राजेश कुमार सिद्धार्थ (राष्ट्रीय अध्यक्ष, डॉ. अम्बेडकर संवैधानिक महासंघ) ने कहा कि डॉ. भीमराव रामजी आंबेडकर द्वारा निर्मित भारतीय संविधान देश के शोषित, वंचित, दलित, आदिवासी और पिछड़े वर्गों को समान अधिकार, सम्मान और न्याय दिलाने का एक मजबूत और ऐतिहासिक आधार प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान केवल एक कानूनी दस्तावेज नहीं है, बल्कि यह सामाजिक परिवर्तन, समानता और लोकतांत्रिक मूल्यों का मार्गदर्शक है। संविधान ने उन करोड़ों लोगों को अधिकार और अवसर प्रदान किए हैं, जिन्हें सदियों तक सामाजिक भेदभाव, असमानता और शोषण का सामना करना पड़ा।
राजेश कुमार सिद्धार्थ ने कहा कि बाबा साहेब ने अपने पूरे जीवन में सामाजिक न्याय, समान अवसर और मानव गरिमा के लिए संघर्ष किया। उन्होंने शिक्षा, संगठन और संघर्ष को सामाजिक परिवर्तन का सबसे बड़ा हथियार बताया। बाबा साहेब का ऐतिहासिक संदेश “शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो” आज भी उतना ही प्रासंगिक है जितना उनके समय में था। यह संदेश केवल एक नारा नहीं बल्कि बहुजन समाज के उत्थान का मार्गदर्शन है।
उन्होंने कहा कि जब तक बहुजन समाज शिक्षित नहीं होगा, तब तक वह अपने अधिकारों के प्रति पूरी तरह जागरूक नहीं हो पाएगा। शिक्षा ही वह शक्ति है जो व्यक्ति को आत्मसम्मान, आत्मनिर्भरता और जागरूकता प्रदान करती है। इसलिए समाज के प्रत्येक वर्ग को विशेष रूप से युवाओं को शिक्षा के महत्व को समझना होगा और अपने जीवन में इसे सर्वोच्च प्राथमिकता देनी होगी। शिक्षित समाज ही अपने अधिकारों की रक्षा कर सकता है और लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत बना सकता है।
राजेश कुमार सिद्धार्थ ने कहा कि केवल शिक्षा ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि समाज का संगठित होना भी अत्यंत आवश्यक है। इतिहास गवाह है कि जब समाज संगठित होता है, तब वह बड़ी से बड़ी चुनौतियों का सामना कर सकता है और अपने अधिकारों की रक्षा कर सकता है। बहुजन समाज को जाति, क्षेत्र और छोटे-छोटे मतभेदों से ऊपर उठकर एकता और संगठन की शक्ति को समझना होगा। संगठन ही वह ताकत है जो सामाजिक परिवर्तन को संभव बनाती है।
उन्होंने यह भी कहा कि संघर्ष के बिना किसी भी समाज को उसका अधिकार नहीं मिलता। बाबा साहेब आंबेडकर ने अपने जीवन में अनेक कठिन संघर्ष किए और उन्हीं संघर्षों के परिणामस्वरूप आज देश के करोड़ों लोगों को समान अधिकार प्राप्त हुए हैं। इसलिए बहुजन समाज को लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके से अपने अधिकारों के लिए लगातार संघर्ष करते रहना होगा। संघर्ष का अर्थ केवल विरोध नहीं बल्कि जागरूकता, संगठन और सकारात्मक प्रयासों के माध्यम से समाज में परिवर्तन लाना है।
राजेश कुमार सिद्धार्थ ने कहा कि भारतीय संविधान ने सभी नागरिकों को समानता, स्वतंत्रता, न्याय और बंधुत्व के मूल सिद्धांत प्रदान किए हैं। संविधान का उद्देश्य केवल शासन व्यवस्था चलाना नहीं बल्कि समाज में समता और न्याय स्थापित करना है। बाबा साहेब ने संविधान के माध्यम से यह सुनिश्चित किया कि किसी भी व्यक्ति के साथ जाति, धर्म, लिंग या वर्ग के आधार पर भेदभाव न हो।
उन्होंने कहा कि आज आवश्यकता है कि बहुजन समाज संविधान के मूल्यों और बाबा साहेब के विचारों को अपने जीवन में अपनाए। संविधान हमें अधिकार देता है, लेकिन साथ ही यह हमें अपने कर्तव्यों के प्रति भी जागरूक करता है। यदि समाज संविधान की भावना को समझकर आगे बढ़ेगा तो निश्चित रूप से सामाजिक न्याय और समानता का सपना साकार हो सकेगा।
राजेश कुमार सिद्धार्थ ने युवाओं से विशेष आह्वान करते हुए कहा कि वे बाबा साहेब आंबेडकर के विचारों को पढ़ें, समझें और अपने जीवन में उतारें। युवा शक्ति किसी भी समाज के परिवर्तन की सबसे बड़ी ताकत होती है। यदि युवा शिक्षित, जागरूक और संगठित होंगे तो समाज में सकारात्मक बदलाव तेजी से आएगा।
उन्होंने कहा कि बहुजन समाज को अपने इतिहास, अपने महापुरुषों और अपने अधिकारों के प्रति सजग रहना होगा। समाज के महापुरुषों ने जो संघर्ष और त्याग किया है, उसे आगे बढ़ाना हमारी जिम्मेदारी है। हमें उनके विचारों को केवल कार्यक्रमों और भाषणों तक सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि उन्हें अपने व्यवहार और कार्यों में भी उतारना चाहिए।
अंत में राजेश कुमार सिद्धार्थ ने कहा कि बाबा साहेब आंबेडकर का सपना एक ऐसे भारत का था जहां हर व्यक्ति को समान अवसर मिले, किसी के साथ भेदभाव न हो और हर नागरिक सम्मान के साथ जीवन जी सके। यह सपना तभी पूरा होगा जब समाज शिक्षित, संगठित और संघर्षशील बनेगा। बहुजन समाज यदि एकजुट होकर संविधान और बाबा साहेब के विचारों के मार्ग पर चलेगा तो निश्चित रूप से सामाजिक न्याय, समानता और मानव गरिमा पर आधारित एक मजबूत और समतामूलक भारत का निर्माण संभव होगा।

