पं. राधेश्याम कथावाचक के सृजन का उद्देश्य सामाजिक परिवर्तन था, संगोष्ठी में व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर विस्तृत चर्चा
बरेली नगर की महान विभूति, महाकवि और नाटककार पंडित राधेश्याम कथावाचक की 135वीं जयंती के अवसर पर आज पांचाल सांस्कृतिक परिषद के तत्वावधान में एक संगोष्ठी हुई जिसमें वक्ताओं ने कथावाचक जी के सृजन के विभिन्न पक्षों और उनकी विशेषताओं पर प्रकाश डाला। साहित्यकार एवं इतिहासविद रणजीत पांचाले को ‘पं. राधेश्याम कथावाचक स्मृति सम्मान प्रदान किया गया तथा प्रधानाचार्य डॉक्टर अवनीश यादव, इको क्लब प्रवीण कुमार, बीनू सिंहा निर्भय सक्सैना प्रदीप मिश्रा, इंद्रदेव त्रिवेदी, डॉ रजनी त्रिपाठी, विवेक मिश्रा, प्रदीप मिश्रा को मिला स्मृति सम्मान
इस अवसर पर बोलते हुए मुख्य अतिथि जिलाधिकारी अविनाश सिंह ने कहा कि आज की नई पीढ़ी को भारतीय सभ्यता, संस्कृति से जोड़ने के लिए पंडित राधेश्याम कथावाचक के श्रेष्ठ मूल्यों पर आधारित साहित्य को जन-जन तक पहुंचाने की आवश्यकता है।
कथावाचक जी की पौत्री शारदा भार्गव ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि पंडित जी के महान व्यक्तित्व और उत्कृष्ट कृतित्व से नई पीढ़ी को परिचित कराने के लिए बरेली जनपद के स्कूलों में उनकी जयंती मनाई जानी चाहिए।
रुहेलखंड विश्वविद्यालय में राधेश्याम शोध पीठ की समन्वयक डॉ. अनीता त्यागी ने कहा कि यह शोधपीठ पंडित जी के साहित्य पर प्रत्येक वर्ष दस शोध-पत्र प्रकाशित कराने का प्रयास करेगी। इसके अतिरिक्त जितने भी लोग उनसे परिचित हैं उनके संस्मरणों को डॉक्यूमेंट किया जाएगा।
इतिहासविद डॉ अनिल मिश्रा ने कहा कि राधेश्याम रामायण में लोक तत्व समाहित हैं। उसमें माधुर्य और सरसता है जिसके कारण वह जन-जन को अपनी ओर आकर्षित करती है।
लेखक रणजीत पांचाले ने कहा कि पंडित जी सनातन संस्कृति के उन्नायक थे। लेकिन उन्होंने अपने संपूर्ण लेखन में किसी भी संप्रदाय के विरुद्ध एक शब्द भी नहीं लिखा है। वह समाज को विभाजित करने वाली प्रवृत्तियों के विरोधी थे। उन्होंने अपनी रचनाओं में देश की एकता पर विशेष बल दिया था।
कथावाचक जी के प्रपौत्र संजय शर्मा ने पंडित जी के गायन की विशिष्ट शैली ‘राधेश्याम तर्ज’ में उनकी रामायण के प्रसंग सुनाए।
उ. प्र. राज्य महिला आयोग की सदस्य पुष्पा पाण्डेय,उ. प्र. संगीत नाटक अकादमी के सदस्य डॉ सुभाष दीक्षित,
साहित्यकार आचार्य देवेंद्र देव, इंद्रदेव त्रिवेदी मोहन चंद्र पांडे नवगीतकार रमेश गौतम, समालोचक डॉ नितिन सेठी, शिक्षाविद सौरभ अग्रवाल एवं मोनिका अग्रवाल ने अनेक उदाहरण देकर पंडित जी के सामाजिक सरोकारों और उनकी काव्यगत विशेषताओं पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम का बहुत ही कुशल संचालन साहित्यकार डॉ अवनीश यादव ने किया। पूर्व पीसीएस अधिकारी रामसेवक द्विवेदी ने सभी के प्रति आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर विक्रम भार्गव, पूजा भार्गव, सुरेंद्र बीनू सिन्हा, भारती सिंह, पंकज शर्मा, गोपाल शर्मा, निर्भय सक्सेना, देवेंद्र उपाध्याय, राज सिंह, सौरभ तिवारी, प्राची अग्रवाल सहित नगर के अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

