यह वंदे मातरम् लिखित है-
चमक रहा जो, फहर रही किस गति से दृष्टि टिकाओ
सब मिल करके श्रद्धा और विनय से शीश झुकाओं
यह न मात्र रेशमी वस्त्र है।
झंझावातों से न त्रस्त है-
तूफानों से भी अविचल उड़ती है मोद मनाओ
सब मिल करके श्रद्धा और विनय से शीश झुकाओ
यहां इंद्र का वज्रायुध है
यहां तुरक का अर्धचंद्र है—
वंदे मां है मध्य, अमित गति का अनुमान लगाओ
सब मिल करके श्रद्धा और विनय से शीश झुकाओ
देखो ध्वजास्तंभ के नीचे
अद्भुत जन-समूह दृग मीचे
ये योद्धा कहते तन देकर ध्वज की आन बचाओ
सब मिल करके श्रद्धा और विनय से शीश झुकाओ
पंक्तिबद्ध यह दृश्य मनोहर,
युद्ध कवच शोभित छाती पर—
वीर शौर्यमय कितने चित्ताकर्षक हमें बताओ
सब मिल करके श्रद्धा और विनय से शीश झुकाओ
मधुर तमिलभाषी नर योद्धा,
रक्तिम आंखों वाले क्षत्रिय
केरल वीर, मातृपद सेवक
तुळुभाषी, तैलंग युद्धप्रिय
यम को त्रास दिखाने वाले-
वीर मरहठे, रेड्डी-कन्नड़।
जिनकी देव प्रशंसा करते-
वे हिंदी-भाषी योद्धा गण
जब तक धरती, धर्म-युद्ध है,
हिंदी नारियों में सतीत्व है।
वे राजपूत अटल जिनकी इस-
भू पर तब तक अमर कीर्ति है
वीर सिंधुवासी जिनको-
अभिमान पार्थ की भू पर रहते
बंगनिवासी जो न भूलते-
मां की सेवा मरते-मरते
ये सब देखो यहां खड़े हैं।
करके दृढ़ संकल्प अड़े हैं।
इनकी शक्ति और सबसे पूजित ध्वज की जय गाओ
सब मिल करके श्रद्धा और विनय से शीश झुकाओ
