अब तक न्याय
जनपद पीलीभीत
जिलाधिकारी पीलीभीत द्वारा संचालित एनिमिया मुक्त किशोरी अभियान पर विशेष रिपोर्ट
जनपद पीलीभीत में किशोरियों के स्वास्थ्य, पोषण और सुरक्षित भविष्य को सुदृढ़ बनाने हेतु जिलाधिकारी के निर्देशन में संचालित एनिमिया मुक्त किशोरी अभियान लगातार प्रभावी परिणाम दर्ज कर रहा है। इस अभियान की शुरुआत 10 नवंबर 2025 से की गई, जिसका उद्देश्य जनपद की सभी किशोरियों को एनिमिया से सुरक्षित करना, नियमित आयरन सेवन की आदत विकसित करना तथा मासिक धर्म स्वच्छता के प्रति व्यापक व्यवहारिक परिवर्तन लाना है।
15 नवम्बर 2025 को अभियान के अंतर्गत आयोजित कार्यक्रमों में स्वास्थ्य विभाग, ICDS, शिक्षा विभाग, ग्राम पंचायत संगठन तथा विभिन्न सामुदायिक संगठनों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, आयुष्मान आरोग्य मंदिरों, आंगनबाड़ी केन्द्रों और ग्राम-स्तर के सभी स्वास्थ्य सहयोगी कर्मियों ने विशेष उपस्थिति दर्ज करते हुए किशोरियों तक स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की।
इस अवसर पर जिला प्रशासन द्वारा प्राप्त आंकड़ों के अनुसार 15 नवम्बर को पूरे जनपद में कुल 31924 किशोरियों को आयरन की पिंक एवं नीली गोलियां खिलाई गईं, साथ ही उन्हें मासिक धर्म स्वच्छता, पोषण संतुलन, शरीर में हीमोग्लोबिन की भूमिका और एनीमिया से होने वाले खतरों के बारे में विस्तृत रूप से जागरूक किया गया।
नीचे इस अभियान की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत है।
1. अभियान की पृष्ठभूमि और आवश्यकता
भारत में किशोरियों में एनीमिया की समस्या लंबे समय से एक प्रमुख स्वास्थ्य चुनौती बनी हुई है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS) के आंकड़े बताते हैं कि कई राज्यों में 15 से 19 वर्ष की आयु वर्ग की बड़ी संख्या में लड़कियां हीमोग्लोबिन स्तर कम रहने की समस्या से जूझ रही हैं। एनीमिया किशोरियों की शारीरिक वृद्धि, मानसिक विकास, शिक्षा, खेलकूद और भविष्य में मातृत्व स्वास्थ्य को गंभीर रूप से प्रभावित करता है।
इन्हीं परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए पीलीभीत जिला प्रशासन द्वारा यह अभियान ठोस रणनीति के साथ शुरू किया गया। अभियान का मुख्य उद्देश्य ऐसे परिवारों और समुदायों तक पहुंचना था, जहां पोषण की कमी, जागरूकता का अभाव और स्वास्थ्य सेवाओं तक सीमित पहुंच के कारण किशोरियां अधिक प्रभावित होती हैं।
2. अभियान का संचालन और प्रमुख सहभागी
अभियान को प्रभावी बनाने में जिले के विभिन्न विभागों तथा फ्रंटलाइन वर्कर्स की महत्वपूर्ण भूमिका रही। मुख्य रूप से शामिल संस्थाएं और कर्मचारी निम्न हैं
चिकित्सा स्वास्थ्य विभाग
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र
आयुष्मान आरोग्य मंदिर
आंगनबाड़ी कार्यकर्ता
आशा बहुएं
एएनएम
संगिनी एवं महिला स्वास्थ्य स्वयंसेवी
पंचायत सहायक
एनआरएल (राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन) की दीदियां
इन सभी ने अपने-अपने क्षेत्र में व्यापक स्तर पर घर-घर संपर्क अभियान चलाया। किशोरियों को न केवल आयरन की गोलियां खिलाई गईं बल्कि यह भी सुनिश्चित किया गया कि उनकी माता, अभिभावक और परिवारजन भी इसके महत्व को समझें और नियमित रूप से सेवन के लिए प्रेरित करें।
