दिल्ली का दम घुट रहा है: हवा में फिर बढ़ा जहर, कई इलाकों में AQI 400 के पार
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में प्रदूषण का स्तर एक बार फिर खतरनाक स्थिति में पहुंच गया है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ताजा रिपोर्ट बताती है कि रविवार सुबह शहर का औसत AQI 381 रहा, जो किसी भी मानक के अनुसार बेहद खराब श्रेणी में आता है। राजधानी में सुबह से ही घने कोहरे और जहरीली धुंध की मोटी परत छाई हुई है, जिसकी वजह से दृश्यता भी काफी प्रभावित हुई है और हवा में घुला प्रदूषण साफ महसूस किया जा सकता है।
दिल्ली के कई प्रमुख इलाकों में प्रदूषण का स्तर 400 के पार पहुंच चुका है, जो सीधे गंभीर श्रेणी में दर्ज किया जाता है। बवाना में आज सुबह 7 बजे AQI 435 रिकॉर्ड किया गया, जो स्वास्थ्य के लिए अत्यंत खतरनाक स्तर माना जाता है। आनंद विहार क्षेत्र में AQI 429, पंजाबी बाग में 411 और पटपड़गंज में 401 दर्ज हुआ है। चांदनी चौक, आरके पुरम, द्वारका सेक्टर-8, पूसा और आईटीओ जैसे इलाकों में भी हवा बेहद खराब स्थिति में है और AQI 350 से 400 के बीच बना हुआ है।
इंडिया गेट और कर्तव्य पथ जैसे पर्यटन स्थलों की हवा भी जहरीली धुंध में डूबी नजर आ रही है। वहां AQI 388 दर्ज किया गया है, जो बेहद खराब श्रेणी में आता है। NSIT द्वारका ऐसा इलाका रहा जहां AQI सबसे कम रहा, लेकिन वह भी 300 के पार यानी बेहद खराब श्रेणी में ही शामिल है। राजधानी में लगातार कई दिनों से वायु गुणवत्ता में सुधार नहीं हो रहा है, जिससे लोगों में चिंता बढ़ती जा रही है।
सीपीसीबी के अनुसार, 0-50 AQI अच्छा, 51-100 संतोषजनक, 101-200 मध्यम, 201-300 खराब, 301-400 बेहद खराब और 401-500 गंभीर श्रेणी की हवा को दर्शाता है। लेकिन दिल्ली की हवा लगातार ऊपर की श्रेणियों में फंसी हुई है, जिसका सीधा असर नागरिकों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। विशेषज्ञ मानते हैं कि ऐसे प्रदूषण स्तर पर लंबे समय तक रहने से सांस संबंधी रोग, एलर्जी, अस्थमा और फेफड़ों की कार्यक्षमता पर बड़ा असर पड़ सकता है।
उधर, राजधानी और एनसीआर में बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) में बदलाव किए हैं। अब GRAP-2 और GRAP-3 के तहत आने वाले उपायों को और सख्त तरीके से लागू करने का निर्देश दिया गया है। कई ऐसे प्रतिबंध, जो पहले GRAP-4 में शामिल थे, अब GRAP-3 के अंतर्गत लागू किए जा सकेंगे। इसके अनुसार, एनसीआर के जिलों को यह अधिकार दिया गया है कि वे कार्यालयों में केवल 50 प्रतिशत कर्मचारियों को बुलाने और बाकी को वर्क-फ्रॉम-होम की अनुमति देने जैसे फैसले ले सकें।
दिल्ली सरकार ने निजी कार्यालयों को तुरंत प्रभाव से एडवाइजरी जारी की है, जिसमें कहा गया है कि सभी प्राइवेट कंपनियां केवल आधे कर्मचारियों को ही दफ्तर में बुलाएं और बाकी कर्मचारियों को घर से काम करने की सुविधा दें। यह कदम प्रदूषण के बढ़ते स्तर को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है, ताकि लोगों की आवाजाही कम हो और हवा में प्रदूषण का स्तर कुछ हद तक नियंत्रित किया जा सके। वहीं केंद्र सरकार भी इस बात पर विचार कर रही है कि क्या केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों को भी वर्क-फ्रॉम-होम की सुविधा दी जाए।
प्रदूषण को लेकर राजनीति भी तेज हो गई है। आम आदमी पार्टी ने दिल्ली में वायु गुणवत्ता के आंकड़ों में हेरफेर का आरोप लगाया है। दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने दावा किया कि सरकार द्वारा निर्धारित श्रेणीबद्ध प्रतिबंधों को ठीक से लागू नहीं किया जा रहा है और यही कारण है कि प्रदूषण की समस्या अब सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल का रूप ले चुकी है। विपक्ष के इन आरोपों ने राजनीतिक हलकों में नई बहस को जन्म दे दिया है।
वर्तमान स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों को सलाह दी है कि वे सुबह-शाम की सैर से बचें, बच्चों और बुजुर्गों को बाहर कम समय बिताने दें, और जरूरत पड़ने पर ही घर से बाहर निकलें। मास्क का इस्तेमाल करने और घर के अंदर एयर प्यूरिफायर का उपयोग करने की भी सलाह दी गई है।
दिल्ली की हवा फिलहाल राहत देने के मूड में नहीं दिख रही। ऐसे में सभी स्कूल, कार्यालय, प्रशासनिक संस्थान और आम नागरिकों को मिलकर इस प्रदूषण संकट से निपटने की जरूरत है। हवा में घुला जहर एक बार फिर दिल्ली को खतरे की ओर धकेल रहा है और शहर को तत्काल, ठोस और दीर्घकालिक समाधान की सख्त आवश्यकता है।

