महमूदाबाद/सीतापुर। समेकित शिक्षा के अंतर्गत क्षेत्र की सभी आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को बच्चों की विकासात्मक बाधाओं की पहचान, रिकॉर्डिंग और उनके निराकरण के लिए एक विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में उपस्थित प्रशिक्षकों ने बताया कि किस प्रकार स्क्रीनिंग चेकलिस्ट के माध्यम से बच्चों के विलंबित विकास अथवा विशेष बाधाओं की पहचान कर व्यवस्थित रूप से उनका विवरण दर्ज किया जाए तथा आवश्यकतानुसार आगे की चिकित्सकीय जांच के लिए संबंधित विभागों को सूचित किया जाए।
प्रशिक्षण में यह विशेष रूप से रेखांकित किया गया कि बच्चों की किसी भी प्रकार की समस्या—सुनने, बोलने, देखने या चलने-फिरने में कठिनाई—को कक्षा व्यवस्था में अनुकूलित सुविधाओं के माध्यम से दूर किया जा सकता है। ऐसे बच्चों को कक्षा की प्रथम पंक्ति में बैठाने, अधिगम सामग्री सभी के लिए सुगम रूप में उपलब्ध कराने और कक्षा में पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था सुनिश्चित करने पर फोकस किया गया।
आंगनबाड़ी केंद्र के अंदर और बाहर सुगम्य वातावरण बनाने, बाल-मैत्रिक पेयजल व स्वच्छता सुविधाओं को ग्राम पंचायत के सहयोग से सहज रूप में उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया।
पैरेंट–टीचर मीटिंग के दौरान अभिभावकों को बच्चों के हेल्थ चेकअप, मेडिकल असेसमेंट, रेफरल प्रक्रियाओं और विकासात्मक जाँच के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। आशा दीदी, एएनएम और राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की ब्लॉक स्तरीय टीम के समन्वय से बच्चों के रेफरल व उपचार को और अधिक प्रभावी बनाने के निर्देश दिए गए।
इस महत्वपूर्ण प्रशिक्षण कार्यशाला का संचालन प्रशिक्षकों अति विशिष्ट शिक्षक विपिन मिश्रा, ममता तिवारी, प्रजेश कुमारी और ऐश्वर्य शुक्ला द्वारा किया गया। इस कार्यक्रम में क्षेत्र की सभी आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग किया और अपने अपने केंद्रों में सीख को लागू करने का संकल्प लिया।
यह प्रशिक्षण ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चों के सर्वांगीण विकास और बाधा-रहित शिक्षा व्यवस्था स्थापित करने की दिशा में एक सार्थक पहल साबित होगा।

