अध्यक्ष राजेश कुमार सिद्धार्थ का संदेश— “संविधान हमारी अस्मिता, सुरक्षा और समानता की रीढ़ है”
उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों, तहसीलों, ब्लॉकों, पंचायतों और शैक्षणिक संस्थानों में डॉ. आंबेडकर संवैधानिक महासंघ एवं किसान कांग्रेस की संयुक्त पहल पर इस वर्ष संविधान दिवस अत्यंत धूमधाम, गरिमा और व्यापक जनसहभागिता के साथ मनाया गया।
इस अवसर पर महासंघ के अध्यक्ष एवं किसान कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष श्री राजेश कुमार सिद्धार्थ ने पूरे राज्य की जनता के नाम एक विस्तृत, सारगर्भित और लोकतांत्रिक मूल्यों से प्रेरित संदेश जारी किया, जिसमें संविधान के महत्व, उसके मूल सिद्धांतों, मौलिक अधिकारों, सामाजिक न्याय और वर्तमान परिस्थितियों में उसकी रक्षा की आवश्यकता पर विस्तार से प्रकाश डाला।
राज्यभर के 75 जिलों में आयोजित कार्यक्रमों का मुख्य उद्देश्य —
जनता को संविधान के प्रति जागरूक करना,
उसकी मूल भावना को समझाना,
सामाजिक समरसता को बढ़ावा देना,
लोकतांत्रिक अधिकारों की सुरक्षा पर बल देना,
— तथा यह संदेश देना था कि संविधान ही भारत के लोकतांत्रिक अस्तित्व की सर्वोच्च आधारशिला है।
2. कार्यक्रमों की व्यापकता — पूरे प्रदेश में 500 से अधिक आयोजन
डॉ. आंबेडकर संवैधानिक महासंघ एवं किसान कांग्रेस द्वारा मिलकर लगभग 500 से अधिक छोटे-बड़े कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें—
संविधान पाठ एवं प्रस्तावना वाचन
सामाजिक न्याय संगोष्ठी
किसान-युवा संवाद
संविधान संरक्षण पदयात्रा
छात्र-शिक्षक परिचर्चा
महिला सहभागिता कार्यक्रम
गांव-गांव संविधान जागरूकता कक्षाएँ
पोस्टर, पम्पलेट और जनसंदेश अभियान
मुख्य आयोजन लखनऊ, कानपुर, वाराणसी, प्रयागराज, मथुरा, मेरठ, गोरखपुर, आज़मगढ़, बरेली, सीतापुर, अंबेडकरनगर, बलरामपुर, सोनभद्र, मिर्ज़ापुर, चंदौली, मऊ तथा बुंदेलखंड क्षेत्र में हुए, जिनमें हजारों नागरिकों ने भाग लेकर संविधान दिवस को एक जनांदोलन का स्वरूप प्रदान किया।
3. अध्यक्ष राजेश कुमार सिद्धार्थ का प्रदेशव्यापी संबोधन
कार्यक्रमों का केंद्र बिंदु था—
अध्यक्ष राजेश कुमार सिद्धार्थ का विस्तृत प्रदेशव्यापी संदेश, जिसने जनता, ग्रामीण समुदायों, युवाओं, किसानों, मजदूरों और शिक्षकों के बीच गहरा प्रभाव छोड़ा।
उन्होंने अपने संबोधन में कहा:
**“संविधान सिर्फ कानूनों की एक पुस्तक नहीं, बल्कि यह भारत की आत्मा है।
यह हमारी अस्मिता, हमारी सुरक्षा और हमारी समानता की रीढ़ है।”**
उन्होंने आगे कहा कि भारतीय संविधान दुनिया की सबसे उन्नत और मानवीय संवेदनाओं से परिपूर्ण व्यवस्था है, जो हर नागरिक को समान अधिकार, समान सम्मान और समान अवसर प्रदान करती है।
4. बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर को नमन
