प्रधानी जाने को, लेकिन सवाल कायम: क्या अब सरकारी गाड़ियों को भी चुपके-चुपके छिपाया जाएगा?
शंकरगढ़ प्रयागराज। यमुनानगर क्षेत्र के शंकरगढ़ ब्लॉक अंतर्गत ग्राम सभा ओढगी तरहार में कूड़ा निस्तारण को लेकर एक बार फिर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। कुछ समय पूर्व, या यूं कहें कि कुछ महीने पहले, इसी कूड़ा उठाने वाली गाड़ी को लेकर मीडिया द्वारा खबरें प्रकाशित की गई थीं। उस दौरान यह गाड़ी ग्राम प्रधान के दरवाजे पर खड़ी हुई साफ दिखाई दे रही थी, लेकिन गांव में कूड़ा उठान शून्य था। जैसे ही खबरें चलीं और सवाल उठे, वही कूड़ा वाली गाड़ी अचानक प्रधान के दरवाजे से हटा दी गई और अब उसे ऐसी जगह चुपके से खड़ा कर दिया गया है, जहां मीडिया और विभाग के सक्षम अधिकारियों की निगाह न पड़े। ग्रामीणों का आरोप है कि यह सब जानबूझकर किया गया, ताकि जवाबदेही से बचा जा सके।सबसे बड़ा सवाल यह है कि जो गाड़ी सरकारी धन से आई, वह सार्वजनिक सेवा के लिए है या छुपाकर रखने के लिए? यदि कूड़ा गाड़ी मौजूद है तो वह गांव की गलियों में क्यों नहीं चलती? अगर गाड़ी चल रही होती, तो आज ओढगी तरहार कूड़े के ढेर और बदहाली का शिकार नहीं होता। ग्रामीणों का कहना है कि पांच साल की प्रधानी बीतने जा रही है, लेकिन कूड़ा गाड़ी का उपयोग एक दिन भी जनहित में नहीं हुआ। अब जब प्रधानी जाने को है, तो सरकारी संपत्ति को छुपाकर रखने का यह रवैया और भी गंभीर सवाल खड़े करता है। क्या ग्राम प्रधान समझते हैं कि प्रधानी खत्म होते ही सरकारी गाड़ी भी निजी चीज बन जाएगी? गांव में कूड़ादान बना हुआ है, योजनाएं कागजों में पूरी हैं, लेकिन हकीकत में पूरा गांव कूड़ाघर बन चुका है। बीमारियों का खतरा, गंदगी और बदबू से लोग त्रस्त हैं। ग्रामीणों का साफ कहना है कि अधिकारी समस्याओं की सूची गिनते-गिनते थक जाएंगे, लेकिन शिकायत करते-करते ग्रामीण नहीं थकेंगे।अब सवाल केवल कूड़ा उठान का नहीं, बल्कि सरकारी संपत्ति के दुरुपयोग और उसे छुपाने की मानसिकता का है। ग्रामीण मांग कर रहे हैं कि मामले की निष्पक्ष जांच हो, कूड़ा गाड़ी को तुरंत सार्वजनिक रूप से चलवाया जाए और जिम्मेदारों पर कार्रवाई हो, ताकि यह साफ हो सके कि सरकारी योजनाएं जनता के लिए हैं, किसी एक के दरवाजे की शोभा बढ़ाने के लिए नहीं।
