लखनऊ। किसान कांग्रेस प्रदेश उपाध्यक्ष राजेश कुमार सिद्धार्थ ने कहा कि भारत के लोकतंत्र के लिए यह अत्यंत गंभीर समय है। देश में वह व्यवस्था लागू की जा रही है जिसमें जनता के मत का मूल्य और चुनाव की पारदर्शिता दोनों पर प्रश्नचिह्न लग गया है।
राजेश कुमार सिद्धार्थ ने कहा कि वर्ष 2023 में पारित मुख्य निर्वाचन आयुक्त एवं अन्य निर्वाचन आयुक्त विधेयक, 2023 ने भारतीय लोकतंत्र की रीढ़ पर सीधा प्रहार किया है। इस कानून के माध्यम से चुनाव आयोग की चयन प्रक्रिया से सुप्रीम कोर्ट को पूरी तरह अलग कर दिया गया, ताकि सत्ता अपने मनपसंद व्यक्तियों की नियुक्ति कर सके।
उन्होंने कहा कि इस कानून की सबसे खतरनाक धारा 16 है, जो यह कहती है कि चुनाव आयुक्त अपने पद पर रहते हुए या सेवानिवृत्ति के बाद किसी भी कार्य के लिए न्यायिक समीक्षा के दायरे से बाहर रहेगा। इसका अर्थ यह है कि यदि कोई आयुक्त भ्रष्टाचार करे, डेटा में हेराफेरी करे या किसी राजनीतिक दल को लाभ पहुँचाए, तब भी उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जा सकेगी।
राजेश कुमार सिद्धार्थ ने कहा कि यह आजीवन सुरक्षा न तो प्रधानमंत्री को मिली है, न ही राष्ट्रपति को। लेकिन चुनाव आयुक्त को दी गई यह छूट लोकतंत्र की आत्मा पर आघात है।
उन्होंने हरियाणा विधानसभा चुनाव 2024 का उदाहरण देते हुए कहा कि मतदान प्रतिशत के आंकड़े बार-बार बदले गए। मतदान दिवस पर आयोग ने 61.19 प्रतिशत मतदान बताया, जो कुछ घंटे बाद 65.65 प्रतिशत और अंततः 67.90 प्रतिशत घोषित कर दिया गया। यह केवल आंकड़ों का अंतर नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर अविश्वास का संकेत है।
सिद्धार्थ ने कहा कि यदि विपक्ष के नेताओं द्वारा लगाए गए आरोप झूठे हैं, तो सरकार और चुनाव आयोग को मानहानि का मुकदमा दायर करना चाहिए था। लेकिन ऐसा नहीं किया गया, क्योंकि अदालत में यदि पूरा चुनाव रिकॉर्ड मंगाया गया तो सच्चाई सामने आ जाएगी।
उन्होंने कहा कि आज स्थिति यह है कि कोई नागरिक चुनाव आयोग के विरुद्ध मुकदमा नहीं कर सकता, सुप्रीम कोर्ट सीधे तौर पर आयोग से डेटा नहीं मांग सकता और जो भी आवाज उठाता है, उसे देशद्रोह या रासुका जैसे मामलों में फंसाया जाता है।
राजेश कुमार सिद्धार्थ ने कहा कि यह समय किसी राजनीतिक दल के समर्थन या विरोध का नहीं है, बल्कि लोकतंत्र की रक्षा का समय है। यदि वोट ही सुरक्षित नहीं रहेंगे तो संसद मात्र एक औपचारिक संस्था बन जाएगी।
उन्होंने कहा कि सरकार अब न बैलेट पेपर लाएगी, न डिजिटल डेटा साझा करेगी और न ही स्वतंत्र जांच को अनुमति देगी। इसलिए जनता को स्वयं जागरूक होकर सच्चाई को हर घर तक पहुंचाना होगा कि आज का चुनाव आयोग अब “चुनाव मंत्रालय” बन चुका है, जहाँ वोट गिने नहीं बल्कि तय किए जा रहे हैं।
अंत में उन्होंने कहा कि लोकतंत्र तब तक जीवित है, जब तक जनता सवाल पूछती है। यदि आज हम मौन रहे, तो कल बोलने का अधिकार भी किसी कानून की धारा में कैद कर दिया जाएगा।
– राजेश कुमार सिद्धार्थ
किसान कांग्रेस प्रदेश उपाध्यक्ष