अपने संबोधन में श्री सिद्धार्थ ने कहा कि संविधान दिवस, बाबा साहेब के विचारों, संघर्षों और त्याग को स्मरण करने का दिन है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि—
बाबा साहेब ने भारत की सामाजिक विषमता, आर्थिक असमानता और जातिगत शोषण को गहराई से समझते हुए संविधान का निर्माण किया।
उन्होंने कमजोर वर्गों की आवाज़ को राष्ट्रीय मंच पर स्थापित किया।
आज आवश्यकता है कि उनके विचारों को शिक्षा, समाज एवं शासन व्यवस्था में और दृढ़ता के साथ लागू किया जाए।
उन्होंने कहा कि संविधान दिवस हमें केवल गर्व नहीं देता, बल्कि यह हमारी जिम्मेदारी को भी बढ़ाता है कि हम उस विरासत की रक्षा करें जो हमें डॉ. अंबेडकर ने दी।
5. मौलिक अधिकारों पर बढ़ते दबाव पर चिंता
श्री सिद्धार्थ ने कहा कि आज संविधान द्वारा प्रदत्त कई अधिकारों पर प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से दबाव देखा जा रहा है।
उन्होंने उल्लेख किया—
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सीमाएँ
सामाजिक न्याय कार्यक्रमों में कटौती
शिक्षा और रोजगार के अवसरों में असमानता
कृषि विपणन पर कॉरपोरेट दबाव
मजदूरों के श्रम अधिकारों में कमी
कमजोर वर्गों की सुरक्षा में गिरावट
उन्होंने कहा कि:
“देश की लोकतांत्रिक आत्मा तभी सुरक्षित रह सकती है, जब संविधान के मूल अधिकार अक्षुण्ण रहेंगे।”
6. सामाजिक न्याय—महासंघ की प्रतिबद्धता
डॉ. आंबेडकर संवैधानिक महासंघ का मुख्य उद्देश्य ही है सामाजिक न्याय, और संविधान दिवस जैसे आयोजन इस विचार को मजबूत करने का अवसर प्रदान करते हैं।
श्री सिद्धार्थ ने कहा कि—
दलित, पिछड़े, आदिवासी, अल्पसंख्यक, किसान, मजदूर और महिला वर्ग—इन्हीं के अधिकार सर्वाधिक चुनौती में हैं।
यदि संविधान की रक्षा करनी है, तो सबसे पहले इन समुदायों की रक्षा करनी होगी।
सामाजिक न्याय केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि राष्ट्र की आत्मा है।
7. किसान समस्याओं पर विस्तृत चर्चा
किसान कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष होने के नाते, श्री सिद्धार्थ ने किसानों की स्थिति पर विशेष चिंता व्यक्त की।
उन्होंने कहा—
खेती लगातार घाटे का सौदा बनती जा रही है।
खाद, बीज, डीज़ल, बिजली की लागत बढ़ने से किसान आर्थिक दबाव में है।
फसल खरीद में पारदर्शिता नहीं है।
MSP को कानूनी दर्जा नहीं मिला।
ग्रामीण युवा बेरोजगार और निराश है।
उन्होंने कहा:
“देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ किसान है, परंतु आज वही सबसे ज्यादा संकट में है।”
8. युवाओं के प्रति संदेश—संविधान को पढ़ें, समझें, अपनाएँ
श्री सिद्धार्थ ने युवाओं को संविधान पढ़ने की प्रेरणा दी।
उन्होंने कहा—
युवा ही परिवर्तन का वाहक है।
संविधान का अध्ययन करने से युवा भ्रम, फेक न्यूज़ और उन्मादी राजनीति से बचेंगे।
जो युवा संविधान को समझता है, वही लोकतंत्र को बचा सकता है।
छात्र राजनीति को सामाजिक न्याय, शिक्षा और रोजगार के मुद्दों पर केंद्रित किया जाना चाहिए।
