नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी में लगातार बढ़ते वायु प्रदूषण, डिजिटल जीवनशैली और अत्यधिक स्क्रीन टाइम ने यहां के लोगों की आंखों के स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव डाला है। विशेषज्ञों के अनुसार न सिर्फ बुजुर्ग, बल्कि बच्चे भी तेजी से आंखों की विभिन्न समस्याओं का शिकार बन रहे हैं। अनियमित दिनचर्या, गैजेट्स पर निर्भरता और प्रदूषण के अत्यधिक स्तर के कारण दिल्ली में नेत्र रोगों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है।
बच्चों में तेजी से बढ़ रहा मायोपिया
नेत्र रोग विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों में नजदीकी दृष्टि दोष (मायोपिया) चिंताजनक गति से बढ़ रहा है। पिछले दस वर्षों में मायोपिया के मामलों में लगभग दोगुनी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। विशेषज्ञों ने इसे "आने वाली अगली महामारी" बताया है।
लगातार स्क्रीन देखने, पर्याप्त धूप न मिल पाने और इनडोर गतिविधियों में वृद्धि ने बच्चों की आंखों पर गंभीर असर डाला है।
दिल्ली में बढ़ती प्रमुख नेत्र समस्याएं
ड्राई आइ डिजीज
डिजिटल आइ स्ट्रेन
एलर्जिक कंजंक्टिवाइटिस
मायोपिया
कार्नियल इन्फ्लेमेशन
समय से पहले मोतियाबिंद
एज-रिलेटेड मैक्यूलर डिजेनरेशन
विशेषज्ञों का कहना है कि इन बीमारियों के मरीज अब पहले की अपेक्षा कई गुना अधिक देखने को मिल रहे हैं।
प्रदूषण से हो रहा दीर्घकालिक नुकसान
इंट्राआक्युलर इम्प्लांट एंड रिफ्रेक्टिव सोसाइटी ऑफ इंडिया (IIRSI-2025) की साइंटिफिक कमेटी के अध्यक्ष प्रो. डॉ. महिपाल सिंह सचदेव ने बताया कि दिल्ली जैसे प्रदूषण-प्रधान शहरों में आंखों के लिए सबसे बड़ा खतरा निम्न कारक हैं—
पीएम 2.5
धूल और धुआं
वाहन उत्सर्जन
औद्योगिक कचरे से फैलने वाली एलर्जी
उन्होंने बताया कि लंबे समय तक प्रदूषण में रहने से कार्निया में सूजन, एलर्जिक ब्लेफेराइटिस, आंखों की लालिमा, ड्राईनेस और समय से पहले मोतियाबिंद बनने का जोखिम तेजी से बढ़ता है।
बच्चे, युवा और बुजुर्ग — सभी जोखिम में
बच्चों में बढ़ता स्क्रीन टाइम → मायोपिया में तेज वृद्धि
युवाओं में लैपटॉप-मोबाइल का अत्यधिक उपयोग → ड्राई आइ सिंड्रोम
बुजुर्गों में प्रदूषण और बढ़ती उम्र → मैक्यूलर डिजेनरेशन में बढ़ोतरी
डिजिटल लाइफस्टाइल रेटिना पर डाल रही है असर
डॉ. सचदेव के अनुसार मोबाइल, लैपटॉप और स्मार्ट टीवी जैसे डिजिटल उपकरणों का लगातार उपयोग रेटिना पर लम्बे समय तक प्रभाव डाल रहा है। कई अनुसंधानों में यह बात सामने आई है कि:
यदि स्क्रीन टाइम और प्रदूषण का वर्तमान स्तर इसी तरह बढ़ता रहा, तो अगले 5–10 वर्षों में नेत्र रोगियों की संख्या दोगुनी हो सकती है।
दिल्ली में आंखों के मरीजों की वर्तमान स्थिति
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार—
5 लाख से अधिक लोग किसी न किसी नेत्र रोग से पीड़ित
25 लाख से अधिक लोग आंशिक या गंभीर दृष्टि कमी से प्रभावित
यह संख्या तेजी से बढ़ती हुई बताई जा रही है, जिसकी सबसे बड़ी वजह प्रदूषण और गैजेट्स पर निर्भर जीवनशैली है।

