जब तक संविधान जिंदा है, तब तक भारत जिंदा है”
— भारत माता और लोकतंत्र के नाम यह मेरी प्रतिज्ञा है
उन्होंने भावनात्मक दृढ़ता के साथ कहा:
“हमारी धरती, हमारा लोकतंत्र और हमारी राष्ट्रीय अस्मिता – इन सबकी रक्षा का नाम है भारतीय संविधान।
यदि संविधान सुरक्षित है, तो हर नागरिक सुरक्षित है।
यदि संविधान मजबूत है, तो भारत मजबूत है।
और यदि संविधान जीवित है, तो भारत की आत्मा सदैव प्रखर रहेगी।”
उन्होंने कहा कि यह केवल नारा नहीं, बल्कि एक ऐतिहासिक सत्य है जो देश के स्वतंत्रता संग्राम से लेकर आज तक समाज को दिशा देता आया है।
2. संविधान केवल दस्तावेज़ नहीं—यह हमारे अस्तित्व की रीढ़ है
उन्होंने आगे कहा:
संविधान ने भारत को राज्य से राष्ट्र बनाया।
संविधान ने विविधता को एकता में पिरोया।
संविधान ने दलित, पिछड़े, किसान, मजदूर, आदिवासी, अल्पसंख्यक, छात्र और महिला वर्ग को समान अधिकार की शक्ति दी।
संविधान ने सत्ता को जवाबदेह बनाया और जनता को सर्वोपरि स्थापित किया।
उन्होंने कहा:
“जब कोई संविधान को कमजोर करता है, वह सीधे जनता को कमजोर करता है।
जब कोई संविधान को चुनौती देता है, वह भारत को चुनौती देता है।”
**3. हमारा संघर्ष किसी दल, व्यक्ति या सरकार के खिलाफ नहीं—
हमारा संघर्ष अन्याय, असमानता और दमन के खिलाफ है**
श्री सिद्धार्थ ने स्पष्ट किया कि महासंघ और किसान कांग्रेस का संघर्ष सत्ता परिवर्तन से नहीं,
व्यवस्था परिवर्तन,
चेतना परिवर्तन
और
नीतिगत सुधार
से सम्बंधित है।
उन्होंने कहा:
हमारा संघर्ष लोकतंत्र को मजबूत करने का है
हमारा संघर्ष कमजोर वर्गों को न्याय देने का है
हमारा संघर्ष संविधान-समर्थक समाज बनाने का है
हमारा संघर्ष जनभागीदारी बढ़ाने का है
हमारा संघर्ष अधिकारों की रक्षा का है
4. किसानों, मजदूरों और ग्रामीण भारत की रक्षा ही लोकतंत्र की रक्षा है
राजेश सिद्धार्थ ने अपने वक्तव्य में कहा:
“भारत गांवों में बसता है और गांव संविधान की आत्मा है।”
उन्होंने किसानों की वर्तमान परिस्थिति पर चिंता प्रकट की—
फसल का लागत मूल्य बढ़ गया
MSP कानूनी नहीं
खरीद पारदर्शी नहीं
कर्ज बढ़ता जा रहा
साहूकारी बढ़ी
डीजल–बिजली महंगी
नई पीढ़ी खेती से दूर
उन्होंने कहा:
“जो हाथ भारत को भोजन देता है, वह आज सबसे असुरक्षित है — यह लोकतंत्र की सबसे बड़ी विडंबना है।”
5. युवाओं के लिए चेतावनी और प्रेरणा
उन्होंने कहा:
युवा भ्रमित न हों
सोशल मीडिया के झूठ से बचें
भड़काऊ राजनीति से बचें
इतिहास और संविधान को पढ़ें
मानवता को धर्म से ऊपर रखें
रोजगार और शिक्षा पर फोकस करें
जाति–धर्म–घृणा की राजनीति को नकारें
और सबसे महत्वपूर्ण:
“युवा ही संविधान के सच्चे रक्षक हैं।
