प्रयागराज। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान में नो मैपिंग के मामलों में शहर और देहात के आंकड़ों में बड़ा अंतर सामने आया है। ग्रामीण क्षेत्र के मतदाता जहां आसानी से सत्यापन में पास हो रहे हैं, वहीं शहरी क्षेत्र के मतदाताओं में नो मैपिंग की संख्या अधिक पाई गई है।
नो मैपिंग का अर्थ है कि गणना प्रपत्र भरने के बाद मतदाता का नाम वर्ष 2003 की मतदाता सूची में किसी भी रूप में प्रमाणित नहीं हो रहा है।
ग्रामीण बनाम शहरी: आंकड़े
कोरांव में 6 प्रतिशत, बारा में 8, प्रतापपुर में 10, करछना में 19, हंडिया में 27 और फूलपुर में 28 प्रतिशत मतदाता नो मैपिंग में आए हैं। दूसरी ओर शहर दक्षिणी में 42, उत्तरी में 39 और पश्चिमी में 33 प्रतिशत मतदाता इस श्रेणी में हैं।
शहर के तीनों विधानसभा क्षेत्रों में ऐसे मतदाताओं को नोटिस भेजा जाना तय माना जा रहा है।
शनिवार देर शाम तक जिले में 87 प्रतिशत गणना प्रपत्रों का डिजिटाइजेशन पूर्ण हो चुका था। जिले के 1357 बूथों पर सौ प्रतिशत डेटा डिजिटाइज किया जा चुका है।
किन्हें भरना होगा गणना फार्म
जिन मतदाताओं के नाम 2003 की मतदाता सूची में नहीं थे और 2025 की सूची में जोड़े गए हैं, उन्हें गणना फार्म भरना अनिवार्य है।
गांव से शहर में स्थानांतरित होकर दस्तावेज शहर के पते पर परिवर्तित कराने वाले मतदाताओं को भी यह फार्म भरना होगा।
आवश्यक दस्तावेज
गणना फार्म के साथ राशन कार्ड, बिजली या पानी का बिल, नगर निकाय द्वारा जारी मकान नंबर अथवा किरायानामा देना होगा।
वैकल्पिक दस्तावेजों में पैन कार्ड, मनरेगा जॉब कार्ड अथवा बैंक पासबुक स्वीकार की जाएगी।
जरूरी दस्तावेज उपलब्ध न होने पर मतदाता के नाम काटने संबंधी नोटिस भेजा जाएगा। नोटिस आने पर सात दिन के भीतर ईआरओ/एईआरओ के समक्ष अपील करनी होगी।
अंतिम सूची फरवरी 2026 में
चार नवंबर से 11 दिसंबर तक बीएलओ घर-घर जाकर गणना प्रपत्र जमा करेंगे और तीन बार संपर्क करने का प्रयास करेंगे।
अनंतिम मतदाता सूची 16 दिसंबर को प्रकाशित होगी, जबकि दावे-आपत्तियां नौ दिसंबर के बाद ली जाएंगी।
अंतिम मतदाता सूची फरवरी 2026 में प्रकाशित की जाएगी।
बिना दस्तावेज भी नाम नहीं कटेगा
चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि किसी भी मतदाता का नाम बिना नोटिस और सुनवाई के नहीं हटाया जाएगा।
जरूरी दस्तावेज उपलब्ध न होने पर मतदाता बीएलओ को सूचित कर सकते हैं, जो सरकारी डाटाबेस से सत्यापन में सहायता करेगा।
माइग्रेशन की स्थिति में नए पते का प्रमाण (जैसे बिजली बिल) आवश्यक होगा।
किन्हें दस्तावेज देने की आवश्यकता नहीं
यदि मतदाता या उसके परिवार के सदस्यों का नाम वर्ष 2003 की मतदाता सूची में है, तो एसआईआर के दौरान किसी अतिरिक्त दस्तावेज की जरूरत नहीं पड़ेगी।
यदि माता-पिता के नाम 2003 की सूची में थे, और मतदाता का नाम नहीं था, तब भी कोई अतिरिक्त दस्तावेज नहीं मांगा जाएगा।
बीएलओ का तीन बार घर-घर दौरा
बीएलओ नामों के मिलान, लिंकिंग और दोहरी प्रविष्टियों की जांच करेंगे। यदि मतदाता अस्थायी रूप से बाहर है या कार्यकाल में उपलब्ध नहीं है, तो ऑनलाइन माध्यम से स्वयं भी विवरण अपडेट कर सकता है।
एसआईआर से संबंधित जानकारी और फार्म वेबसाइट पर उपलब्ध हैं।