3. दिनांक 15.11.2025 का विशेष कार्यक्रम
अभियान के अंतर्गत 15 नवंबर का दिन विशेष रूप से महत्वपूर्ण रहा। पूरे जनपद में सघन अभियान चलाया गया, जिसमें स्वास्थ्य टीमों ने एक समन्वित रणनीति के आधार पर कार्य किया।
इस दिन
स्वास्थ्य केंद्रों और आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में विशेष शिविर लगाए गए।
स्कूलों, कस्तूरबा विद्यालयों और गैर-विद्यालयी किशोरियों के लिए पृथक जागरूकता सत्र आयोजित हुए।
स्वास्थ्य कर्मियों ने गांव-गांव जाकर किशोरियों को आयरन की पिंक और नीली गोलियां दीं।
घर-घर जाकर मासिक धर्म स्वच्छता पर व्यवहारिक प्रशिक्षण दिया गया।
किशोरियों को सही भोजन, समय पर आयरन सेवन और स्वास्थ्य जांच के महत्व के बारे में बताया गया।
इस विशेष दिन कुल 31924 किशोरियों को आयरन की गोलियां खिलाई गईं, जो अपने आप में जनपद स्तर पर एक उपलब्धि है।
4. मासिक धर्म स्वच्छता पर जागरूकता
किशोरियों के स्वास्थ्य में मासिक धर्म से जुड़े विषयों पर खुलकर बातचीत बहुत आवश्यक है। कई समाजों में आज भी इस विषय पर संकोच के कारण जानकारी का अभाव बना रहता है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए इस अभियान के दौरान निम्न बिंदुओं पर जोर दिया गया
स्वच्छ और सुरक्षित सैनिटरी नैपकिन का उपयोग
मासिक धर्म के दौरान नियमित स्नान और व्यक्तिगत साफ-सफाई
कपड़े या गंदे विकल्पों के प्रयोग से होने वाले संक्रमणों के प्रति सावधानी
स्वयं की हर महीने स्वास्थ्य निगरानी
माता-पिता और शिक्षकों के साथ खुलकर चर्चा करने के लिए प्रोत्साहन
किशोरियों को बताया गया कि मासिक धर्म कोई बीमारी नहीं बल्कि एक प्राकृतिक प्रक्रिया है। इसे स्वच्छता और सही जानकारी के साथ बेहतर तरीके से संभाला जा सकता है।
5. पोषण और आहार संबंधी सलाह
अभियान के दौरान किशोरियों को पोषक आहार के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई। विशेष रूप से इन खाद्य पदार्थों के सेवन पर जोर दिया गया
हरी पत्तेदार सब्जियां
चना, गुड़, मूंगफली
दालें, अनाज और मिलेट आधारित भोजन
मौसमी फल
दूध, दही और पनीर
अंडा और अन्य प्रोटीन स्रोत
किशोरियों को यह भी बताया गया कि नियमित रूप से आयरन की गोलियां खाना तभी प्रभावी होगा जब उनका खानपान संतुलित और विविधतापूर्ण होगा। शरीर में आयरन अवशोषण बढ़ाने के लिए विटामिन-सी युक्त फल जैसे नींबू, आंवला, संतरा इत्यादि के सेवन की सलाह भी दी गई।
6. अभिभावकों की सहभागिता
घर-घर संपर्क के दौरान स्वास्थ्य कर्मियों ने किशोरियों के अभिभावकों से भी मुलाकात की और उन्हें बताया कि किशोरी के स्वास्थ्य को बनाए रखना केवल स्कूल या स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि परिवार की भी प्रमुख भूमिका होती है।
विशेष रूप से निम्न संदेश दिए गए
बच्चियों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराएं
उनकी मासिक धर्म संबंधी परेशानियों को गंभीरता से सुनें
सप्ताह में एक दिन आयरन की गोली खिलाने की जिम्मेदारी लें
