20-20 हजार रुपये मांगने के आरोपों से हड़कंप, जिलाधिकारी के निर्देश पर तेज हुई जांच
रिपोर्ट सुधीर वर्मा अब तक न्याय
महमूदाबाद (सीतापुर)।गरीबों के आशियाने आग में जलने के बाद मिली सरकारी राहत पर भी कथित भ्रष्टाचार की परछाईं पड़ने का मामला अब प्रशासनिक जांच के केंद्र में आ गया है। ब्लॉक महमूदाबाद की ग्राम पंचायत सरैंया चलाकापुर में अग्नि पीड़ित परिवारों से आवास दिलाने और किश्त जारी कराने के नाम पर कथित रूप से 20-20 हजार रुपये की रिश्वत मांगने के आरोपों ने पूरे क्षेत्र में सनसनी फैला दी है। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी के निर्देश पर गठित तीन सदस्यीय जांच टीम बुधवार को गांव पहुंची और शिकायतकर्ताओं के बयान दर्ज कर विस्तृत जांच शुरू कर दी।
बताया जाता है कि बीते 4 अप्रैल को ग्राम सरैंया चलाकापुर में लगी भीषण आग ने कई गरीब परिवारों के सपनों को राख में बदल दिया था। आग की इस भयावह घटना में अनेक परिवारों के घर जलकर नष्ट हो गए थे। पीड़ितों की स्थिति को देखते हुए शासन स्तर से उन्हें राहत प्रदान की गई तथा मुख्यमंत्री एवं प्रधानमंत्री आवास योजनाओं के अंतर्गत आवास स्वीकृत किए गए।
लेकिन राहत के इस प्रयास पर उस समय सवाल खड़े हो गए जब पीड़ित परिवारों ने ग्राम पंचायत अधिकारी श्रीकांत पर आवास की किश्त जारी कराने के बदले प्रति लाभार्थी 20-20 हजार रुपये की मांग करने का गंभीर आरोप लगाया। आरोप सामने आते ही मामला प्रशासन तक पहुंचा और शिकायतों ने तूल पकड़ लिया।
एक ही परिवार के तीन लाभार्थियों समेत कई ग्रामीणों ने लगाए गंभीर आरोप
शिकायतकर्ताओं के अनुसार गांव के संजय, मनोज और लवकुश पुत्र राजाराम को एक ही परिवार से तीन आवास स्वीकृत हुए हैं। इन सभी से कथित रूप से धनराशि की मांग की गई। इसके अतिरिक्त पूनम देवी पत्नी अवधराम, मीरा देवी पत्नी वीरेश तथा रामलली पत्नी देशराज ने भी आवास के नाम पर धन उगाही का आरोप लगाते हुए जिलाधिकारी से न्याय की मांग की थी।
ग्रामीणों द्वारा दिए गए प्रार्थना पत्रों को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन हरकत में आया और खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) द्वारा मामले की निष्पक्ष जांच के लिए तीन सदस्यीय टीम गठित की गई।
गांव पहुंची जांच टीम, कलमबद्ध किए गए पीड़ितों के बयान
बुधवार को जांच टीम के सदस्य एडीओ पंचायत कृष्णपाल सिंह, एडीओ सहकारिता आलोक सक्सेना तथा सिंचाई विभाग के जूनियर इंजीनियर दिनेश कुमार ग्राम सरैंया चलाकारपुर पहुंचे। टीम ने शिकायतकर्ताओं और संबंधित लाभार्थियों को बुलाकर उनके बयान दर्ज किए तथा मामले से जुड़े विभिन्न पहलुओं की गहन पड़ताल की।
जांच के दौरान अधिकारियों ने लाभार्थियों से अलग-अलग बातचीत कर तथ्यों को परखा और उपलब्ध दस्तावेजों का भी परीक्षण किया। गांव में टीम के पहुंचते ही पूरे क्षेत्र में चर्चा का माहौल बन गया और ग्रामीण बड़ी संख्या में मौके पर एकत्रित हो गए।
जल्द जिलाधिकारी को सौंपी जाएगी रिपोर्ट
जांच टीम में शामिल एडीओ पंचायत कृष्णपाल सिंह ने बताया कि शिकायतकर्ताओं के बयान दर्ज कर लिए गए हैं तथा मामले की पूरी जांच कर ली गई है। अब विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर अंतिम कार्रवाई हेतु जिलाधिकारी को भेजी जा रही है। रिपोर्ट के आधार पर आगे की प्रशासनिक कार्रवाई तय की जाएगी।
भ्रष्टाचार पर प्रशासन की नजर, ब्लॉक में मचा हड़कंप
आवास योजनाएं गरीब और जरूरतमंद परिवारों को सम्मानजनक आवास उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संचालित की जाती हैं। ऐसे में यदि जांच में रिश्वतखोरी के आरोप सही पाए जाते हैं तो यह न केवल योजनाओं की पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न होगा बल्कि जिम्मेदार लोगों पर कठोर कार्रवाई की भी संभावना बढ़ जाएगी।
फिलहाल पूरे मामले पर ग्रामीणों की निगाहें टिकी हुई हैं। अग्नि पीड़ित परिवार उम्मीद लगाए बैठे हैं कि जांच निष्पक्ष होगी और दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई करते हुए उन्हें बिना किसी अवैध वसूली के सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाया जाएगा। वहीं इस कार्रवाई से ब्लॉक स्तर के कर्मचारियों में भी खलबली मची हुई है और प्रशासनिक गलियारों में इस जांच की चर्चा जोरों पर है।
