लखनऊ में धूमधाम के साथ तथागत गौतम बुद्ध की प्रतिमा स्थापित, बुद्ध वंदना के साथ अनुयायियों ने लिया मानवता के मार्ग पर चलने का संकल्प
लखनऊ। राजधानी लखनऊ के इंडिको क्षेत्र स्थित तथागत गौतम बुद्ध हाल में श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के वातावरण में तथागत गौतम बुद्ध की प्रतिमा का भव्य स्थापना कार्यक्रम संपन्न हुआ। इस अवसर पर बड़ी संख्या में बुद्ध अनुयायी, सामाजिक कार्यकर्ता एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान बुद्ध वंदना करते हुए सभी अनुयायियों ने तथागत गौतम बुद्ध को नमन किया और उनके बताए हुए करुणा, समता, अहिंसा और मानवता के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम की शुरुआत बुद्ध वंदना से हुई, जिसमें उपस्थित सभी श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से बुद्ध, धम्म और संघ की वंदना की। इसके पश्चात बौद्ध परंपरा के अनुसार बौद्ध भिक्षुओं को चिवरदान किया गया। श्रद्धालुओं ने श्रद्धा भाव से भिक्षुओं को चिवर अर्पित कर धर्म के प्रति अपनी आस्था और समर्पण प्रकट किया। इस अवसर पर कार्यक्रम स्थल पर भक्ति और आध्यात्मिक वातावरण बना रहा।
कार्यक्रम में मुख्य रूप से डॉ. आर. आर. जैसवार (प्रथम लोकपाल, लखनऊ), सी. एल. राजन (प्रबंधक, सेवा स्तंभ), पी. सी. कुरील (राष्ट्रीय अध्यक्ष, राष्ट्रीय भागीदारी आंदोलन), राजेश कुमार सिद्धार्थ (राष्ट्रीय अध्यक्ष, डॉ. आंबेडकर संवैधानिक महासंघ), डॉ. जगजीवन सिद्धार्थ सहित सैकड़ों की संख्या में बुद्ध अनुयायी उपस्थित रहे।
इस अवसर पर डॉ. आर. आर. जैसवार ने अपने संबोधन में कहा कि तथागत गौतम बुद्ध ने मानव समाज को करुणा, ज्ञान और विवेक का मार्ग दिखाया। उन्होंने कहा कि बुद्ध का धम्म केवल धार्मिक आस्था नहीं बल्कि जीवन को सही दिशा देने वाला मार्ग है। आज के समय में जब समाज में अनेक प्रकार की चुनौतियाँ और असमानताएँ देखने को मिलती हैं, ऐसे समय में बुद्ध के विचार और भी अधिक महत्वपूर्ण हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि हमें बुद्ध के बताए मार्ग पर चलकर समाज में शांति और भाईचारे को मजबूत करना चाहिए।
सी. एल. राजन, प्रबंधक सेवा स्तंभ ने अपने संबोधन में कहा कि बुद्ध का संदेश पूरी मानवता के लिए है। उन्होंने कहा कि बुद्ध ने अपने उपदेशों के माध्यम से अंधविश्वास और भेदभाव के विरुद्ध आवाज उठाई और ज्ञान, विवेक तथा समानता का मार्ग दिखाया। उन्होंने कहा कि हमें बुद्ध के विचारों को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का प्रयास करना चाहिए, ताकि समाज में शांति और समता की स्थापना हो सके।
पी. सी. कुरील, राष्ट्रीय अध्यक्ष राष्ट्रीय भागीदारी आंदोलन ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि बुद्ध का धम्म समाज में समानता और न्याय की भावना को मजबूत करता है। उन्होंने कहा कि बुद्ध ने यह संदेश दिया कि सभी मनुष्य समान हैं और किसी के साथ भी भेदभाव नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज के समय में बुद्ध के विचारों को अपनाना समाज को बेहतर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
राजेश कुमार सिद्धार्थ, राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. आंबेडकर संवैधानिक महासंघ ने अपने संबोधन में कहा कि तथागत गौतम बुद्ध ने समाज को वैज्ञानिक सोच, तर्क और मानवता का मार्ग दिखाया। उन्होंने कहा कि बुद्ध के विचारों को आगे बढ़ाने का कार्य बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर ने भी किया और समाज को समता, स्वतंत्रता और बंधुत्व का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि बुद्ध का धम्म समाज में न्याय और समानता स्थापित करने का सबसे मजबूत आधार है। उन्होंने उपस्थित लोगों से आह्वान किया कि वे बुद्ध के बताए मार्ग पर चलकर समाज में शांति, समता और भाईचारे की स्थापना के लिए कार्य करें।
डॉ. जगजीवन सिद्धार्थ ने अपने संबोधन में कहा कि बुद्ध का जीवन और उनका धम्म पूरी मानवता के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने कहा कि बुद्ध ने अपने जीवन के माध्यम से यह दिखाया कि करुणा, धैर्य और ज्ञान के बल पर समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि हमें बुद्ध के उपदेशों को अपने जीवन में अपनाकर समाज को बेहतर बनाने की दिशा में कार्य करना चाहिए।
कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित लोगों ने तथागत गौतम बुद्ध की प्रतिमा के समक्ष पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन किया और समाज में शांति, समता तथा मानवता के मूल्यों को स्थापित करने का संकल्प लिया। इस अवसर पर सैकड़ों की संख्या में बुद्ध अनुयायी उपस्थित रहे और कार्यक्रम को सफल बनाने में सभी ने सक्रिय योगदान दिया।