बच्चियों को पढ़ाई, खेलकूद और सामाजिक गतिविधियों में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित करें
अभिभावकों ने भी इस बात को स्वीकार किया कि स्वास्थ्य से जुड़ी बातचीत का वातावरण परिवार में बनाना बहुत आवश्यक है।
7. किशोरियों की प्रतिक्रिया
अभियान के दौरान कई किशोरियों ने बताया कि उन्हें पहले आयरन की गोलियों के महत्व का अंदाजा नहीं था। लेकिन स्वास्थ्य टीम की ओर से दी गई समझाइश के बाद उन्हें एहसास हुआ कि कमजोरी, थकान, चक्कर आना, बाल झड़ना और पढ़ाई में ध्यान न लग पाने जैसी समस्याओं का संबंध कई बार हीमोग्लोबिन की कमी से होता है।
कई किशोरियों ने यह भी कहा कि मासिक धर्म स्वच्छता पर चर्चा से उन्हें नई और महत्वपूर्ण जानकारी मिली है, जिससे वे भविष्य में अपनी सेहत के प्रति और सजग रहेंगी।
8. जिला प्रशासन की भूमिका और प्रयास
जिलाधिकारी द्वारा स्वयं अभियान की निगरानी की जा रही है। उन्होंने सभी ब्लॉक स्तर पर अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि इस अभियान में लेशमात्र भी लापरवाही नहीं होनी चाहिए।
प्रमुख निर्देश इस प्रकार रहे
प्रत्येक किशोरी तक आयरन गोलियों की पहुंच सुनिश्चित की जाए
किसी भी गांव या वार्ड को न छोड़ा जाए
जागरूकता कार्यक्रमों को वास्तविक अर्थों में प्रभावी बनाया जाए
सभी स्वास्थ्य टीमों की प्रतिदिन की प्रगति की समीक्षा की जाए
अभियान के आंकड़े पारदर्शिता के साथ दर्ज हों
इसी संगठित नेतृत्व के कारण यह अभियान पूरे जनपद में अत्यंत सफल रहा।
9. अभियान के अब तक के प्रभाव
अभियान से अब तक निम्न सकारात्मक परिणाम सामने आए
स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति किशोरियों और परिवारों में जागरूकता बढ़ी
आयरन की गोलियों को लेकर भ्रांतियां दूर हुईं
स्कूलों में किशोरियों की उपस्थिति बेहतर हुई
मासिक धर्म स्वच्छता संबंधी जागरूकता में वृद्धि हुई
समुदाय में स्वास्थ्य सहयोगियों की विश्वसनीयता और पहुंच मजबूत हुई
10. अगले चरण और भविष्य की योजना
जिला प्रशासन द्वारा बताया गया कि आने वाले सप्ताहों में भी यह अभियान जारी रहेगा ताकि एक भी किशोरी छूट न जाए।
भविष्य की योजनाएं
गांवों में विशेष हेल्थ कैंप
स्कूलों में हीमोग्लोबिन जांच
गंभीर रूप से एनीमिक किशोरियों की पहचान और उपचार
पोषण किट वितरण
नियमित मॉनिटरिंग और रिपोर्टिंग
लक्ष्य यह है कि वर्ष 2026 तक पीलीभीत को पूर्णतः एनिमिया मुक्त किशोरी जिलों की श्रेणी में शामिल किया जाए।
निष्कर्ष
जनपद पीलीभीत में संचालित एनिमिया मुक्त किशोरी अभियान स्वास्थ्य, जागरूकता और सामुदायिक सहभागिता का उत्कृष्ट उदाहरण बनकर उभर रहा है। 15 नवंबर 2025 को मात्र एक दिन में 31924 किशोरियों तक आयरन गोलियों की आपूर्ति और जागरूकता पहुंचाना यह दर्शाता है कि जिला प्रशासन की योजनाएं तत्परता और समर्पण से लागू की जा रही हैं।
यह अभियान न केवल किशोरियों के वर्तमान स्वास्थ्य को सुरक्षित करेगा, बल्कि उनके भविष्य को भी मजबूत नींव प्रदान करेगा। वर्तमान पीढ़ी की सेहत ही आने वाली पीढ़ियों का आधार है, और इस दृष्टिकोण से पीलीभीत प्रशासन का यह प्रयास अत्यंत सराहनीय है।

