गोरखपुर, कौन कहता है आसमां में सुराख नहीं हो सकता,एक पत्थर तो तबियत से उछालो. यह बात युवा कवियत्री एवं लेखिका प्रतिभा गुप्ता" नैसर्गिक" ने अपने बलबूते पर वह मुकाम हासिल किया जो किसी सपने से कम नहीं है. उसने अल्पकाल की अवधि में अपनी कविताओं के द्वारा पूर्वांचल में ख्याति प्राप्त कर ली.कहा जाता है प्रतिभा किसी सम्मान की मोहताज नहीं होती,बस उसे सही मंच और अवसर प्रदान होना चाहिए. उन्होंने बताया कि सड़के तो चौड़ी हो गई हैं और आवागमन सुगम हो गया है, लेकिन दुर्घटना में वृद्धि होती जा रही है.हमें आवश्यकता पड़ी, सड़कें चौड़ी हुईं,पहले टू लेन थीं, अब फोर लेन हुईं।जैसे ही सड़कें फैलीं और पहले से चौड़ी हुईं,हम वाहन वालों की मनमानी में वृद्धि हुई। हम इतनी तेज गति से वाहन चला रहे हैं कि सड़क पर बैठे पशुओं पर ध्यान ही नहीं दे रहे। आए दिन सड़कों पर हादसे हो रहे हैं और उनमें एक-एक कर बहुत सारे पशुओं की जान जा रही है। कभी गाय, कभी बछड़े, कभी बिल्ली तथा ज्यादातर कुत्ते सड़क पर मरे पड़े दिखते हैं।पहले सड़क पर पशुओं के जान जाने की संख्या थोड़ी कम थी पर अब तो दिन प्रतिदिन इनकी संख्या बढ़ती ही जा रही है।हादसों के बाद वे ऐसे ही सड़क के किनारे या बीचों-बीच पड़े रह जाते हैं कोई उनके शवों को ठिकाने भी नहीं लगाता। जिससे वहाँ गंदगी के साथ-साथ दुर्गंध फैली रहती है।इस पूरी घटना के पीछे हम सभी ही जिम्मेदार हैं। अगर हम वाहन धीमी गति से चलाएँ और यातायात के नियमों का पालन करें तो हादसे न के बराबर हो जाएँगे। जिससे यह समस्या भी कम हो जाएगी। और तो और हम पशुओं के अलावा अपने जीवन को भी बचाएँगे।एक तो सड़के अब इतनी ऊँची और चौड़ी हो गयी हैं कि पशु आसानी से किनारे भी नहीं पहुँच सकते इसलिए घूम-फिर कर सड़कों पर ही रह जाना उनकी मजबूरी है।तो यह हमारी जिम्मेदारी बनती है कि हम अपनी जिम्मेदारी को समझें और उनकी सुविधा का भी ख्याल रखें। पशुओं की हत्या से बचें क्योंकि इंसान हो या अन्य प्राणी, सभी का जीवन अनमोल है।