9. महिलाओं की सहभागिता—समानता का मूल आधार
महासंघ द्वारा आयोजित कार्यक्रमों में महिलाओं की बड़ी भागीदारी रही।
श्री सिद्धार्थ ने कहा—
भारतीय संविधान महिला अधिकारों का सबसे बड़ा संरक्षक है।
शिक्षा, सुरक्षा, रोजगार और समान वेतन—ये सभी संवैधानिक गारंटी हैं।
महिला भागीदारी बढ़े बिना समाज मजबूत नहीं हो सकता।
10. संविधान पाठ और प्रस्तावना वाचन—एक ऐतिहासिक पहल
संविधान दिवस की सबसे अनोखी पहल रही—
“उद्देशिका पाठ संकल्प अभियान”
इस अभियान के माध्यम से—
हजारों नागरिकों ने सार्वजनिक कार्यक्रमों में प्रस्तावना का सामूहिक वाचन किया।
बच्चों और युवाओं को संविधान की पुस्तकें बाँटी गईं।
स्कूलों में “संविधान सप्ताह” मनाया गया।
कार्यकर्ताओं ने घर-घर जाकर संविधान के प्रमुख बिंदु समझाए।
इस पहल ने संविधान को जनता के बीच एक जीवंत दस्तावेज़ के रूप में स्थापित किया।
11. लोकतंत्र की रक्षा—एक सामूहिक संकल्प
श्री सिद्धार्थ ने कहा:
**“लोकतंत्र केवल वोट डालने का अधिकार नहीं है।
लोकतंत्र वह शक्ति है जो सत्ता को जनता के प्रति जवाबदेह बनाती है।”**
उन्होंने जनता से अपील की—
किसी भी प्रकार की असमानता का विरोध करें।
संवैधानिक संस्थाओं की स्वतंत्रता की रक्षा करें।
मतभेद को संवाद में बदलें, संघर्ष में नहीं।
जाति, धर्म और झूठे प्रचार की राजनीति को नकारें।
12. संगठनात्मक मजबूती—ग्रामीण स्तर तक नेटवर्क
संविधान दिवस के अवसर पर महासंघ ने—
जिला, ब्लॉक, मंडल और ग्राम स्तर पर नई समितियाँ गठित कीं।
संविधान अध्ययन केंद्रों की स्थापना की।
सोशल मीडिया पर “संविधान जागरूकता श्रृंखला” चलाई।
युवा एवं महिला विंग का विस्तार किया।
इससे संगठन को राज्यभर में महत्वपूर्ण गति मिली।
13. राजेश कुमार सिद्धार्थ का अंतिम संकल्प वक्तव्य
अपने समापन संदेश में उन्होंने कहा:
**“जब तक संविधान जिंदा है, तब तक भारत जिंदा है।
जब तक समानता सुरक्षित है, तब तक नागरिक सुरक्षित हैं।
और जब तक जनता जागरूक है, तब तक लोकतंत्र सुरक्षित है।”**
उन्होंने यह भी कहा—
महासंघ आने वाले दिनों में और बड़े स्तर पर संविधान जागरूकता अभियान चलाएगा।
किसानों, मजदूरों, दलित-पिछड़ों और युवाओं के अधिकारों के लिए निरंतर संघर्ष जारी रहेगा।
प्रत्येक कार्यकर्ता संविधान रक्षक की भूमिका निभाएगा।
14. निष्कर्ष
संविधान दिवस पर आयोजित कार्यक्रम केवल एक समारोह नहीं, बल्कि एक राष्ट्रव्यापी चेतना, संकल्प और जागरूकता का आंदोलन बन गया।
डॉ. आंबेडकर संवैधानिक महासंघ एवं किसान कांग्रेस की इस संयुक्त पहल ने यह सिद्ध कर दिया कि—
जनता आज भी संविधान को अपना सर्वोच्च मार्गदर्शक मानती है,
उसकी रक्षा के लिए तैयार है,
और सामाजिक न्याय के मूल्यों को जीवन में अपनाने के लिए दृढ़ संकल्पित है।
यह संविधान दिवस उत्तर प्रदेश के सामाजिक और लोकतांत्रिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुआ।

