया।
यह घटना उस समय हुई जब डिप्टी सीएम मतदान के बाद मीडिया से बातचीत कर अपने काफिले से लौट रहे थे।
भीड़ में से कुछ लोगों ने अचानक पथराव शुरू कर दिया, जिससे सुरक्षाकर्मी सतर्क हो गए और काफिला तुरंत सुरक्षित निकाल लिया गया।
डिप्टी सीएम बाल-बाल बचे, हालांकि उनकी गाड़ी के शीशे टूट गए।
सुरक्षा बलों ने इलाके को घेरकर कुछ संदिग्धों को हिरासत में लिया है।
घटना के बाद पुलिस अधीक्षक ने कहा —
“स्थिति अब नियंत्रण में है। यह किसी की साजिश भी हो सकती है। जांच के बाद स्पष्ट होगा कि इसके पीछे कौन लोग हैं।”
राजनीतिक प्रतिक्रिया : आरोप-प्रत्यारोप तेज़
दोनों घटनाओं के बाद पूरे बिहार में राजनीतिक बयानबाज़ी तेज़ हो गई है।
महागठबंधन नेताओं ने आरोप लगाया कि प्रशासन विपक्षी प्रत्याशियों को पर्याप्त सुरक्षा नहीं दे पा रहा है।
वहीं एनडीए की ओर से कहा गया कि “ये घटनाएँ जनता में भ्रम फैलाने और माहौल बिगाड़ने की कोशिश हैं।”
राजद प्रवक्ता ने कहा —
“डिप्टी सीएम की कार पर पथराव से ज्यादा गंभीर है कि गरीब वर्ग के वामपंथी प्रत्याशी पर हमला हुआ। यह जनता की आवाज़ को दबाने का प्रयास है।”
जबकि जदयू प्रवक्ता ने पलटवार करते हुए कहा —
“राज्य सरकार और प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। किसी भी घटना को राजनीतिक रंग देने की कोशिश अनुचित है।”
चुनाव आयोग की सख्ती : रिपोर्ट तलब
राज्य निर्वाचन आयोग ने दोनों घटनाओं पर संज्ञान लेते हुए जिला प्रशासन से तत्काल रिपोर्ट तलब की है।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने कहा —
“दोनों घटनाएँ गंभीर हैं। यदि किसी स्तर पर लापरवाही पाई गई तो संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई की जाएगी।”
चुनाव आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि शेष चरणों के मतदान में सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत की जाएगी।
मधेपुरा की राजनीति पर असर
मधेपुरा हमेशा से वामपंथी और समाजवादी आंदोलनों का गढ़ रहा है।
CPM प्रत्याशी पर हमला यहाँ की राजनीतिक स्थिति को प्रभावित कर सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस घटना से सहानुभूति वोटों का झुकाव बढ़ सकता है।
ग्रामीण मतदाता पहले ही रोजगार, शिक्षा और विकास के मुद्दों पर वोट देने की बात कह चुके हैं; ऐसे में यह घटना वामपंथी खेमे को “नैतिक बल” दे सकती है।
सुरक्षा की परीक्षा : क्या सिस्टम तैयार है?
पहले चरण में अब तक मतदान अधिकतर क्षेत्रों में शांतिपूर्ण रहा, लेकिन इन दो घटनाओं ने यह सवाल फिर उठा दिया है कि क्या प्रशासनिक मशीनरी हर स्थिति से निपटने के लिए पर्याप्त तैयार है?
बिहार जैसे विशाल और संवेदनशील राज्य में चुनाव सुरक्षा हमेशा चुनौतीपूर्ण रही है।
चुनाव विशेषज्ञों का कहना है कि संवेदनशील बूथों पर सुरक्षा बलों की संख्या और निगरानी तकनीक बढ़ाने की ज़रूरत है।
जनता का दृष्टिकोण : “डर नहीं, लोकतंत्र में विश्वास”
मधेपुरा और अररिया दोनों जगह जनता ने एक स्वर में कहा कि “हम हिंसा से नहीं डरते, लोकतंत्र में विश्वास रखते हैं।”
स्थानीय मतदाता सुरेश यादव ने कहा —
“हमारे वोट से ही बदलाव आएगा। जो डराना चाहता है, वो जनता की ताकत नहीं जानता।”
निष्कर्ष : लोकतंत्र की परीक्षा, जनता की परिपक्वता
बिहार चुनाव 2025 का पहला चरण अब केवल मतदान का नहीं, बल्कि लोकतंत्र की परिपक्वता का भी इम्तिहान बन गया है।
एक ओर शांतिपूर्ण मतदान की तस्वीरें हैं, तो दूसरी ओर हिंसा की घटनाएँ भी यह याद दिलाती हैं कि बिहार की राजनीति में तनाव अब भी मौजूद है।
फिर भी, जनता ने जिस धैर्य और जिम्मेदारी के साथ वोट डाला, वह इस राज्य की सबसे बड़ी ताकत है।
हिंसा के इन दागों के बावजूद लोकतंत्र का चेहरा साफ़ है —
बिहार अब संघर्ष से नहीं, मतदान से बदलाव चाहता है।