यदि युवा जाग गया तो कोई ताकत लोकतंत्र को नहीं हरा सकती।”
6. महिलाओं की समानता—संविधान का मूल स्तंभ
उन्होंने कहा:
संविधान ने महिलाओं को समान अधिकार दिए
परंतु सामाजिक व्यवस्था अभी भी असमान है
महिलाओं की भागीदारी बढ़े बिना लोकतंत्र अधूरा है
शिक्षा, सुरक्षा और सम्मान हर महिला का अधिकार है
उन्होंने कहा:
“जिस समाज में महिलाएँ सुरक्षित नहीं, वह समाज लोकतांत्रिक नहीं।”
7. सामाजिक न्याय—हमारे आंदोलन का केंद्र
उन्होंने कहा:
बाबा साहेब ने दलितों, पिछड़ों, आदिवासियों और कमजोर वर्गों को आवाज दी
पर आज भी समाज विषमता से मुक्त नहीं
अवसरों की असमानता बनी हुई है
शासन व्यवस्था में प्रतिनिधित्व कम है
संवैधानिक तंत्र पर दबाव है
उन्होंने कहा:
“जब तक अंतिम व्यक्ति को न्याय नहीं मिलता,
संविधान की यात्रा अधूरी है।”
8. लोकतंत्र पर बढ़ते खतरों पर चेतावनी
उन्होंने कहा:
संस्थाओं की स्वायत्तता पर दबाव
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला
सरकारी एजेंसियों का दुरुपयोग
मीडिया पर नियंत्रण
शिक्षा पर एकतरफा प्रभाव
आर्थिक नीतियाँ कॉर्पोरेट–मुखी
उन्होंने स्पष्ट कहा:
“लोकतंत्र की रक्षा जनता ही कर सकती है।
यदि जनता चुप हो गई, तो संविधान कमजोर पड़ जाएगा।”
9. हमारा संकल्प — संविधान रक्षक अभियान
उन्होंने घोषणा की:
“डॉ. आंबेडकर संवैधानिक महासंघ प्रदेश के हर गांव, हर गांव की हर बस्ती और हर बस्ती के हर व्यक्ति तक संविधान का संदेश पहुँचाएगा।”
इसके अंतर्गत—
संविधान अध्ययन केंद्र
युवाओं के लिए संविधान पुस्तकालय
महिलाओं के लिए संवैधानिक अधिकार प्रशिक्षण
किसानों के लिए MSP–अधिकार जनजागरण
छात्रों के लिए संविधान सप्ताह
प्रस्तावना–पाठ अभियान
सोशल मीडिया जागरूकता मिशन
75–जिला संविधान सुरक्षा यात्रा
जैसे कार्यक्रम शामिल रहेंगे।
10. अंतिम घोषणा — आंदोलन जारी रहेगा
अपने समापन क्षणों में श्री राजेश कुमार सिद्धार्थ ने अत्यंत दृढ़ और ऐतिहासिक शब्दों में कहा—
**“हमारी लड़ाई न किसी व्यक्ति से है, न किसी दल से।
हमारी लड़ाई अन्याय से है।
हमारी निष्ठा संविधान के प्रति है।
हमारा धर्म मानवता है।
हमारी शक्ति जनता है।
और हमारा संकल्प अटूट है।”**
उन्होंने यह भी कहा:
**“हम संविधान को न झुकने देंगे, न टूटने देंगे, न बिकने देंगे।
यह हमारी आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की रक्षा का संकल्प है।”**
अंतिम पंक्तियाँ — ऐतिहासिक प्रतिज्ञा
पूरे राज्य को संबोधित करते हुए उन्होंने अंत में कहा:
**“जब तक संविधान जिंदा है, तब तक भारत जिंदा है।
जब तक समानता जिंदा है, तब तक नागरिक जिंदा है।
जब तक न्याय जिंदा है, तब तक मानवता जिंदा है।
और जब तक जनता जागरूक है, तब तक लोकतंत्र अडिग है।”**

