लखनऊ। राजधानी लखनऊ में विधानसभा के सामने स्थित डॉ. अंबेडकर महासभा परिसर में बहुजन आंदोलन के महानायक, सामाजिक न्याय के प्रखर योद्धा और बहुजन समाज को राजनीतिक चेतना देने वाले महान व्यक्तित्व मान्यवर कांशीराम साहब की जयंती अत्यंत श्रद्धा, सम्मान और उत्साह के साथ मनाई गई। इस अवसर पर विभिन्न सामाजिक संगठनों, बुद्धिजीवियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और बहुजन समाज के हजारों लोगों ने उपस्थित होकर कांशीराम साहब के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी तथा उनके विचारों को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम की शुरुआत कांशीराम साहब के चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्वलन के साथ हुई। मंच पर उपस्थित सभी अतिथियों ने उनके संघर्षपूर्ण जीवन, सामाजिक चेतना और बहुजन समाज को संगठित करने के लिए किए गए महान कार्यों को याद किया। कार्यक्रम में मुख्य रूप से डॉ. लालजी प्रसाद निर्मल (सदस्य विधान परिषद, उत्तर प्रदेश), डॉ. सत्य दोहरे, अमरनाथ प्रजापति (कोषाध्यक्ष महामंत्री), गिरजेश शंखवार (पूर्व जॉइन सेक्रेटरी सचिवालय), राम शंकर गौतम, नागेंद्र प्रताप निराला, सियाराम मौर्य, राजेश कुमार सिद्धार्थ (राष्ट्रीय अध्यक्ष, डॉ. आंबेडकर संवैधानिक महासंघ) तथा विजय कुमार बाजपेई सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ. लालजी प्रसाद निर्मल ने कहा कि मान्यवर कांशीराम साहब केवल एक राजनीतिक नेता नहीं थे, बल्कि वे बहुजन समाज के जागरण के महानायक थे। उन्होंने समाज के दबे-कुचले, शोषित और वंचित वर्गों को यह समझाया कि राजनीतिक सत्ता ही सामाजिक परिवर्तन का सबसे बड़ा माध्यम है। उन्होंने कहा कि कांशीराम साहब ने अपने जीवन का एक-एक क्षण समाज को जागृत करने में लगा दिया। आज हम जो भी सामाजिक और राजनीतिक चेतना देखते हैं, उसमें उनका बड़ा योगदान है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे कांशीराम साहब के विचारों को पढ़ें, समझें और समाज में समानता व न्याय की स्थापना के लिए आगे आएं।
अपने संबोधन में डॉ. सत्य दोहरे ने कहा कि कांशीराम साहब ने बहुजन समाज को आत्मसम्मान का रास्ता दिखाया। उन्होंने कहा कि देश में लंबे समय तक समाज के बड़े हिस्से को अधिकारों से वंचित रखा गया, लेकिन कांशीराम साहब ने संगठन और संघर्ष के माध्यम से उस व्यवस्था को चुनौती दी। उन्होंने बहुजन समाज को यह सिखाया कि यदि समाज संगठित हो जाए तो वह किसी भी अन्याय के खिलाफ खड़ा हो सकता है। उन्होंने कहा कि कांशीराम साहब के विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं जितने उनके जीवनकाल में थे।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अमरनाथ प्रजापति ने कहा कि कांशीराम साहब ने अपने जीवन में कभी व्यक्तिगत स्वार्थ को महत्व नहीं दिया। उन्होंने अपना पूरा जीवन समाज के उत्थान और बहुजन आंदोलन को मजबूत करने में लगा दिया। उन्होंने कहा कि हमें उनके त्याग और संघर्ष से प्रेरणा लेकर समाज में शिक्षा, संगठन और संघर्ष के मार्ग पर आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि जब तक समाज का अंतिम व्यक्ति न्याय और सम्मान नहीं प्राप्त कर लेता, तब तक कांशीराम साहब के सपनों को पूरा नहीं माना जा सकता।
गिरजेश शंखवार ने अपने संबोधन में कहा कि कांशीराम साहब का जीवन युवाओं के लिए एक महान प्रेरणा है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार उन्होंने सीमित संसाधनों के बावजूद पूरे देश में बहुजन चेतना की अलख जगाई, वह अद्भुत उदाहरण है। उन्होंने कहा कि उन्होंने समाज को यह संदेश दिया कि शिक्षा और संगठन के माध्यम से ही समाज में बदलाव संभव है। गिरजेश शंखवार ने कहा कि आज की युवा पीढ़ी को चाहिए कि वह कांशीराम साहब के विचारों को अपनाए और सामाजिक परिवर्तन के आंदोलन को आगे बढ़ाए।
राम शंकर गौतम ने कहा कि कांशीराम साहब ने समाज को यह सिखाया कि अधिकार मांगने से नहीं बल्कि संघर्ष से मिलते हैं। उन्होंने कहा कि बहुजन समाज के लोग यदि शिक्षित, संगठित और जागरूक हो जाएं तो देश में सामाजिक न्याय की स्थापना संभव है। उन्होंने सभी से अपील की कि वे कांशीराम साहब के विचारों को गांव-गांव और शहर-शहर तक पहुंचाएं।
नागेंद्र प्रताप निराला ने कहा कि कांशीराम साहब ने देश की राजनीति में एक नई दिशा दी। उन्होंने कहा कि उन्होंने बहुजन समाज को केवल वोट बैंक नहीं बल्कि सत्ता का भागीदार बनाने का सपना देखा। उन्होंने कहा कि आज जरूरत है कि हम उनके बताए रास्ते पर चलकर समाज में समानता और न्याय की स्थापना के लिए संघर्ष करें।
सियाराम मौर्य ने कहा कि कांशीराम साहब ने यह सिद्ध कर दिया कि यदि किसी व्यक्ति में दृढ़ संकल्प और समाज के प्रति समर्पण हो तो वह इतिहास बदल सकता है। उन्होंने कहा कि आज देश में जो भी सामाजिक जागरूकता दिखाई दे रही है, उसमें कांशीराम साहब की सोच और आंदोलन की बड़ी भूमिका है।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राजेश कुमार सिद्धार्थ (राष्ट्रीय अध्यक्ष, डॉ. आंबेडकर संवैधानिक महासंघ) ने कहा कि कांशीराम साहब का जीवन संघर्ष, त्याग और समर्पण का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि उन्होंने बहुजन समाज को यह संदेश दिया कि खून का रिश्ता जितना मजबूत होता है, उससे कहीं अधिक मजबूत विचारधारा का रिश्ता होता है। उन्होंने कहा कि कांशीराम साहब ने उच्च पदों और सुविधाओं को ठुकराकर समाज की लड़ाई लड़ी, इसलिए आज पूरा देश उन्हें श्रद्धा के साथ याद करता है।
उन्होंने आगे कहा कि आने वाला समय विचारधारा की लड़ाई का समय है। एक ओर आम जनता और संघर्षशील कार्यकर्ता हैं, तो दूसरी ओर धनबल और स्वार्थ की राजनीति है। उन्होंने सभी बहुजन समाज के लोगों से अपील की कि वे एकजुट होकर सामाजिक न्याय और संविधान की रक्षा के लिए आगे आएं और एक नया इतिहास रचें।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विजय कुमार बाजपेई ने कहा कि कांशीराम साहब ने समाज के सबसे कमजोर और वंचित लोगों को आत्मविश्वास दिया। उन्होंने कहा कि आज हमें उनके विचारों को आगे बढ़ाने की जरूरत है ताकि समाज में बराबरी और सम्मान की भावना मजबूत हो सके। उन्होंने कहा कि जब तक समाज में भेदभाव और असमानता खत्म नहीं होती, तब तक कांशीराम साहब के आंदोलन को जारी रखना होगा।
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने कांशीराम साहब के जीवन पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए बताया कि उन्होंने बहुजन समाज को संगठित करने के लिए पूरे देश में अथक यात्रा की और लाखों लोगों को सामाजिक न्याय के आंदोलन से जोड़ा। उनके संघर्षों ने देश की राजनीति को नई दिशा दी और समाज के वंचित वर्गों को मुख्यधारा की राजनीति में स्थान दिलाने का काम किया।
समारोह में उपस्थित लोगों ने संकल्प लिया कि वे कांशीराम साहब के बताए मार्ग पर चलकर समाज में समानता, न्याय और भाईचारे की स्थापना के लिए कार्य करेंगे। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ता, बुद्धिजीवी, युवा और महिलाएं उपस्थित रहीं।
कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ, जिसमें आयोजकों ने सभी अतिथियों और उपस्थित लोगों का आभार व्यक्त किया। समारोह के दौरान पूरे परिसर में बहुजन आंदोलन के नारों और सामाजिक न्याय के संदेशों की गूंज सुनाई देती रही, जिससे वातावरण पूरी तरह प्रेरणादायक और उत्साहपूर्ण बना रहा।
